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आँखों से तेरी सूरत जाती नहीं है॥

प्रतिमा तुम्हारे प्यार की भूलती नहीं है॥ आँखों से तेरी सूरत जाती नहीं है॥ हमने भी आँखों को मिलाना भी ,,बंद किया है॥ सुबह शाम छत पे आना भी बंद किया है, तेरी हंसी की बोल मुरझाती नहीं॥ आँखों से तेरी सूरत जाती नहीं है॥ कई दिनों तक खाना पानी हरम था॥ हमें पता है हमें लवेरिया बुखार था॥ बिना देखे तोहे अंखिया मुस्काती नहीं॥ आँखों से तेरी सूरत जाती नहीं है॥ मेरी ख़ुशी है रूठी मै खोजती तुम्हे हूँ॥ आ जाओ मेरे करीब मै तो यहाँ हूँ॥ तेरे सिवा किसी को बसाया नहीं है... आँखों से तेरी सूरत जाती नहीं है॥

मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥

मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥ उनकी लड़की बड़ी होशियार है ,, ये भी बताया है... कहने लगे की बेटा ,,अभी कच्ची कली है॥ अप्सराओ से भी सुन्दर हमारी लली है॥ उसके अनेको काम को मुझको दिखाया है॥ मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥ बात सुनती नहीं किसी की न सम्मान करती है॥ बेतुकी बात करती हरदम अकड़ती है॥ उसके दिलेरी बात को फिर से सुनाया है॥ मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥ पढ़ाई में मन नहीं लगाई तभी तो दसवी पास है... बहुत धन दू गा मै तुमको जो हमारे साथ है॥ अपने सपनों को अपने हाथो से सजाया है॥ मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥ मेरे घर वाले सब खुश थे॥ हमें आभास हो रहा था॥ इस चक्कर में मत फसो मेरे कान में कह रहा था॥ लालच में मै भी आके अपने भविष्य को डुबाया॥ मै भी बिका दहेज़ में॥ ससुर बुलाया है॥

स्वाधीनता दिवस पर विशेष रचना: गीत भारत माँ को नमन करें.... संजीव 'सलिल'

स्वाधीनता दिवस पर विशेष रचना: गीत भारत माँ को नमन करें.... संजीव 'सलिल' * * आओ, हम सब एक साथ मिल भारत माँ को नमन करें. ध्वजा तिरंगी मिल फहराएँ इस धरती को चमन करें..... * नेह नर्मदा अवगाहन कर राष्ट्र-देव का आवाहन कर बलिदानी फागुन पावन कर अरमानी सावन भावन कर  राग-द्वेष को दूर हटायें एक-नेक बन, अमन करें. आओ, हम सब एक साथ मिल भारत माँ को नमन करें...... * अंतर में अब रहे न अंतर एक्य कथा लिख दे मन्वन्तर श्रम-ताबीज़, लगन का मन्तर भेद मिटाने मारें मंतर सद्भावों की करें साधना सारे जग को स्वजन करें. आओ, हम सब एक साथ मिल भारत माँ को नमन करें...... * काम करें निष्काम भाव से श्रृद्धा-निष्ठा, प्रेम-चाव से रुके न पग अवसर अभाव से बैर-द्वेष तज दें स्वभाव से 'जन-गण-मन' गा नभ गुंजा दें निर्मल पर्यावरण करें. आओ, हम सब एक साथ मिल भारत माँ को नमन करें...... * जल-रक्षण कर पुण्य कमायें पौध लगायें, वृक्ष बचायें नदियाँ-झरने गान सुनायें पंछी कलरव कर इठलायें भवन-सेतु-पथ सुदृढ़ बनाकर सबसे आगे वतन करें. आओ, हम सब एक साथ मिल भारत माँ को ...

मिट्टी का रंग ही है भारत का रंग

प्रसून जोशी, प्रसिद्ध गीतकार हर शख्स की जिंदगी का विस्तार ही उसका देश है। कोई एक विचार नहीं है। हर व्यक्ति देश को अपने तरीके से परिभाषित करता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जो देश था, उसमें विभाजन बिलकुल साफ था। लेकिन आज आजादी के ६३ सालों के बाद भी बहुत से लोगों के लिए देश की परिभाषा बहुत नहीं बदली है।   हजारों सालों में हमने जो सभ्यता ईजाद की है, बेशक उसमें बहुत सारे रंग हैं, इतनी विविधता है कि किसी एक रंग से आज के हिंदुस्तान के नक्शे को भरा नहीं जा सकता। इस विविधता को देखने की भी कई नजर हो सकती है। एक नजर इतने रंगों में इंद्रधनुष का सौंदर्य देख सकती है, लेकिन एक नजर यह भी हो सकती है, जो देख पाए कि ये सारे रंग आपस में उस तरह घुले-मिले नहीं हैं, जैसा किताबों में लिखा जाता है। आज के भारत में जो साथ होकर भी साथ नहीं हैं, वे सब अपने ही हैं और अपनों के बीच विभाजन की लंबी खाई है। ग्लोबलाइजेशन और पूंजीवाद का समर्थन करने वालों का तर्क है कि पूंजीवाद एक तालाब की तरह है, जिसमें फेंके गए हर पत्थर का प्रभाव तालाब के आखिरी सिरे तक होता है। बेशक जहां पत्थर फेंका गया है, वहां लहरें ज्य...

पहले आवाज फिर पत्थर

क. यतीश राजावत सरकार केवल जबानी जमा-खर्च करती है। वह कहती भर है कि हमें समाज के हर तबके को साथ लेकर चलना है, लेकिन लगता नहीं कि देश के आम लोगों के लिए काम करने में उसकी कोई दिलचस्पी है। छोटे-बड़े हर मोर्चे पर केंद्र सरकार देशवासियों से दूर होती जा रही है। अगर यही रुख रहा तो केवल श्रीनगर में ही पत्थर नहीं फेंके जाएंगे, पूरे देश में यह हालत हो जाएगी। उदाहरण के तौर पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय रिटेल (खुदरा) कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की योजना बना रहा है। मंत्रालय ने एक मसौदा प्रस्ताव तैयार किया है कि खुदरा उद्योग में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होना चाहिए या नहीं? प्रस्ताव अंग्रेजी में है। अगर आपके पास इंटरनेट कनेक्शन है और आप इसे मंत्रालय की साइट पर जाकर देख सकते हैं तो आप इस पर ‘कमेंट’ दे सकते हैं। मंत्रालय भलीभांति जानता है कि इस नीति से समाज के जिस तबके के ऊपर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, वह अंग्रेजी नहीं जानता। चाहे वह खिलौने बेचने वाला लुधियाना का कोई छोटा कारोबारी हो या दिल्ली की खारी बावली का कोई किराना व्यापारी या लखनऊ के हबीबगंज बाजार का कोई कुर्ता विक्रेता। इन सब लोगों क...

ये है 'पीपली लाइव' बनने की कहानी

’ नई दिल्ली. आमिर खान की फिल्म ‘पीपली लाइव’ कैसी है, यह तो आप देखने के बाद बताएंगे। पर हम आपको बता रहे हैं, इसके कॉन्‍सेप्‍ट से लेकर पर्दे पर आने तक की कहानी। फिल्म का आइडिया फिल्म की डायरेक्टर अनुषा रिज़वी को करीब छह साल पहले किसानों की हालत पर एक फिल्म बनाने का आइडिया तब आया जब 2004 में सरकार ने कुछ किसानों को फसल बर्बाद होने पर मुआवजा दिया था। अनुषा के दिमाग में ‘पीपली लाइव’ की धुंधली तस्वीरें तभी बनने लगी थीं। किसानों के गरीबी से तंग आकर आत्महत्या की खबरें अनुषा की कहानी का आधार बनीं। फिल्म की सिनॉप्सिस और आइडिया तैयार करने के बाद अनुषा ने फिल्म पर पैसा लगाने के लिए प्रोड्यूसरों की तलाश शुरू की। यह तलाश इतनी आसान नहीं थी। लेकिन अनुषा ने आमिर खान का ईमेल तलाशकर उन्हें फिल्म का शुरुआती आइडिया ईमेल किया। सब्जेक्ट लाइन में उन्होंने लिखा ‘द फॉलिंग’  दरअसल, अनुषा ने तब फिल्म का नाम यही सोचा था। शुरू में पीपली लाइव लगी थी मजाक! आमिर खान को यह ईमेल द राइजिंग मंगल पांडे की शूटिंग के दौरान मिला। बकौल आमिर उन्हें ईमेल का सब्जेक्ट ‘द फॉलिंग’ थोड़ा दिलचस्प लगा। लेकिन ईमेल पढ़ने पर उन्...

संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या - नवमो अभ्‍यास:

प्रिय बन्‍धु संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या का नौवां अध्‍याय प्रस्तुत कर रहा हूँ । संस्‍कृतप्रशिक्षणकक्ष्‍या - नवमो अभ्‍यास:   आप सब के सहयोग के लिये बहुत आभार एवं धन्‍यवाद ।।