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बिग बी को पसंद नहीं तेंदुलकर की ब्रेडमैन से तुलना

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की तुलना ऑस्ट्रेलियाई महान बल्लेबाज डॉन ब्रेडमैन से करना उचित नहीं लग रहा। उन्होंने कहा है कि जब तक हम अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना नहीं सीखेंगे, तब तक दूसरे हमारा सम्मान नहीं करेंगे।   बिग बी ने अपने ब्लॉग में दोनों खिलाड़ियों की तुलना करने वालों पर जमकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने लिखा, ‘अक्सर यह बहस होती है कि सचिन महान हैं या डॉन ब्रेडमैन? यह तय है कि सचिन महानतम हैं। यह बहस करके कि सचिन वास्तव में महान हैं या नहीं? आप उनकी उपलब्धि को कम कर रहे हैं। मुझे इस पर एतराज है।’   उन्होंने लिखा है, ‘कौन महान है या और कौन नहीं, इसकी सहमति बनाने वाला मीडिया कौन होता है? हम जानते हैं कि सचिन महान हैं और यहीं पर मामला खत्म होता है। मेरी सबसे गुजारिश है कि सचिन की तुलना दूसरों से करके उनके कद को कम न करें। दूसरों को उनसे तुलना करने दें।’   अमिताभ ने कहा, ‘हम क्यों हमेशा अपनी उपलब्धियों की तुलना पश्चिमी देशों से करते हैं। मैं मानता हूं कि वे हमसे ज्यादा विकसित हैं, भौतिक रूप से समृद्ध हैं, तकनीकी तौर पर ज...
गुर्जर फिर ट्रेक पर सरकार बेट्रेक हुई राजस्थान में आरक्षण की मनाग को गुर्जर फिर से रेलवे ट्रेक पर आ गये हें राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकार द्वारा जारी गुर्जरों के आरक्षण के अध्यादेश को ख़ारिज करते हुए एक वर्ष में गुर्जरों की स्थिति की समीक्षा रिपोर्ट सरकार को तय्यार करने के लियें कहा हे , गुर्जर नेताओं का कहना हे के सरकार ने उन्हें छला हे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डेढ़ माह से उन्हें मिलने तक का वक्त नहीं दिया हे , बात सही हे हमारे राजस्थान के मुख्यमंत्री हें कोई एरे गेरे थोड़ी हे जो किसी भी पीड़ित या शिकायत करता से इतनी जल्दी मिल लेंगे उन्हें दिल्ली और चापलूसों से फुर्सत मिलेगी तब ही तो वोह समस्याओं के मामले में लोगों से बातचीत के लियें मिलेंगे गुर्जर ही नहीं कोटा के वकीलों के साथ भी उनका यही वायदा खिलाफी का व्यवहार रहा हे कई मामलों में कलेक्टर और पुलिस मुख्यमत्री जी और इनकी सरकार के मंत्रियों को सावचेत करती हे के इस मामले को बातचीत से हल कर लो लेकिन सरकार की लेटलतीफी और सरकार की हठधर्मिता के कारण नतीजा हडताल और अराजकता होती हे फिर जनता को परेशानी के बाद बात चीत होती ह...

भ्रष्टाचार

ताक़त की ख्वाइश ,                 लुट का लालच ,                              कमजोरो पर ज़ुल्म                                                कुच्छ का कहना है की ये सब ज़ज्बात हैं !                                                 हम खुद को कितना बेहतर  ढंग से समझते हैं इस बात का प्रभाव सामाजिक वास्तविकता की हमारी संचालन क्षमता पर गहराई पूर्वक पड़ता है ! कुच्छ क्षेत्रो मै  हम खुद को बेहतर तरीके से जानते हैं , लेकिन कुच्छ मामलो मै अपने अच्छे रूप मै दीखने की जरुरत या अच्छे पूर्वाग्रह के चलते हम अपने आप से अजनबी बने रहते हैं ! समय बीतता जाता है और हम खुद से ही रूबरू नहीं हो पाते हैं         ...
दोस्तों यह ब्लोगर की दुनिया भी अजीब हे दोस्तों वर्ष २०१० जाने के इन्तिज़ार में हे कुछ दिन शेष बचे हें अपनी म़ोत जिंदिगी का अपन को कोई पता नहीं लेकिन कुछ दिनों बाद वर्ष २०११ नई उमंग नई सुबह लेकर जरुर आयेगा में इस ब्लोगर की दुनिया में मार्च २०१० में पैदा हुआ था और ब्लोगर भाईयों के साथ लगातार हंसी ठिठोली करने का प्रयास कर रहा हूँ कई ब्लोगर हें जो बहुत बहुत महान हें भाई ललित जी ,भाई द्विवेदी जी बहन संगीता,बहन वन्दना जी, उदय भाई सही सेकड़ों ऐसे ब्लोगर हें जिनका प्यार मुझे अक्सर मिलता रहा मेने ब्लोगर की दुनिया में मासूम भाई और फिरदोस बहन सहित कई लोगों की तकरारें भी देखी हें , ब्लोगर्स की गंदी भाषाएँ नंगा पन भी सहा हे लेकिन एक बात तो साफ हे के वर्ष दो हजार दस ब्लोगिस्तान का वर्ष रहा इस साल इंटरनेट के इस युग में ब्लोगर्स की दुनिया चोथी दुनिया के रूप में उभरी हे यहाँ चोटों को बढों का प्यार बढों को छोटों का मान सम्मान भी मिला हे , बस एक कमी अखरती हे के ब्लोगर्स एक दुसरे की प्रशंसा करने और एक दुसरे को संदेश के जरिये सीख देने में कंजूसी बरतते हें कुछ ब्लोगर्स हें जो खुद को...
लीगल प्रेक्टिशनर बिल सरकार की जालसाजी देश के वकीलों के साथ सरकार ने धोखे से लीगल प्रेक्टिशनर बिल पारित करवा कर धोखा किया हे देश के साथ की गयी इस जालसाजी को देश भर के वकील मानने को तय्यार नहीं हे इस बिल को तय्यार करने ,कानून बनाने में सरकार के करोड़ों रूपये खर्च हुए हें लेकिन देश की विद्म्म्बना हे के इस गेर जरूरी बिल को सरकार ने अहमियत दी हे । वकील खुद स्वतंत्र अस्त्तिव रखते हें लेकिन उनको अनुशासित करने के लियें सरकार ने संसद में एडवोकेट एक्ट का कानून पारित किया हे फिर इस कानून की पालना और वकीलों को नियंत्रित रखें के लियें एक स्वतंत्र संस्था बार कोंसिल ऑफ़ इण्डिया का गठन किया गया हे और इस संस्था का विकेंद्रिकर्ण कर राज्य स्तर पर इस व्यवस्था को लागु किया गया हे जहां एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया लागू हे देश भर के वकील चुनाव के माध्यम से अध्यक्ष और दुसरे सदस्यों को चुनते हें जो एक निर्धारित कानून और नियमों के तहत वकीलों की नीतिया और नियम निर्धारित करते हें चिकित्सकों की भी ऐसी ही स्वतंत्र मेडिकल कोंसिल संस्था हे हाल ही में मेडिकल कोंसिल के अध्यक्ष को करोड़ों रूपये के साथ ...

शतको का शहंशाह

लिखना तो आज हम कुछ और चाह रहे थे पर हर तरफ सचिन सचिन के शोरे ने जैसे कुछ और लिखने ही नहीं दिया तो हमने भी अपना रुख सचिन की तरफ ही मोड़ लिया सोचा क्यों ना हम भी अपने देश के महानतम बल्लेबाज़ सचिन के लिए दो शब्द कह ही दे ! जिस तरह से वो अपने आप को इतिहास के पन्नो मै दर्ज करवाते जा रहे हैं  सच मै काबिले तारीफ है ! हम तो ये कहेंगे की अगर किसी  भी तरह का ठंग व् तकनिकी का संगम कही देखना हो तो वो सचिन की बल्लेबाज़ी मै मिलती है !                                                                 आज से 21 साल पहले सचिन ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 88 रन बनाये थे जब वो लोट कर पवेलियन आ रहे थे तो उनकी आँखों मै आंसू थे !अपने करियर का पहले  शतक से चुक जाने का दर्द उनकी आँखों से साफ़ झलक रहा था ! उसी सचिन ने उस दर्द को अपने ज़ेहन मै एसे संजोया  की उसे ही अपनी हिम्मत बनाकर आगे का सफ़र जारी रखते हुए  टेस्ट क्रिकेट मै अपनी 5...
तेरे सुर से हम सुर मिलायेंगे जी हाँ दोस्तों तेरे सुर से हम सुर मिलायेंगे जो हो पसंद तुझ को वही बात हम कहेंगे इसी तर्ज़ पर कल कोंग्रेस का महा अधिवेशन समोण हुआ अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य सोनिया गाँधी का अध्यक्ष कार्यकाल तीन वर्ष से बढा कर पांच वर्ष करना था लेकिन इस अधिवेशन में ख़ास कर राहुल के लियें विक्लिक्स वेबसाईट के बयान के बाद उपजे विवाद को मुख्य आधार नया गया । कोंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बयान का भावार्थ बदल कर पुर जोर शब्दों में कहा के देश में अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक दोनों तरह के ही आतंकवाद घातक हें , सोनिया ने भ्रस्ताचार के मुद्दों को भी गोण कर दिया और मनमोहन सिंह के गुणगान शुरू कर दिए , खुद राहुल गांधी ने भी अधिवेशन में अपनी ही बात को दुसरे तरीके से दोहराया लेकिन कोंग्रेस की मां हो चाहे कोंग्रेस का बेटा हो दोनों की एक बात हु बहू मिलती जुलती रही जिसमें खास बात यह थी की सोनिया और राहुल गाँधी का भाषण खुद का मोलिक नहीं था दोनों ने किसी और से लिखवा कर अपना भाषण पढ़ा हे अब दिग्विजय सिंह ने तो संघ की तुलना हिटलर से कर डाली और कथित राष्ट्र्तवाद का मजाक भी उढ़ा...