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गीत: मैं नहीं.... संजीव 'सलिल'

गीत: मैं नहीं.... संजीव 'सलिल' * मैं नहीं पीछे हटूँगा, ना चुनौती से डरूँगा. जानता हूँ, समय से पहले न मारे से मरूँगा..... * जूझना ही ज़िंदगी है, बूझना ही बंदगी है. समस्याएँ जटिल हैं, हल सूझना पाबंदगी है. तुम सहायक हो न हो खातिर तुम्हारी मैं लडूँगा. जानता हूँ, समय से पहले न मारे से मरूँगा..... * राह के रोड़े हटाना, मुझे लगता है सुहाना. कोशिशोंका धनी हूँ मैं,  शूल वरकर, फूल तुमपर वार निष्कंटक करूँगा. जानता हूँ, समय से पहले न मारे से मरूँगा..... * जो चला है, वह गिरा है, जो गिरा है, वह उठा है. जो उठा, आगे बढ़ा है- उसी ने कल को गढ़ा है. विगत से आगत तलक अनथक तुम्हारे सँग चलूँगा. जानता हूँ, समय से पहले न मारे से मरूँगा..... *