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वेश्या भी औरत है, उसकी आत्मा से न खेलिए

औरत में सागर सी गहराई और हिमालय सी ऊँचाई होती है. जिस तरह से सागर की गहराई से गंदगी के साथ सीप और मोती साथ-साथ पाए जाते हैं, उसी प्रकार औरत के हर रूप में एक रूप वेश्या का भी है. यहां एक उदाहरण देना चाहूगा. अगर हम सड़क पर जा रहे हैं और हमारे हाथ में खाने का टिफिन गिर जाये तो हम उस खाने को तो उसी सड़क पर छोड़ देते हैं मगर खाली टिफिन उठा कर घर में लाकर रख देते हैं. हम इस बात को अगर एक औरत की जिन्दगी से जोड़ कर देखें. हमारे देश की औरत इसी तरह की जिन्दगी जी रही है. औरत मां है, औरत बहन है, औरत पत्नी है, औरत देवी है. औरत एक ही है मगर औरत को देखने का हमारा नजरिया अलग-अलग है. यही नजरिया और नजर औरत के साथ हमारे रिश्ते का नामकरण करती है। यह सब जानते हैं कि औरत से ही हमारी सृष्टि चलती है. हम सभी कहते रहते हैं कि हमारा देश नारी प्रधान देश है और हमारे यहां नारी को देवी माना गया है. हम औरतों की पूजा करते हैं, मंदिर में जाकर. एक औरत जो पत्थर की मूरत में है, हम उसकी पूजा तो करते हैं और उसको कपड़े भी पहनाते हैं मगर दूसरी तरफ अगर वही औरत किसी कोठे पर मिल जाये तो चंद रुपये देकर हम लोग ही उसके कपड़े उतारने ...

अमर उजाला को पोस्ट छापने हेतु धन्यवाद !

समाचार पत्र खुद अपनी ओर से आपके लेखन को नोटिस करें और प्रकाशित करने लगें तो निश्चय ही अच्छा लगता है। पिछले सप्ताह ही मेरे एक मित्र ने मुझे बधाई दी कि दैनिक अमर उजाला ने मेरे ब्लॉग पर प्रकाशित पोस्ट को जस-का-तस प्रकाशित कर दिया है। मैने तारीख जाननी चाही तो वह बोला - लगभग दस दिन पहले! मैं एक पब्लिक लायब्रेरी में गया जिसमें मैं पहले कभी नहीं गया था , बेतरतीब ढंग से पड़े अखवारों के ढेर में से अमर उजाला ढूंढे। जब खोज अन्ततः सफल हुई तो वहां व्यवस्थापक महोदय से प्रार्थना की कि उस पृष्ठ को ले जाने की अनुमति दें। उन्होंने कारण पूछा तो उस पृष्ठ पर प्रकाशित अपनी पोस्ट उनको दिखाई। पूरा आलेख पढ़ने के बाद उन्होंने बधाई दी और अखवार ले जाने की सहर्ष अनुमति दे दी!   Sushant K. Singhal website : www.sushantsinghal.com Blog :   www.sushantsinghal.blogspot.com email :  singhal.sushant@gmail.com