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किसी खजाने से कम नहीं हैं ये किताबें..

महंगी किताबों की दुनिया में अब एक नया पन्ना जुड़ने जा रहा है। क्रिकेट लीजेंड बन चुके सचिन तेंडुलकर पर लिखी गई किताब अब दुनिया की महंगी किताबों को टक्कर देने के लिए तैयार है। महंगी मूल प्रतियों और कीमती हस्ताक्षरों वाली किताबों के बीच यह किताब कहां होगी जानने की कोशिश की डीबी स्टार ने। शेक्सपियरः माना जाता है कि सबसे बेहतरीन प्लेराइटर शेक्सपियर द्वारा हस्ताक्षरित सिर्फ 6 प्रतियां ही अब दुनिया में बची हैं। जाहिर है इसके चलते अब इन प्रतियों की कीमत भी कम नहीं है। सबसे महंगे ऑटोग्राफ के तौर पर माने जाने वाले शेक्सपियर के हस्ताक्षरों को 5 मिलियन डॉलर से ज्यादा का अांका जाता है। मजे की बात यह है कि उनकी मेनुस्क्रिप्ट पर उनके साइन मिलना मुश्किल है लेकिन सौदों से जुड़े दूसरे दस्तावेजों में ये मिल जाते हैं। उनके 1623 में प्रकाशित फस्र्ट फोलियो के प्रथम संस्करण को 5.1 मिलियन डॉलर में खरीदा गया और अब इसकी कीमत कई गुना है। बिल ने खरीदी कोडेक्स लिसेस्टरः बिल गेट्स ने लियोनाडरे द विंसी की कोडेक्स लीसेस्टर खरीदी जिसकी कीमत 30.8 मिलियन डॉलर रखी गई थी। इसमें ओरिजनल ड्राइंग, नोट्स और स्कैच भी शामिल हो...

लो क सं घ र्ष !: कलंक दिवस है आज

6 दिसम्बर 1992 को नियोजित तरीके से अयोध्या में बाबरी मस्जिद को तोड़ डाला गया था । भारतीय संविधान के अनुसार देश धर्म निरपेक्ष है और सभी को अपना धर्म मानने उपासना करने का संवैधानिक अधिकार है । देश के अन्दर एक छोटा सा तबका जो पहले ब्रिटिश साम्राज्यवाद से संचालित होता था और अब अमेरिकन साम्राज्यवाद से संचालित होता है। साम्राज्यवादियों के इशारे पर देश कि एकता और अखंडता को कमजोर करने की नियत से यह प्रलाप करता है कि वह देश का यह स्वरूप बदल कर एक ऐसे धार्मिक राष्ट्र के रूप में तब्दील कर देना चाहता है कि जिससे वर्तमान देश का स्वरूप ही न बचा रहे । ऐसे तत्वों ने देश के अन्दर गृहयुद्ध करवाने के लिए बाबरी मस्जिद विवाद खड़ा किया था । देश धार्मिक विवाद में फंसा रहे और उसकी प्रगति रुकी रहे जिससे देश साम्राज्यवादी ताकतों के सामने खड़ा न हो सके । इस विवाद से आज तक मुक्ति नही मिल पायी है और हम आर्थिक रूप से भी कमजोर हुए है और हमारी प्रगति बाधित हुई है । देश का वर्तमान स्वरूप 15 अगस्त ...

नवगीत: मौन निहारो... --संजीव 'सलिल'

नवगीत: संजीव 'सलिल' रूप राशि को मौन निहारो... * पर्वत-शिखरों पर जब जाओ, स्नेहपूर्वक छू सहलाओ. हर उभार पर, हर चढाव पर- ठिठको, गीत प्रेम के गाओ. स्पर्शों की संवेदन-सिहरन चुप अनुभव कर निज मन वारो. रूप राशि को मौन निहारो... * जब-जब तुम समतल पर चलना, तनिक सम्हलना, अधिक फिसलना. उषा सुनहली, शाम नशीली- शशि-रजनी को देख मचलना. मन से तन का, तन से मन का- दरस करो, आरती उतारो. रूप राशि को मौन निहारो... * घटी-गव्ह्रों में यदि उतरो, कण-कण, तृण-तृण चूमो-बिखरो. चन्द्र-ज्योत्सना, सूर्य-रश्मि को खोजो, पाओ, खुश हो निखरो. नेह-नर्मदा में अवगाहन- करो 'सलिल' पी कहाँ पुकारो. रूप राशि को मौन निहारो... *

लो क सं घ र्ष !: पुलिस पर कब्ज़ा करने की नई रणनीति

टेलिकॉम कंपनियों ने अपने मुनाफे के लिए आबादी क्षेत्र में नियमो - उपनियमों का उल्लंघन मोबाइल टावर लगा कर रखा है । जिससे अधिकांश जनता का जीना दूभर हो गया है । टेलिकॉम कंपनियों ने लोगो की छतों पर मोबाइल टावर लगा रखे हैं । मोबाइल टावर को संचालित करने के लिए बड़े - बड़े जनरेटर छत पर रखे हैं । जनरेटर चलने से उत्पन्न कंपन से पड़ोसियों के मकान चिटक रहे हैं । शोर से आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोगो को काफ़ी असुविधा होती है । मोबाइल टावर क्षेत्र में तरंगो से लगातार बन रहे बादल से मानव जीवन के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा यह आने वाला समय ही बताएगा । मोबाइल टावर के कारण जगह - जगह विवाद उत्पन्न हो रहे हैं जिनसे निपटने के लिए टेलिकॉम कंपनियों ने पुलिस विभाग को अपने कब्जे में करने के लिए उत्तर प्रदेश शासन को प्रस्ताव दिया है कि प्रदेश के 15 सौ थानों में व पुलिस लाइन्स में मोबाइल टावर लगाने के लिए किराए पर दे दिए जाएँ । यह उनकी सोची समझी रणनीति का ह...

"सिर्फ अम्मा ही क्यों ? पिताजी क्यों नहीं?"

मित्रों ,   "सिर्फ अम्मा ही क्यों ? पिताजी क्यों नहीं ?" हमारे अनेक पाठकों ने हमारे सम्मुख प्रश्न किया है कि आप www.the-saharanpur.com/amma.html  पर केवल " अम्मा " को ही समर्पित रचनायें छाप कर क्यों रुक गये हैं ?  क्या हमारे जीवन में पिता का स्थान अम्मा से कमतर होता है ?  अब आप ही बताइये , हम अपनी दो आंखों में किसे से ज्यादा महत्वपूर्ण मान सकते हैं भला ?   पर हमारे सुधि पाठकों की यह प्यार भरी शिकायत जायज़ है और इसीलिये आज हम एक अद्‌भुत काव्य रचना से अपने पूर्वजों को प्रणाम करने का यह क्रम पुनः शुरु कर रहे हैं।  उम्मीद है कि आप लोग अपने पूज्य पिता श्री के प्रति अपने भाव - पुष्प समर्पित करने में पीछे नहीं रहेंगे।  तो मित्रों , ये रही इस अभियान की प्रथम रचना !   मेरे बाबूजी !   सौ सुमनों का एक हार हैं मेरे बाबूजी , बाहर भीतर सिर्फ प्यार हैं मेरे बाबूजी !   सारे घर को जिसने अपने स्वर से बांध रखा , उस वीणा का मुख्य तार हैं मेरे बाबूजी !   पूरी रचना पढ़ने के लिये क्लिक करें >>>>   यदि आपने अम्मा को स...

नव गीत: सागर उथला / पर्वत गहरा... संजीव 'सलिल'

नव गीत: संजीव 'सलिल' सागर उथला, पर्वत गहरा... * डाकू तो ईमानदार पर पाया चोर सिपाही. सौ पाए तो हैं अयोग्य, दस पायें वाहा-वाही. नाली का पानी बहता है, नदिया का जल ठहरा. सागर उथला, पर्वत गहरा... * अध्यापक को सबक सिखाता कॉलर पकड़े छात्र. सत्य-असत्य न जानें-मानें, लक्ष्य स्वार्थ है मात्र. बहस कर रहा है वकील न्यायालय गूंगा-बहरा. सागर उथला, पर्वत गहरा... * मना-मनाकर भारत हारा, लेकिन पाक न माने. लातों का जो भूत बात की भाषा कैसे जाने? दुर्विचार ने सद्विचार का जाना नहीं ककहरा. सागर उथला, पर्वत गहरा... *

वाजपेयी का मुखौटा या संघ का खिलौना

आशुतोष मैनेजिंग एडिटर ibn7 लिब्रहान कमीशन ने अयोध्या का सच सामने लाने में 17 साल लगाए और इसको लेकर उसकी जी भर के आलोचना की जानी चाहिए। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद ये भी लगता है कि कमीशन ने कांग्रेस लीडरशिप को भी जाने अनजाने बचाने की कोशिश की है। वो नरसिंहराव को जिम्मेदारी के बोझ से मुक्त कर देती है लेकिन पूरी रिपोर्ट ने सबसे ज्यादा चौंकाया अटल बिहारी वाजपेयी को अयोध्या मामले में घसीट कर। इस वजह से हिंदूवादियों और कुछ भ्रमित सेकुलरवादियों को मिर्ची लगी हैं। वो इसी आधार पर जस्टिस लिब्रहान की मंशा और विवेक पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। कमीशन बड़े दिलचस्प अंदाज में वाजपेयी को 'स्यूडो-माडरेट' बताती है। यानी वो शख्स जो दिखने में तो उदारवादी है पर हकीकत में उदारवाद का ढोंग कर रहा है, वो 'छद्म -उदारवादी' है। पेज 942, पैरा 166.6 में रिपोर्ट लिखती है 'आडवाणी, वाजपेयी, जोशी को संघ परिवार की साजिश पता न हो ये नही माना जा सकता है। '...पैरा 166.7 'ये नेता संघ परिवार का आदेश न मानने की हिम्मत नहीं सकते थे, विशेषकर आरएसएस का आदेश। ऐसा करने की कीमत थी बीजेपी और सार्वजनिक जीवन से...