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Showing posts with the label अजय ब्रह्मात्‍मज

लेखकों के सम्‍मान की लड़ाई

-अजय ब्रह्मात्‍मज  आजकल जितने टीवी चैनल, लगभग उतने अवार्ड। ये अवार्ड टीवी सीरियल और शो में उल्लेखनीय काम कर रहे कलाकारों, लेखकों, तकनीशियनों और निर्माता-निर्देशकों को दिए जाते हैं। याद करें कि क्या आपने किसी टीवी अवार्ड समारोह में किसी लेखक को पुरस्कार ग्रहण करते देखा है? न तो किसी लेखक का नाम याद आएगा और न ही उनका चेहरा, जबकि टीवी और फिल्म का ब्लू प्रिंट सबसे पहले लेखक तैयार करता है। फिल्मों के अवार्ड समारोह में अवश्य लेखकों को पुरस्कार लेते हुए दिखाया जाता है। टीवी के लेखकों को यह मौका नहीं दिया जाता। क्यों..? टीवी लेखकों का एक समूह मुंबई में यही सवाल पूछ रहा है। उनके संगठन ने सदस्य लेखकों का आवान किया है कि वे अपने सम्मान के लिए पुरस्कार समारोहों का बहिष्कार करें। वे अपने नाम से दिए जाने वाले पुरस्कारों को ठुकरा दें। उनकी अनेक शिकायतें हैं। पुरस्कारों के लिए नामांकित लेखकों को समारोहों में बुला तो लिया जाता है, लेकिन उन्हें पुरस्कार ग्रहण करने के लिए मंचपर नहीं बुलाया जाता। उन्हें रिहर्सल के दौरान ही पुरस्कार देते हुए शूट कर लिया जाता है और आग्रह किया जाता ह...

सत्यजित ना होते तो सत्यमेव जयते ना होता।

आमिर खान की प्रस्तुति सत्यमेव जयते के 13 एपीसोड पूरे हो गए। इस शो के इंपैक्ट के ऊपर भी उन्होंने एक एपिसोड शूट किया है, जो जल्द प्रसारित होगा। सत्यमेव जयते की पूर्णाहुति कर आमिर खान अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए निकल चुके हैं। वे शिकागो में धूम-3 की शूटिंग करेंगे। सत्यमेव जयते के निर्देशक सत्यजित भटकल का काम अभी समाप्त नहीं हुआ है। वे इसे समेटने में लगे हैं। सत्यमेव जयते से निकलने में उन्हें और उनकी टीम को वक्त लगेगा। पिछले ढाई-तीन सालों से वे अपनी टीम के साथ इस स्पेशल शो की तैयारियों, शोध, अध्ययन और प्रस्तुति में लगे रहे। उनकी मेहनत और सोच का ही यह फल है कि सत्यमेव जयते टीवी का असरकारी प्रोग्राम साबित हुआ। हालांकि ऊपरी तौर पर सारा क्रेडिट आमिर खान ले गए और यही होता भी है। टीवी हो या फिल्म,उसके ऐंकर और कलाकारों को ही श्रेय मिलता है। सत्यमेव जयते भारतीय टीवी परिदृश्य का ऐसा पहला शो है, जिसने दर्शकों समेत ब्यूरोक्रेसी, सरकार और राजनीतिज्ञों को झकझोरा। सामाजिक मुद्दों और विषयों पर पहले भी शो आते रहे हैं, लेकिन सत्यमेव जयते की तरह सारगर्भित और प्रभावकारी शो और कोई नहीं आ पाया। शो में ...

उत्‍सवधर्मी भारतीय समाज में उत्‍सव के सोलह प्रसंग क्‍या हैं?

♦ अजय ब्रह्मात्‍मज भा रतीय दर्शन और जीवनशैली में गर्भधारण से मृत्‍यु तक के विभिन्‍न चरणों को रेखांकित करने के साथ उत्‍सव का प्रावधान है। आरंभ में हम इसे चालीस संस्‍कारों के नाम से जानते थे। गौतम स्‍मृति में चालीस संस्‍कारों का उल्‍लेख मिलता है। महर्षि अंगिरा ने इन्‍हें पहले 25 संस्‍कारों में सीमित किया। उसके बाद व्‍यास स्‍मृति में 16 संस्‍कारों का वर्णन मिलता है। इन संस्‍कारों का  किसी धर्म, जाति, संप्रदाय से सीधा संबंध नहीं हैं। वास्‍तव में ये संस्‍कार मनुष्‍य जीवन के सभी चरणों के उत्‍सव हैं। इन उत्‍सवों के बहाने परिजन एकत्रित होते हैं। उनमें परस्‍पर सहयोग, सामूहिकता और एकता की भावना बढ़ती है। जीवन का सामूहिक उल्‍लास उन्‍हें जोड़ता है। आधुनिक जीवन पद्धति के विकास के साथ वर्तमान में संयुक्‍त परिवार टूट रहे हैं। फिर भी 16 संस्‍कारों में से प्रचलित कुछ संस्‍कारों के अवसर पर विस्‍तृत परिवार के सभी सदस्‍यों और मित्रों के एकत्रित होने की परंपरा नहीं टूटी है। शहरों में न्‍यूक्लियर परिवार के सदस्‍य अपने मित्रों और पड़ोसियों के साथ इन संस्‍कारों का उत्‍सव मनाते हैं। देहातों और कस्...

खिलाडी की धमाकेदार बापसी

  सराहना और विवेचना से अधिक श्रद्धांजलि लिखने में सक्रिय फिल्म पत्रकारों ने अक्षय कुमार के करिअर का अंत कर दिया था। उनके अनुसार खिलाड़ी अक्षय कुमार की वापसी असंभव है। उनकी फिल्में लगातार पिट रही थीं। उसी दरम्यान एक-एक कर सारे लोकप्रिय स्टार की फिल्में  100  करोड़ क्लब में पहुंच रही थीं। सलमान खान ,  आमिर खान ,  अजय देवगन और शाहरुख खान के बाद सीधे रितिक रोशन ,  रणबीर कपूर ,  इमरान खान और इमरान हाशमी का जिक्र किया जाने लगा था। निरंतर असफलता के बावजूद अक्षय कुमार में कटुता नहीं आई थी। वे खिन्न जरूर रहने लगे थे। इस खिन्नता में उन्होंने अपने आलोचकों को आड़े हाथों लिया। अपनी बुरी फिल्मों की बुराई भी उन्हें पसंद नहीं आई। यह स्वाभाविक था। स्टार एक बार फिसलता है तो रुकने-थमने और फिर से उठने तक वह यों ही अपनी नाकामी पर चिल्लाता है। अक्षय कुमार अपवाद नहीं रहे।   एक अच्छी बात रही कि फिर से शीर्ष पर आने की बेताबी में उन्होंने ऊलजलूल फिल्म नहीं कीं। वे अपनी सीमाओं और खूबियों को अच्छी तरह जानते हैं। देश का आम दर्शक उन्हें पसंद करता है। प्रशंसक और दर्शक ...

दिबाकर बनर्जी की पॉलिटिकल थ्रिलर ‘शांघाई’

-अजय ब्रह्मात्‍मज    हर फिल्म पर्दे पर आने के पहले कागज पर लिखी जाती है। लेखक किसी विचार, विषय, मुद्दे, संबंध, भावना, ड्रामा आदि से प्रेरित होकर कुछ किरदारों के जरिए अपनी बात पहले शब्दों में लिखता है। बाद में उन शब्दों को निर्देशक विजुअलाइज करता है और उन्हें कैमरामैन एवं अन्य तकनीशियनों की मदद से पर्दे पर रचता है। ‘शांघाई’ दिबाकर बनर्जी की अगली फिल्म है। उन्होंने उर्मी जुवेकर के साथ मिल कर इसका लेखन किया है। झंकार के लिए दोनों ने ‘शांघाई’ के लेखन के संबंध में बातें कीं।   पृष्ठभूमि  उर्मी -  ‘शांघाई’ एक इंसान की जर्नी है। वह एक पाइंट से अगले पाइंट तक यात्रा करता है। दिबाकर से अक्सर बातें होती रहती थीं कि हो गया न ! समाज खराब है, पॉलिटिशियन करप्ट हैं, पढ़े-लिखे लोग विवश और दुखी हैं। ऐसी बातों से भी ऊब हो गई है। आगे क्या बात करती है?  दिबाकर -  अभी तो पॉलीटिशयन बेशर्म भी हो गए हैं। वे कहते हैं कि तुम ने मुझे बुरा या चोर क्यों कहा? अभी अन्ना आंदोलन में इस तरह की बहस चल रही थी। ‘शांघाई’ में तीन किरदार हैं। वे एक सिचुएशन में अपने ढंग...

मेरी फिल्‍म का माफिया केवल गोली भरता हुआ नहीं दिखता

अनुराग कश्‍यप से अजय ब्रह्मात्‍मज की बातचीत संदर्भ : कान फिल्‍म फेस्टिवल और गैंग्‍स ऑफ वासेपुर फिल्‍मकार अनुराग कश्‍यप से वरिष्‍ठ फिल्‍म समीक्षक अजय ब्रह्मात्‍मज की यह बातचीत उनके कान फिल्‍म फेस्विल जाने के पहले हुई थी। जैसा कि अजय ब्रह्मात्‍मज सूचना देते हैं, उस दिन अनुराग कश्‍यप बहुत व्‍यस्‍त थे। बड़ी मुश्किल से देश-विदेश के पत्रकारों से बातचीत और इंटरव्‍यू के बीच-बीच में मिले समय में यह साक्षात्‍कार हो पाया। इसका पहला अंश पढ़िए… मॉडरेटर … कान में चार फिल्मों का चुना जाना बड़ी खबर है, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में जैसे कोई हलचल ही नहीं है? ह म क्या कर सकते हैं। कुछ लोगों के व्यक्तिगत संदेश आये हैं। कुछ नहीं कह सकते। हमारी इंडस्ट्री ऐसी ही है। मेनस्ट्रीम की कोई फिल्म चुनी गयी रहती, तो बड़ी खबर बनती। इंडस्ट्री कभी हमारी कामयाबी को सेलिब्रेट नहीं करती। हर छोटी बात पर ट्विट की बाढ़ सी आ जाती है। इस बार वहां भी सन्नाटा छाया है? उ न्हें लगता होगा कि हम योग्य फिल्ममेकर नहीं हैं। ये कौन से लोग हैं, जिनकी फिल्में जा रही हैं? इनसे अच्छी फिल्में तो हम बनाते हैं। इंडस्ट्री क...