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पटना में दिनदहाड़े लड़की का चीरहरण

पटना. बिहार की राजधानी पटना में आज तालिबान जैसी घटना का एक शर्मनाक नजारा देखने को मिला। शहर के भीड़-भाड़ वाले रास्ते पर एक लड़की के उपर चोरी का झूठा आरोप लगाकर उसके जिस्म पर मौजूद कपड़े फाड़े गए। प्राप्त जानकारी के मुताबिक लड़की अपने ब्वॉय फ्रेंड के साथ घूम रही थी तभी दोनों में किसी बात को लेकर अनबन हुई और लड़की ने लड़के से उसका मोबाइल छीन लिया जिसके बाद लड़के ने लड़की पर चोरी का आरोप लगाकर भीड़ एकत्रित कर लिया जिसके बाद शुरु हो गया तालिबानी हैवानियत। वहां मौजूद कुछ लोगों ने लड़के-लड़की को जिस्मफरोसी के धंधें में लिप्त होने को लेकर दोनों को जमकर पीटा,इसके बाद समाज के ये गुंडे लड़की का सबके सामने बीच सड़क पर चीर हरण करने लगे। लड़की के शरीर पर मौजूद कपड़ो को ये लोग कुत्तों की तरफ फाड़ दिए। सबसे बड़ी बात यह है कि उस भीड़ में ऐसा कोई भी शख्स नहीं था जो यह बोल सके कि यह गलत हो रहा है। सभी इस घटना को रोमांचक अंदाज में लेकर मजा ले रहे थे। लड़की चीख-पुकार कर रहम की भीख मांग रही थी लेकिन सभी मूक बनकर सिर्फ नजारा देख रहे थे। इतने शर्मनाक घटना के बाद वहां की पुलिस अपना बचाव ...

क्या सच में बदल गया इंसान...?

आज की इस भीड़ भाड़ वाली जिंदगी में हर आदमी व्यस्त है...!किसी के पास वक्त नहीं है ,हर कोई भागा जा रहा है..!लोग क्यूँ भाग रहे है?कहाँ जा रहे है?किसी को कुछ नही पता..!सड़क पार करने के लिए इंतजार करना पड़ता है ..!सड़क पर गाड़ियों का बहाव देख कर ऐसा लगता है जैसे पूरा शहर आज खाली हो जाएगा...!अस्पताल में देखो तो ऐसे लगता है जैसे पूरा शहर ही बीमार हो गया है !चारों और दर्द से कराहते लोग,रोते,चीखते लोग....लगता है जैसे दुनिया में दर्द ही बचा है...!रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर बहुत ज्यादा भीड़ है ,दम घुटने लगता है..!कभी मन बहलाने पार्क में चला जाऊँ तो लगता है ..सारा शहर मेरे .पीछे वहीँ आ गया है....!मैं अक्सर भीड़ देख कर चिंता में पड़ जाता हूँ....जब संसार में इतनी भीड़ है तो भी फ़िर इंसान अकेला क्यूँ है?अकेलापन अन्दर ही अन्दर क्यूँ ..खाने को आता है?आज इस भरी भीड़ में भी हमें कोई अपना सा क्यूँ नहीं लगता.....~!अभी कुछ समय पहले की तो बात है जब शहर जाते थे तो पूरा गाँव स्टेशन पर छोड़ने आता था ..बहुत होंसला होता था...लगता ही नहीं था की हम अकेले है...!फ़िर गाड़ी में भी लोग अपनत्व की बातें करते थे !कब शहर आ जाता...

किन परिस्थितियों में हुआ ऑपरेशन ब्लूस्टार..

अतुल संगर बीबीसी संवाददाता पच्चीस साल पहले सिख धर्म के सबसे पावन धार्मिक स्थल अमृतसर स्थित हरिमंदिर साहिब परिसर पर भारतीय सेना की कार्रवाई - ऑपरेशन ब्लूस्टार - को अंजाम दिया गया था. जहाँ इस कार्रवाई ने पंजाब समस्या को पूरे विश्व में चर्चित कर दिया वहीं इससे सिख समुदाय की भावनाएँ आहत हुईं और अनेक पर्यवेक्षक मानते हैं कि इस कदम ने समस्या को और जटिल बना दिया. उधर भारत सरकार और ऑपरेशन ब्लूस्टार के सैन्य कमांडर मेजर जनरल केएस बराड़ का कहना था कि उनकी जानकारी के मुताबिक कुछ ही दिनों में ख़ालिस्तान की घोषणा होना जा रही थी और उसे रोकने के लिए ऑपरेशन को जल्द से जल्द अंजाम देना ज़रूरी था. लेकिन इस सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि क्या थी और किन परिस्थितियों में ये कार्रवाई हुई? एक नज़र डालते हैं उन घटनाओं पर जो इससे पहले घटीं: पंजाब समस्या की शुरुआत 1970 के दशक से अकाली राजनीति में खींचतान और अकालियों की पंजाब संबंधित माँगों को लेकर शुरु हुई थी. पहले वर्ष 1973 में और फिर 1978 में अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित किया. मूल प्रस्ताव में सुझाया गया था कि भारत की केंद्र सरका...

जूजू इन मेकिंग....

वोडाफोन के जूजू विज्ञापन आजकल बहुत देखे और पसंद किए जा रहे हैं। आइ पी एल के पहले सीज़न के दौरान वोडाफोन ने 'हैप्पी टू हेल्प' सीरीज़ को, जिसका क्यूट डॉग भी सभी को भाया था, को लॉन्च किया था। अब आई पी एल के दूसरे सीज़न में जूजू कैरेक्टर ने धूम मचा दी है। टीवी के साथ-साथ ज़ू-ज़ू साइबर वर्ल्ड में भी धूम मचा रहे हैं। ज़ू-ज़ू फेसबुक में काफी लोकप्रिय हो चुका है। इसके करीब 65,000 हजार फैन्स बन चुके हैं। ज़ू-ज़ू कोई कंप्यूटर का कमाल नहीं हैं। असल में ये हरकतें स्पेशल कॉस्ट्यूम पहने कलाकार करते हैं। ज़ू-ज़ू को बनाने में करीब तीन हफ्ते का समय लगा। करीब 30 से ज्यादा लोगों की टीम ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया। ज़ू-ज़ू के विज्ञापन की शूटिंग साउथ अफ्रीका में हुई है । ज़ू-ज़ू के विज्ञापनों की शूटिंग पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च हुए है। यहाँ हम आपको दिखा रहे हैं जूजू इन मेकिंग से कुछ ख़ास तस्वीरें.... आगे पढ़ें के आगे यहाँ

कुण्डली प्यार की : आचार्य संजीव 'सलिल'

भुला न पाता प्यार को, कभी कोई इंसान. पाकर-देकर प्यार सब जग बनता रस-खान जग बनता रस-खान, नेह-नर्मदा नाता. बन अपूर्ण से पूर्ण, नया संसार बसाता. नित्य 'सलिल' कविराय, प्यार का ही गुण गाता. खुद को जाये भूल, प्यार को भुला न पाता.