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लो क सं घ र्ष !: ताहि बधे कुछ पाप न होई

देश के वर्तमान स्थिति के क्रम में कुछ प्रश्न मन को मथने लगते हैं- जीव हत्या कथा पूर्ण रूपेण वजिर्त होना चाहिये या इसकी अच्छाई-बुराई परिस्तिथियों के अनुसार तय होगी ? जिहाद, धर्म युद्ध या होली-वार सही हैं या ग़लत ? अपराध पर पश्चाताप या प्रायश्चित किन हालात में स्वीकार करना चाहिये ? इन बातों पर धर्म गुरूओं, विद्धानों, विधि, वेताओं, समाज शास्त्रियों एँव राजनीतिज्ञों नें पक्ष-विपक्ष में बहुत बहसें की है। मानवधिकारवादियों नें कुछ अलग रूख़ अपनाया है। विस्तार से बात आज नहीं होगी, इस समय केवल संकेत। ऊपर तीन प्रश्न लिखे गये- पहले के संबंध में यह कहना चाहूँगा कि गाँधी और गोडसे के साथ अगर एक जैसा व्यवहार हो तो मानवता तड़प उठेगी। ईसा, सुफ़सत तथा इमाम हुसैन एँव उनके परिवार की ज़िन्दगी को ख़त्म कर देना अत्यतं निन्दनीय एँव घृरिणत कार्य था। परन्तु क़ातिलों को, वे जहाँ जहाँ भी हों क्या प्रत्येक दशा में क्षमा-दान देना उचित होगा। यदि व्यक्ति, समाज या मानवता को सुरक्षित रखना है तो ऐसे हत्यारों के लिये तुलसीदास का यह निणर्य ठीक है। ताहि बधे कुछ पाप न होई। जिहाद, धर्मयुद्ध या पवित्र यु...

भोजपुरी दोहे: संजीव 'सलिल'

भोजपुरी दोहे: संजीव 'सलिल' * नेह-छोह रखाब सदा, आपन मन के जोश. सत्ता दान बल पाइ त, 'सलिल; न छाँड़ब होश.. * कइसे बिसरब नियति के, मन में लगल कचोट. खरे-खरे पीछे रहल, आगे आइल खोट.. * जीए के सहरा गइल, आरच्छन के हाथ. अनदेखी काबलियत कs, लख- हरि पीटल माथ.. * आस बन गइल सांस के, हाथ न पड़ल नकेल. खाली बतिय जरत बा, बाकी बचल न तेल.. * दामन दोस्तन से बचा, दुसमन से मत भाग. नहीं पराया आपना, ला लगावत आग.. * प्रेम बाग़ लहलहा के, क्षेम सबहिं के माँग. सूरज सबहिं बर धूप दे, मुर्गा सब के बाँग.. * शीशा के जेकर मकां, ऊहै पाथर फेंक. अपने घर खुद बार के, हाथ काय बर सेंक?. *

लो क सं घ र्ष !: एक बार एक जज साहब बोले

न्यायिक कार्य से छुट्टी पाने के बाद कुछ देर के लिए जज साहब का हमारे साथ बैठना हुआ। बातचीत के दौरान जज साहब बोले, ‘‘ मेरा एक मुसलमान दोस्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कार्यकर्ता है।’’ मेरा संबंध उस लोकसभा क्षेत्र है जहां से किसी जमाने में सुभद्रा जोशी और अटल बिहारी बाजपेयी चुनाव लड़ा करते थे। सुभद्रा जोशी ने उस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से संबंधित बहुत सारे साहित्य अपने क्षेत्र में वितरित किये और तत्समय का यह किशोर रूचिपूर्वक उस साहित्य को पढ़ता रहा। किसान इंटर कालेज, महोली, जिला सीतापुर में मैंने इंटरमीडिएट में जुलाई 1963 में दाखिला लिया, वहां मेरा एक दोस्त एक दिन खेलकूद और व्यायाम के लिए मुझे अपने साथ ले गया तब मुझे पता लगा कि वह व्यायाम और खेलकूद के लिए संघ शाखा लगाती है। दूसरे दिन मेरे मना करने से पहले मेरे दोस्त ने मुझे खुद शाखा में जाने से यह कहकर मना कर दिया कि शाखा संचालक को मेरे वहां जाने पर आपत्ति थी। आगे शिक्षा ग्रहण के दौरान मैंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बारे में सुनकर और पढ़कर बहुत कुछ जाना समझा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ...

लो क सं घ र्ष !: ब्लॉग उत्सव 2010

सम्मानीय चिट्ठाकार बन्धुओं, सादर प्रणाम, आज दिनांक 12.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत तेरहवें दिन प्रकाशित पोस्ट का लिंक- ......... इमरोज़ का अर्थ जो हो , पर मेरी दृष्टि में इसका अर्थ है ' प्यार ' : रश्मि प्रभा http://www.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_11.html अंग्रेजी की तरह हिंदी ब्लोगिंग को भी अपनी पकड़ मजबूत बनानी होगी : अमरजीत कौर http://utsav.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_12.html लोग आरती उतारते हैं मैंने इक नज़्म उतारी है : अनिल ' मासूम http://www.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_7002.html पारुल पुखराज की तीन नज्में http://utsav.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_308.html ' भगवान् ने एक इमरोज़ बनाकर सांचा ही तोड़ दिया : सरस्वती प्रसाद http://www.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_12.html शिखा वार्ष्णेय का संस्मरण : वेनिस की एक शाम http://utsav.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_6286.html ...

चन्‍द्रे जलम् अस्ति इति वाराहमिहिरेण षष्‍ठसताब्‍द्याम् एव सम्‍पादितम् आसीत्।।

हिन्दी भाषायां पठितुं अत्र बलाघात: करणीय:।। किंचित कालपूर्वम् एव भारतस्‍य चन्‍द्रयानेन् प्रमाणितं यत् चन्‍द्रे जलम् अस्ति एव।  इत: पूर्वं नासावैज्ञानिका: एतस्‍य अन्‍वेषणं बहु वारं कृतवन्‍त: किन्‍तु चन्‍द्रे जलम् अस्ति इत्‍येतस्मिन् विषये ते किमपि वक्‍तुं न शक्‍तवन्‍त: । अस्‍य विषयस्‍य अन्‍वेषणं कर्तुं भारतदेश: चन्‍द्रयानम् इति कश्‍चन् गगननौका प्रेषितवान् तथा सप्रमाणेन् चन्‍द्रे जलम् अस्ति इति रहस्‍योद्घाटनं कृतवान् ।  य: विषय: अद्य नूतन वैज्ञानिकै: उद्धृत: प्रमाणित: च स: विषय: अस्‍माकं भारतस्‍य एव खगोलविद: सहस्राधिकेभ्‍य: वर्षेभ्‍य: (6तमे शताब्‍दे:) पूर्वम् एव स्‍वग्रन्थे लिखितवान् आसीत्। तदा गगनस्‍य अटनं कर्तुं गगननौका: न आसन्, नैव कश्चित् अन्‍यं साधनम् एव आसीत् अस्‍य विषयस्‍य ज्ञानं कर्तुम्। किन्‍तु तदा यत् वचनं प्रमाणितं तद् वचनम् अद्य आगत्‍य सर्वै: स्‍वीकृतम्। प्रशिद्ध: भारतीय: खगोलविद: वाराहमिहिर: चन्द्रे प्रकाशस्‍योत्‍पत्ति: कथम् इति कथयन् वदति-               ''सलिल...

लो क सं घ र्ष !: कौन है यह डेविड कोलमैन हेडली

डेविड कोलमैन हेडली का नाम मुम्बई की 26/11 की तबाही के बाद सामने आया। एक गुनहगार, इंसानियत का दुश्मन को फांसी की सजा अदालत से मिल चुकी है, दूसरे गुनहगार को अमेरिका बचाने में लगा हुआ है, यह गुनहगार और कोई नहीं यही है डेविड कोलमैन हेडली जो एफ0बी0आई0 के काम करता रहा। एफ0बी0आई0 ने ही उसे पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में दाखिल कराया और वह पाकिस्तान में एफ0बी0आई0 के एजेन्ट के रूप में तबाही मचाने और हमारे देश को आतंकित करने के उद्देश्य से काम करता रहा। उसने हमारे देश के भी दौरे किये। कहीं ऐसा तो नहीं यह डेविड कोलमैन हेडली पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के लिए लोगों को संगठित करता रहा हो और भारत में अभिनव भारत और सनातन संस्था जैसी संस्थाओं को भी संगठित करने में लगा रहा हो क्योंकि अमेरिका की नीयत दुनिया के किसी देश के लिए साफ नहीं है और खास करके भारत, पाकिस्तान और चीन के लिए। बहुत जरूरी हो गया है भारत को अपनी तफ्तीश आगे बढ़ाने के लिए डेविड कोलमैन हेडली से पूछताछ करना और उसी के साथ अभिनव भारत और सनातन संस्था की साध्वी प्रज्ञा सिंह, चन्द्रपाल सिं...

मिड डे गुजराती और इंकलाब को आगे ले जाने की तैयारी

हाल में मिड डे मल्टीमीडिया के प्रिंट बिजनेस को खरीदने के बाद जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने मिड डे गुजराती और उर्दू दैनिक इंकलाब को आगे ले जाने के लिए आक्रामक योजनाएं बनाई हैं।जागरण के चीफ फाइनेंशियल आफिसर आर के अग्रवाल ने कहा कि सबसे पहला काम इंकलाब को दैनिक जागरण की मौजूदगी वाले बाजार में उतारना है इसके बाद मिड डे गुजराती को मुंबई में काफी ऊपर ले जाना जिससे कंपनी को यहां से भारी आय हो सके। अग्रवाल को उम्मीद है कि इंकलाब हाल ही में मिड डे की खरीद पर खर्च हुई रकम अपने दम पर वसूलने में कामयाब हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह उर्दू दैनिक मुनाफे की स्थिति में है जो इसके सर्कुलेशन नहीं बल्कि विज्ञापनों से होने वाली आय पर निर्भर करता है। मिड डे अंग्रेजी के लिए ग्रुप ने प्रमुख रुप से इसके मुंबई और पुणो एडिशन पर फोकस करने का फैसला किया है। जागरण ने मिड डे के प्रबंधन स्तर पर कुछ सुधार किए जाने की तैयारी की है जबकि संपादकीय पदों पर किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।   आगे पढ़ें के आगे यहाँ