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चन्‍द्रे जलम् अस्ति इति वाराहमिहिरेण षष्‍ठसताब्‍द्याम् एव सम्‍पादितम् आसीत्।।

हिन्दी भाषायां पठितुं अत्र बलाघात: करणीय:।। किंचित कालपूर्वम् एव भारतस्‍य चन्‍द्रयानेन् प्रमाणितं यत् चन्‍द्रे जलम् अस्ति एव।  इत: पूर्वं नासावैज्ञानिका: एतस्‍य अन्‍वेषणं बहु वारं कृतवन्‍त: किन्‍तु चन्‍द्रे जलम् अस्ति इत्‍येतस्मिन् विषये ते किमपि वक्‍तुं न शक्‍तवन्‍त: । अस्‍य विषयस्‍य अन्‍वेषणं कर्तुं भारतदेश: चन्‍द्रयानम् इति कश्‍चन् गगननौका प्रेषितवान् तथा सप्रमाणेन् चन्‍द्रे जलम् अस्ति इति रहस्‍योद्घाटनं कृतवान् ।  य: विषय: अद्य नूतन वैज्ञानिकै: उद्धृत: प्रमाणित: च स: विषय: अस्‍माकं भारतस्‍य एव खगोलविद: सहस्राधिकेभ्‍य: वर्षेभ्‍य: (6तमे शताब्‍दे:) पूर्वम् एव स्‍वग्रन्थे लिखितवान् आसीत्। तदा गगनस्‍य अटनं कर्तुं गगननौका: न आसन्, नैव कश्चित् अन्‍यं साधनम् एव आसीत् अस्‍य विषयस्‍य ज्ञानं कर्तुम्। किन्‍तु तदा यत् वचनं प्रमाणितं तद् वचनम् अद्य आगत्‍य सर्वै: स्‍वीकृतम्। प्रशिद्ध: भारतीय: खगोलविद: वाराहमिहिर: चन्द्रे प्रकाशस्‍योत्‍पत्ति: कथम् इति कथयन् वदति-               ''सलिल...

लो क सं घ र्ष !: कौन है यह डेविड कोलमैन हेडली

डेविड कोलमैन हेडली का नाम मुम्बई की 26/11 की तबाही के बाद सामने आया। एक गुनहगार, इंसानियत का दुश्मन को फांसी की सजा अदालत से मिल चुकी है, दूसरे गुनहगार को अमेरिका बचाने में लगा हुआ है, यह गुनहगार और कोई नहीं यही है डेविड कोलमैन हेडली जो एफ0बी0आई0 के काम करता रहा। एफ0बी0आई0 ने ही उसे पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में दाखिल कराया और वह पाकिस्तान में एफ0बी0आई0 के एजेन्ट के रूप में तबाही मचाने और हमारे देश को आतंकित करने के उद्देश्य से काम करता रहा। उसने हमारे देश के भी दौरे किये। कहीं ऐसा तो नहीं यह डेविड कोलमैन हेडली पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के लिए लोगों को संगठित करता रहा हो और भारत में अभिनव भारत और सनातन संस्था जैसी संस्थाओं को भी संगठित करने में लगा रहा हो क्योंकि अमेरिका की नीयत दुनिया के किसी देश के लिए साफ नहीं है और खास करके भारत, पाकिस्तान और चीन के लिए। बहुत जरूरी हो गया है भारत को अपनी तफ्तीश आगे बढ़ाने के लिए डेविड कोलमैन हेडली से पूछताछ करना और उसी के साथ अभिनव भारत और सनातन संस्था की साध्वी प्रज्ञा सिंह, चन्द्रपाल सिं...

मिड डे गुजराती और इंकलाब को आगे ले जाने की तैयारी

हाल में मिड डे मल्टीमीडिया के प्रिंट बिजनेस को खरीदने के बाद जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने मिड डे गुजराती और उर्दू दैनिक इंकलाब को आगे ले जाने के लिए आक्रामक योजनाएं बनाई हैं।जागरण के चीफ फाइनेंशियल आफिसर आर के अग्रवाल ने कहा कि सबसे पहला काम इंकलाब को दैनिक जागरण की मौजूदगी वाले बाजार में उतारना है इसके बाद मिड डे गुजराती को मुंबई में काफी ऊपर ले जाना जिससे कंपनी को यहां से भारी आय हो सके। अग्रवाल को उम्मीद है कि इंकलाब हाल ही में मिड डे की खरीद पर खर्च हुई रकम अपने दम पर वसूलने में कामयाब हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह उर्दू दैनिक मुनाफे की स्थिति में है जो इसके सर्कुलेशन नहीं बल्कि विज्ञापनों से होने वाली आय पर निर्भर करता है। मिड डे अंग्रेजी के लिए ग्रुप ने प्रमुख रुप से इसके मुंबई और पुणो एडिशन पर फोकस करने का फैसला किया है। जागरण ने मिड डे के प्रबंधन स्तर पर कुछ सुधार किए जाने की तैयारी की है जबकि संपादकीय पदों पर किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।   आगे पढ़ें के आगे यहाँ

लो क सं घ र्ष !: मानव अधिकार आयोग

आयोग का उद्देश्य - भारतीय संविधान ने अपने नागरिकों के इंसान की तरह सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार प्रदान कर रखा है। इंसान , इंसान ही होता है हैवान नहीं हो सकता , फिर भी हमारे देश का एक वर्ग इंसान को हैवान की तरह बांधने , बांधने के बाद छोड़कर हंकाने और कभी - कभी इंसान के सम्मान को छोड़कर बाकी सभी सुख - सुविधाएं उन्हें मुहैया करने के पक्ष में है। अब तो इस मशीनी युग में सारा काम मशीन से किया जाता है और उन मशीनों को चलाने वाले इंसानी दिमाग होते हैं। इस मशीनों का मालिक मशीनों को ठीक - ठाक रखने के लिए इसके रख - रखाव पर ठीक - ठाक खर्च करता है , उसी तरह इस मशीनी युग से पहले जब हमारा समाज जानवरों पर निर्भर करता था , खेती से लेकर ढुलाई तक काम और उससे पहले राजा महाराजा लड़ाई में जानवरों का इस्तेमाल किया करते थे। राजाओं की सेना में घोड़ों और हाथियों के अस्तबल हुआ करते थे और उनकी देखभाल के लिए भी इसी तरह के इंसान ल...

लो क सं घ र्ष !: ब्लॉग उत्सव 2010

सम्मानीय चिट्ठाकार बन्धुओं, सादर प्रणाम, आज ब्लोगोत्सव के नौवें दिन अर्थात दिनांक १० .०५.२०१० के संपन्न कार्यक्रम का लिंक- जिन्हें नाज है हिंद पर , उनके नाम http://www.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_09.html अपनी चिंतनशील वैचारिक अभिव्यक्ति की तीव्रता के लिए ब्लॉगिंग को माध्यम बनाएं : प्रेम जनमेजय http://utsav.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_10.html मुंह में गाँधी और बगल में देश की बर्बादी http://www.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_7817.html रूपसिंह चन्देल का आलेख ’ आजादी की तीसरी लड़ाई ’. http://utsav.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_8665.html क्या मैंने ऐसे देश की तो कल्पना नहीं की थी ? http://www.parikalpnaa.com/ 2010/05/blog-post_10.html Adding Documents in Blogger Post ( ब्लॉगर पोस्ट में डॉक्यूमेंट (doc, ppt, pdf, etc.) जोड़ना सीखें ) http://utsav.parikalpnaa.com/ 2010/05/adding-documents-in- blogger-post-doc.html जो सत्ता में है वह मुस्...

लो क सं घ र्ष !: मंदिरों की शिलाओं में खोजो नहीं- राम शवरी के बेरों में मिल जायेंगे

दीन दुखियो के डेरों में मिल जायेंगे। प्रेम के सात फेरो मिल जायेंगे। मंदिरों की शिलाओं में खोजो नहीं- राम शवरी के बेरों में मिल जायेंगे॥ वो धनुष की सिशओं में मिल जायेंगे। नन्दी वन के अभावो में मिल जायेंगे। प्रेम पन मातु सीता सा होवे अगर- राम वन की लताओं में मिल जायेंगे॥ सींक के वाण में राम मिल जायेंगे। जल कठौते में भी राम मिल जायेंगे। ये शिला जैसा तन-मन से चाहे अगर- पाँव की धूल में राम मिल जायेंगे॥ वो जटायु के क्रंदन में मिल जायेंगे। या विभीषण के वंदन में मिल जायेंगे। भक्त की लालसा हो दरस की अगर राम तुलसी के चन्दन में मिल जायेंगे॥ -डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही'

संस्‍कृतगीतम्

मनसा सततं स्‍मरणीयम् वचसा सततं वदनीयम् ।। लोकहितं मम करणीयम् ।। न भोगभवने रमणीयम् न च सुखशयने शयनीयम् अहर्निशं जागरणीयम् लोकहितं मम करणीयम् ।। न जातु दु:खं गणनीयम् न च निजसौख्‍यं मननीयम् कार्यक्षेत्रे त्‍वरणीयम् लोकहितं मम करणीयम् ।। दु:खसागरे तरणीयम् कष्‍टपर्वते चरणीयम् विपत्तिविपिने भ्रमणीयम् लोकहितं मम करणीयम् ।। गहनारण्‍ये घनान्‍धकारे बन्‍धुजना ये स्थिता गह्वरे तत्र मया संचरणीयम् लोकहितं मम करणीयम्