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एक हादसा...अंतिम सफर

कुलवंत हैप्पी जिन्दगी कब खत्म हो जाए, किसकी पता नहीं चलता। हम खुद नहीं जानते के अगले पल क्या होने वाला है. एक यात्रा पर निकले मुसाफिर को पता नहीं होता कि वो घर लौटेगा कि नहीं, कहीं यह यात्रा उसकी अंतिम यात्रा तो नहीं. बस मौत के खौफ मन को मन से निकालकर अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते हैं. ये सही भी है और होना भी चाहिए क्योंकि अगर हम मौत के भय से रुक जाएंगे, मंजिल को पाना तो क्या एक कदम भी नहीं उठा सकेंगे. जैसे सांसों की रेलगाड़ी कब कहां रुक जाए किसकी को नहीं पता होता, वैसे ही इस अज्ञात महिला को भी नहीं था कि जिन्दगी की रेल रुकने वाली है. उसकी गोद में खेलने वाली बच्ची के सिर से मां का साया उठने वाला है, उसको इस जहान से विदा लेकर अकेली को जाना है, कहते हैं ना, अंत समय कोई साथ नहीं जाता, कुछ इस तरह ही हुआ इस अज्ञात महिला के साथ. अपनी एक साल की मासूम कली को लेकर रेल में सफर कर रही थी वो, बच्ची ने रोना शुरू किया तो उसने बच्ची को गोद में लिया और दरवाजे की तरफ चली आई. उसने बच्ची को चुप करवाने के लिए एक मां की हैसियत से सब कुछ किया. मगर उस महिला को भी नहीं पता था कि यह बच्ची क्यों रो रही है, शायद उस मा...

ज़ंग नासूर है, पर गले लगा सकते है हम !!

हमने हर सम्भव कोशिश की,ज़ंग न हो ! पर पाक ने हर कदम पर ज़ंग को ही जायज बताया! ये ज़ंग नासूर है हिन्दुस्तान और पकिस्तान के लिए पर जब बात यहाँ तक आ गई है तो तुम शान्ति और अमन के लिए इस नासूर से लड़ने के लिए भी तैयार है! तो आओ हिंदुस्तानिओं आज फिर एक हो जाओ, यही मान लो की ये हमारा दूसरा स्वतंत्रता संग्राम है !! हम जंग कर रहे है एक नई स्वतंत्रता के लिए जिसके बाद शयद हुम्हे हर पल नही मरना पड़ेगा !! हम बेकौफ जी सकेंगे !! चाहे इसकी कीमत अब जो भी हो ,इसे हुम्हे चुकाना है! पाक साबधान रहे हम हिन्दुस्तानी आ रहे है !! जय हिन्दुस्तान ...जय हिन्दुस्तानी

गान्धीजी का मोर्डन आर्ट खादी ओर तीन बन्दर

गान्धीजी का मोर्डन आर्ट खादी ओर तीन बन्दर गा धीजी ने १९४५ मे ख्याल आया कि मेरे मरने के बाद मेरे पुतले बनेगे। और मेरे नाम पर सडको के नाम तो जरुर होगे। उन्होने सोचा कि यह भी वेल डिजाइन्ड होना चाहिये तो उन्होने पुतला बनाने कि पैक्ट्रिस शुरु कि और अपनी हेड राइटिग कि तरह ही मुर्तियॉ और पुतले बनाये। बनाने चले थे कुछ ओर ही लेकिन बन गऐ बन्दर। वह भी एक नही, दो नही, पुरे के पुरे तीन बन्दर । एक बहरा, दुसरा गुगा, तीसरा अन्धा। मन्त्रियो कि गीता उन्होने यही पर पैदा कर दी।जिस तरह मोर्डन आर्ट मे देखकर विचार करते व फैसला करते ठीक उसी तरह यह गॉन्धीजी कि 'मोर्डन-आर्ट थी। इसका मतलब मन्त्रियो को अपनी अक्ल के हिसाब से इसके भावो को लेना था। इसीलिये उन्होने मन ही मन फैसला किया "कुछ ना सुनो", कुछ ना देखो", कुछ ना बोलो", खा दी गाधीजी ने बेचने के लिये बनाई यानि ग्रामिण उधोग के हिसाब से बनाई थी न कि पहनने के लिये । मन्त्रिगण इस मे मार खा गये। अच्छे से अच्छा वस्त्र के होते हुऐ भी खुद खादी या खादी जैसे दिखने वाले वस्त्र पहनकर घुम रहे है। यह तो ऐसी मिशाल हुयी जैसे किसी के...

पाक की नापाक नौटंकी

पकिस्तान ज़ंग को लेकर जायदा ही कुछ उत्साहित सा नजर आ रहा है जबकि पीछे की सच्चाई से हम सभी बाकिफ है कही ऐसा न हो की पाक...महज एक नौटंकी कर रहा हो जिससे की भारत पर एक हल्का सा दबाब बन सके ! पर पकिस्तान का यह कदम उसके लिए ही खतरनाक साबित होने वाला है क्यों की भारत हर प्रकार से उससे शक्तिशाली है !! पकिस्तान का ये लहजा ऐसा लग रहा है जैसा की एक दीप बुझने से पहेले भभकता है वैसे ही हाल पकिस्तान का हो रहा है !!जब की असलियत पर नजर डाले तो ये है !!! अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की आशंका जताई है। सीआईए के अनुसार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में चल रही उठापटक जम्मू-कश्मीर में भी फैल सकती है। इससे भारत को मजबूरन हमला करना पड़ सकता है। ‘ग्लोबल ट्रेंड्स 2015’ नाम से बुश प्रशासन को आगाह करती अपनी रिपोर्ट में सीआईए ने कहा है कि परंपरागत सैन्य क्षमता के हिसाब से भारत अपने पड़ोसी देश के मुकाबले बढ़त पर है। इसके अलावा भारत आर्थिक रूप से भी पाक से कहीं अधिक सक्षम है। हथियारों की होड़ : भारत जल्दी ही अपने परमाणु जखीरे में बढ़ोतरी कर सकता है। पाकिस्तान भी इसी की देखादेखी...

मंटो की कहानी - टोबा टेक सिंह

बंटवारे के दो तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख्याल आया कि इखलाकी क़ैदियों की तरह पागलों का तबादला भी होना चाहिए यानी जो मुसल्‌मान पागल, हिंदुस्तान के पागल-ख़ानों में हैं उन्हें पकिस्तान पहुंचा दिया जाए और जो हिंदू और सिख पाकिस्तान के पागल-ख़ानों में हैं उन्हे हिंदुस्तान के हवाले कर दिया जाए।मालूम नहीं यह बात माक़ूल थी या ग़ैर-माक़ूल , बहर-हाल दानिश-मन्‌दों के फ़ैस्‌ले के मुताबिक़ इधर उधर ऊंची सतह की कान्फ्रेंसे हुईं , और बाल-आख़िर एक दिन पागलों के तबादले के लिए मुक़र्‌रर हो गया। अच्छी तर्‌ह छान-बीन की गई। वह मुसल्‌मान पागल जिन के लवाहिक़ीन हिंदुस्तान में ही में थे, वहीं रह्‌ने दिए गए थे, जो बाक़ी थे उन को सर्‌हद पर रवाना कर दिया गया।_ यहां पाकिस्‌तान में चूंकि क़रीब क़रीब तमाम हिंदू सिख जा चुके थे, इस लिए किसी को रखने रखाने का सवाल ही न पैदा हुआ। जितने हिंदू सिख पागल थे, सब के सब पुलिस की हिफ़ाज़त में बॉर्डर पर पहुंचा दिए गए।उधर का मालूम नहीं, लेकिन इधर लाहोर के पागल-ख़ाने में जब उस तबादले की ख़बर पहुंची तो बड़ी दिल्‌चस्‌प चिह-मी-गूइयां होन लगीं। एक मुसल्‌मान पागल जो बारह बरस से हर रो...

हद से भी जायदा प्यार है तुमसे

सच ये दुनिया तुम्हारे बिना कितनी अधूरी है मेरा तुम्हारे बिना रह पाना मुश्किल है! अगर तुम नहीं तो मैं भी नहीं! मैं तुम्हारे लिए आसमान से तारे तोड़कर ला सकता हूँ !तुम्हारी एक खुशी के लिए मैं अपनी जान भी दे सकता हूँ !! शायद यही कह रही है ये तस्वीरें मगर किससे ये आपको तय करना है !मुझे तो लगता है की आज प्यार का मतलब काफी बदल चुका है, जायदा से जायदा लोगों को खुश रखना ही आज प्यार है यहाँ तो यही समझ आता है आपको क्या लगता है !! जरा हमे बताइए!!

पहचान : एक शाम की

"क्लासिकल म्यूज़िक का प्रोग्राम है, सुनने चलोगी?" पड़ोस की प्रौढ़ा जया मुखर्जी ने पूछा।"म्यूज़िक प्रोग्राम" सुनकर उसकी आँखें कुछ चमकी थीं, अरसा हो गया किसी संगीत कार्यक्रम या नाटक या किसी भी तरह के ऐसे महौल तक में गए हुए उसे।"कितने बजे हैं?" उसने उत्सुकता से पूछा।"पौने सात से शुरू होगा पर घर से साढ़े पाँच तक तो निकलना ही पड़ेगा। " मैनेज कर लो तो चलना, मैं जा रही हूँ" जया ने पूरी सूचना दे दी थी। जाने - आने का साथ भी है, जगह ढूँढने की दिक्कत से भी बचा जा सकता है। मन में लालच आ गया विनीता के।"देखती हूँ, कोशिश करती हूँ। सब काम हो गए तो फोन करूँगी आने का, हाँ लौटने में क्या बज जाएगा?" सब खबर रखना ज़रूरी था।"साढ़े नौ से दस के बीच का समय हो सकता है। चल सको तो अच्छा है पर न हो पाए तो कोई मलाल की बात नहीं, मेरे बच्चे छोटे थे तो मैं भी कहाँ जा पाती थी, यह ख्याल रहता था कि ये अकेले न रहें या मेरा उनके पास रहना ही मेरा सबसे बड़ा काम है।"जया शायद विनीता की मन:स्थिति समझ रहीं थीं। भीतर की माँ और निजी अस्तित्व में द्वंद्व शुरू हो गया था। ...