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संजय सेन सागर जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई

संजय सेन सागर जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई.आप प्रगति के मार्ग पर लगातार अग्रसर हो इन्ही शुभकामनाओं के साथ.... समस्त हिंदी प्रेमी

अपना - अपना नजरिया

सबकी मंजिल एक ... नजरिया जुदा - जुदा  कोई हंस के तो कोई रोके  जीवन है जीता  कोई देके तो कोई लेके  जीवन फिर भी है चलता  कोई प्यार से , कोई मार से अपना  सिक्का है जमाता  समय अपने नज़रिए से  निरंतर है आगे बढती   न कभी रुकी है न रुकेगी  जीवन हर मोड़ पर  एक अनसुलझी पहेली  जिसे सुलझाते हुए  आगे बड़ते जाना है | न ये तेरी , न ही मेरी  विरासत में कुछ पल के लिए  हमको - तुमको है  मिली  आओ कुछ एसा कर दे कि इसका एहसान उतर जाए कौन  आएगा पलटकर  फिर अपने आस्तिव की  तलाश में ... आज का गुजरा पल  कल ... हमको देने वाला नहीं सोने - चाँदी की ठेरी हम कब तक साथ  रखतें हैं ... आपस के एहसास ही तो  हमारे  हरपल साथ रहतें  हैं | फिर निर्णय लेने में  इतनी देरी क्यु कर हो  बदल लो आजसे ही जीवन  की सफल जीवन हमारा हो |

‘बोल्डनेस’ शादी से पहले क्यों नहीं दिखाई थी?

‘अजब प्रेम की गजब की कहानी’ कह लीजिए या कुछ और। मामला एकता कपूर के सीरियल की कहानी से भी आगे का है। एकता कपूर ने भी वह सब दिखाने की हिम्मत नहीं दिखाई, जो आरती ने असल जिंदगी में कर दिखाया। रुद्रपुर की आरती का विवाह मेरठ के नीतिश के साथ हुआ था। पहले दिन ही आरती ने नीतिश से कह दिया कि वह विनीत से शादी कर चुकी है। नितीश ने भी शायद भावनाओं में बहकर उसे ‘बहन’ बना डाला। रिश्तों का इस तरह से शायद ही कभी मजाक बना हो। पहले दिन ही आरती का नितीश को असलियत बता देना उसका ‘बोल्ड’ कदम कहा जा सकता है, लेकिन सवाल यह है कि उसने यह ‘बोल्डनेस’ शादी से पहले क्यों नहीं दिखाई थी? आरती जो कुछ कर चुकी थी, उसमें वह सब अपने पिता को बताने की हिम्मत नहीं थी। सवाल यह है कि शादी के फौरन बाद उसमें अपने पति को असलियत बताने की हिम्मत कैसे आ गई? यदि वह शादी से पहले ऐसा कर पाती तो नितीश की जिंदगी दोराहे पर खड़ी नहीं होती। न ही उसके परिवार की इज्जत तार-तार होती। जैसे इतना ही काफी नहीं था। अब वही आरती अपने पिता के पास पहुंचते ही नितीश और उसके परिवार को अदालत में खींचने की साजिश कर रही है और ‘पत्...

ब्रिज के ऊपर सौदा और नीचे अंधेरे में कामलीला

  सूरतः यहां के सरदार ब्रिज जैसे महत्वपूर्ण जगह पर बिंदास सेक्सरैकेट का धंधा फल-फूल रहा है। डीबी गोल्ड ने एक स्टिंग ऑपरेशन करके यह खुलासा किया कि किस तरह ब्रिज पर खड़ी कॉलगर्ल और दलाल नियम-कानून को धता बताकर ग्राहकों से सौदे को अमली-जामा पहनाते हैं। ग्राहक बिना किसी डर के ब्रिज पर न सिर्फ भाव-ताव करता है, उसके बाद ब्रिज के नीचे अंधेरे में कामलीला...। सबसे बड़ी बात इस ब्रिज से आने-जाने वाली सभ्य घरों की महिलाओं को भी कई बार ग्राहकों के गंदे जुबान से होकर गुजरना पड़ता है, इसके लिए स्थानीय लोगों ने कई बार पुलिस में शिकायत भी की लेकिन सेक्स रैकेट के खिलाफ कोई कुछ न कर सका। इस पूरे प्रकरण में उमरा पुलिस सिर्फ तमाशबीन का रोल अदा कर रही है। कहां चलता है रैकेट? कई सालों से शहर के मजुरागेट के पास सरेआम वेश्यालय चल रहा है। लेकिन अब दो महीने से ग्राहक सरदार ब्रिज पर कॉलगर्ल की तलाश में इधर-उधर भटकते हुए दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि मजुरागेट के साथ ब्रिज पर भी कॉलगर्ल का सौदा होता है। कौन है सूत्रधार मजुरागेट और सरदार ब्रिज के नीचे दो पुरुष और लगभग चार महिला दलाल यह सेक्स रैकेट चलाती हैं। ...

संत निगमानंद के बलिदान को न्याय का इंतजार

Source:  मातृसदन संत निगमानंद सन् 1998 से ही गंगा में अवैध खनन व क्रशिंग गतिविधियों के विरुद्ध मातृसदन का संघर्ष जारी रहा है, जिसके परिणामस्वरूप हरिद्वार कुंभ क्षेत्र से अधिकांश स्टोन क्रेशर व खनन गतिविधियाँ प्रतिबंधित हुईं। सरकार, प्रशासन व खनन तंत्र को मातृसदन के सत्याग्रह के समक्ष निरुत्तर होना पड़ा, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय व स्थानीय शोध आख्या ने भी खनन को अनुचित व विनाशकारी करार देते हुए इसे बंद करने की सिफारिशें की थीं। हर तरफ से गिरते इस अवैध विनाशकारी व्यापार के पोषण हेतु तब खनन तंत्र ने न्यायपालिका को हथियार बनाना चाहा और सरकार व प्रशासन का न्यायालय में मौन साधना पुनः एक बार खनन तंत्र के लिए जीवनदायी साबित हुआ एवं 10 दिसंबर 2010 के खनन व क्रशिंग को प्रतिबंधित करने के सरकारी शासनादेश पर पुनः उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी। इस प्रकार लोकतंत्र के प्रत्येक स्तंभ को घोर तमस से आच्छादित करते जा रहे और अब न्यायपालिका तक पहुँच चुके इस भ्रष्ट अर्थतंत्र को विच्छिन्न करने व सत्य को उजागर करने हेतु प्रारंभ हुआ स्वामी निगमानंद जी का यह अंतिम निर्णायक सत्याग्रह, ज्ञात हो कि 28 जनवरी...

क्या उचित है नो प्रेगनेंसी कॉन्ट्रैक्ट ?

ऐश्वर्या राय बच्चन के गर्भवती होने की ख़बर ने बॉलीवुड में एक बहस को जन्म दिया है. ऐश्वर्या राय बच्चन के गर्भवती होने की ख़बर से उनके और बच्चन परिवार के फ़ैन्स को बहुत ख़ुश हैं. लेकिन इस वजह से प्रोड्क्शन कंपनी यूटीवी ने फ़िल्म ‘हीरोइन’ पर फ़िलहाल काम रोकने की घोषणा की. मधुर भंडारकर के निर्देशन में बन रही इस फ़िल्म में ऐश्वर्या राय बच्चन मुख्य भूमिका निभा रही थीं. पिछले दिनों फ़िल्ममेकर  रामगोपाल वर्मा  ने इस बारे में सीधे-सीधे कुछ न कहते हुए हॉलीवुड में ‘नो-प्रेगनेंसी कॉन्ट्रैक्ट’ का ज़िक्र किया जिससे एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या बॉलीवुड में भी ऐसी शर्त होनी चाहिए. यानि क्या अनुबंध में ऐसी शर्त होनी चाहिए कि हीरोइन फ़िल्म बनने के दौरान मां नहीं बन सकतीं? गुरुवार को अपनी नई फ़िल्म ‘नॉट ए लव स्टोरी’ के फ़र्स्ट लुक के लॉन्च के अवसर पर रामगोपाल वर्मा ने इस बारे में पत्रकारों को सफ़ाई दी. उन्होंने कहा, “मैंने ट्विटर पर सिर्फ़ इतना ही कहा था कि मुझे नहीं पसंद कि ख़ूबसूरत महिलाएं मां बने क्योंकि ख़ूबसूरत महिलाओं को सिर्फ़ ख़ूबसूरत ही रहना चाहिए. मैं दूसरी फ़िल्मों के बारे में टिप्प...

भारत से कितनी दूर हैं उसकी फिल्में

दुनिया के तमाम देशों की फिल्मों में वहां के राष्ट्रीय चरित्र की झलक देखने को मिलती है। फिल्मों के माध्यम से भी किसी देश का परिचय पाने की कोशिश की जा सकती है। रॉबर्ट स्कलर की किताब ‘मूवीज मेड ए नेशन’ में हॉलीवुड के विकास के साथ अमेरिका को जोड़ा गया है। आज ईरान की फिल्मों से ईरानी समाज का अच्छा-खासा परिचय हमें मिलता है। तमाम फिल्म बनाने वाले देशों ने अपने इतिहास और साहित्य से कथाएं ली हैं। अमेरिका ने अपने यहां प्रकाशित कॉमिक्स पर भी फिल्में गढ़ी हैं। अकिरा कुरोसावा की फिल्में जापान की इतिहास कक्षाओं में पढ़ाई जा सकती हैं। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद फ्रांस ने थ्रिलर फॉर्मेट में देशभक्ति की बात प्रस्तुत की। रूसी साहित्य की ‘वार एंड पीस’, ‘डॉ जिवागो’ और ‘क्राइम एंड पनिशमेंट’ पर हॉलीवुड ने फिल्में रची हैं और इन्हीं उपन्यासों पर बनी रूसी फिल्मों से वे बेहतर भी सिद्ध हुई हैं। इन तमाम देशों में सेंसर के लचीलेपन के कारण भी बहुत सी साहसी फिल्में बनी हैं। मसलन ऑलिवर स्टोन की फिल्मों में वियतनाम में की गई गलती का विवरण है। स्टोन ने वियतनाम में बतौर शिक्षक और बतौर योद्धा भी वक्त बिताया है। उनकी...