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बिजली न डीजल पानी खींचे हर पल

उज्जैन से 20 किमी दूर छोटे से गांव कांकरिया चीराखान में नए दशक की उम्मीदें आकार ले रही हैं। यहां एक छोटे से वर्कशॉप में सिर झुकाए, हाथों में ग्रीस लगाए राधेश्याम शर्मा एक ऐसी मशीन बनाने में जुटे हैं जो बिना बिजली या डीजल के 24 घंटे बोरवेल से पानी खींचेगी। इस प्रयोग के सफल होने पर न केवल बिजली की कमी से जूझ रहे लाखों किसानों को फायदा होगा, बल्कि प्रदूषण न होने के कारण पर्यावरण की सेहत भी सुधरेगी। शर्मा बताते हैं, यह मशीन न तो खराब होगी, न ही इसमें कोई अतिरिक्त खर्च होगा। यानी बिजली, डीजल, मोटरपंप की मरम्मत के बार-बार के खर्च से हमेशा के लिए छुटकारा। शर्मा की मानें तो हवा और पानी के दबाव से चलने वाली यह मशीन 24 घंटे पानी देती रहेगाी। इसकी लागत 50 हजार से एक लाख रुपए के बीच आने का अनुमान है। एक स्थानीय बैंक ने इसके लिए उन्हें आर्थिक मदद देने का भरोसा दिया है। महज हायर सेकंडरी तक पढ़े राधेश्याम को इंजीनियरिंग विरासत में मिली है। उनके पिता जगदीशचंद शर्मा मोटर मैकेनिक रह चुके हैं, ताऊ भी गांव में ही मशीनें सुधारने के लिए वर्कशॉप चलाते हैं। ग्रामीणों और किसानों की मशीनें ठीक करते-करते राधेश...

नवगीत:: अपना हर पल है हिन्दीमय --संजीव 'सलिल'

नवगीत: संजीव 'सलिल' अपना हर पल है हिन्दीमय एक दिवस क्या खाक मनाएँ? बोलें-लिखें नित्य अंग्रेजी जो वे एक दिवस जय गाएँ... निज भाषा को कहते पिछडी. पर भाषा उन्नत बतलाते. घरवाली से आँख फेरकर देख पडोसन को ललचाते. ऐसों की जमात में बोलो, हम कैसे शामिल हो जाएँ?... हिंदी है दासों की बोली, अंग्रेजी शासक की भाषा. जिसकी ऐसी गलत सोच है, उससे क्या पालें हम आशा? इन जयचंदों की खातिर हिंदीसुत पृथ्वीराज बन जाएँ... ध्वनिविज्ञान- नियम हिंदी के शब्द-शब्द में माने जाते. कुछ लिख, कुछ का कुछ पढने की रीत न हम हिंदी में पाते. वैज्ञानिक लिपि, उच्चारण भी शब्द-अर्थ में साम्य बताएँ... अलंकार, रस, छंद बिम्ब, शक्तियाँ शब्द की बिम्ब अनूठे. नहीं किसी भाषा में मिलते, दावे करलें चाहे झूठे. देश-विदेशों में हिन्दीभाषी दिन-प्रतिदिन बढ़ते जाएँ... अन्तरिक्ष में संप्रेषण की भाषा हिंदी सबसे उत्तम. सूक्ष्म और विस्तृत वर्णन में हिंदी है सर्वाधिक सक्षम. हिंदी भावी जग-वाणी है निज आत्मा में 'सलिल' बसाएँ... ******************** ...