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सड़क

देखा है मैंने हर मंज़र हँसना, खेलना, इठलाना तुम नन्हे क़दमों से दौड़ते हुए बाहर आती थी तुम्हारा प्यारा सा चेहरा और वो मीठी शैतानियाँ खिलखिलाती मुस्कान कैसे भूल जाऊं मैं गवाह हूँ मैं तेरी खुशियों तेरी ग़मों की कैसे भूल जाऊं मैं कल ही की तो बात थी जैसे चलना सीखा था तुमने तो भागती थी मेरी ही तरफ़ वो नन्हे कदम बढ़ते थे मेरी ओर फिर घर की ओर कैसे भूल जाऊँ मैं गवाह हूँ मैं तेरी खुशियों तेरी ग़मों की वो पहली बार जब मुझ पर गिरी थी तुम साईकिल से अपनी नौ साल की उम्र में चोट लगी थी तुमको, दर्द महसूस किया मैंने आंसू देखे थे तुम्हारी आँखों से बहते मैंने कैसे भूल जाऊँ मैं गवाह हूँ मैं तेरी खुशियों तेरी ग़मों की वो खेलना, वो दौड़ना, वो खिलखिलाना तेरा ऊँगली छोड़ कर बाहर की ओर भागना तेरा वो अल्हड वो मासूम सी चाहत तेरी आइसक्रीम वाले को रोकना और घरवालों से झगड़ना तेरा कैसे भूल जाऊँ मैं गवाह हूँ मैं तेरी खुशियों तेरी ग़मों की तुम्हारे पिता का दुलार, माँ का वो लाड वो भाइयों से लड़ना तेरा फिर प्यार से मनाना भी तेरा चलती साईकिल से गिरकर मुझ पर चोट खाना तेरा वो खो-खो, वो कबड्डी, वो छुपाछुपी का खेल तेरा कैसे भूल...

सिर्फ हाथ फूल, अक्षत चढ़ाता है और दिमाग जहां- तहां घूमता है

विनय बिहारी सिंह हममें से कई लोगों की पूजा बहुत मेकेनिकल यानी यांत्रिक होती है। जल चढ़ाया, फूल चढ़ाया, अक्षत अर्पण किया, अगरबत्ती दिखाई, घंटी बजाई और प्रणाम करके आफिस या कहीं और चलते बने। मन में यह पक्की धारणा बन गई कि हां, आज पूजा की। ज्यादातर लोग तो ऐसे ही करते हैं। कई लोग तो घड़ी भी देखते रहते हैं औऱ मंत्र वगैरह भी पढ़ते रहते हैं। मन में चलता रहता है कि अमुक अमुक काम करने हैं या यहां जाना है वहां जाना है वगैरह वगैरह। तो फिर यह पूजा कहां हुई? यह तो जैसे कोई औपचारिकता कर ली। भगवान तो तब भी खुश हो जाते हैं जब आप उन्हें प्यार से याद करते हैं। कथा है कि एक बार नारद मुनि ने भगवान से पूछा कि आपका सबसे बड़ा भक्त कौन है। भगवान ने कहा- तुम्हीं बताओ। नारद मुनि ने कहा- जंगल में एक साधु ४० वर्षों से साधना कर रहा है, वही होगा। भगवान ने कहा- नहीं। नारद मुनि ने पूछा तो फिर कौन है? उन्होंने बताया कि अमुक गांव में एक किसान है जो अभी हल जोत रहा है। वही मेरा सबसे बड़ा भक्त है। नारद मुनि हैरान रह गए। वे तत्काल धरती पर उस किसान के पास एक साधारण आदमी के वेश में पहुंचे। देखा वह हल जोत रहा है और नारायण, नार...

एक अच्छा ब्लॉगर बनाने की दवा ईजाद,देश व विदेशों में मची धूम!!

दोस्तों और मेरे आदरणीयों आप लोग तो जानते ही है हम हमेशा कुछ अच्छा करने की फिराक में रहे है हालाँकि ऐसा हुआ नहीं! पर कोशिश एक बार फिर हाजिर है तो आज हम आपको बता रहे है की एक अच्छा ब्लॉग बनाने के लिए क्या क्या होना जरुरी है॥आप आपके एक अच्छे ब्लॉगर बनने की ''दवा'' ! हम दावा करते है की अगर आप इस दवा का नियमित उपयोग करते है तो आपका सक्रियता क्रमांक १ हो जायेगा! और आप नंबर १ ब्लॉगर बन जायेंगे! एक अच्छा ब्लॉग बनाने में सबसे अधिक योगदान होता है पोस्ट का तो पोस्ट लिखते समय पोस्ट में निम्नलिखित सामग्री का होना बहुत जरुरी है ! १. सच्चाई के फूल -५ ग्राम २.सब्दों की मिठास ३.ईमानदारी के पत्ते -३ तोला ४.परोपकार की जड़ ५.मिलान्सार्ता के आंवले -५०० ग्राम ६.सत्संग का पानी - आवश्यकतानुसार ७.संगठन का दूध -२ लीटर 8 .शांतिप्रियता की छाल- 5 tola 9. उदारता का अर्क -२ माशा १०। स्वदेशप्रेम का रस-आधा लीटर ! बनाने की बिधि- इन सभी दवाओं का अच्छी तरह से मिश्रण करके परमात्मा के तपेले में भक्ति का शुद्ध घी डालकर प्रेम के चूल्हे पर रखकर ध्यान की अग्नि जलाये , अच्छी तरह बन जाने पर नीचे उतार लें और ठंडा...

हमारी सोच हमारा दर्द

कभी कभी सोचता हू कि हिंदुस्तान का सबसे बड़ा दर्द क्या है। सडा हुआ सिस्टम, गला हुई राजनीति या फिर बढती हुई लोगो की तादाद। क्या हो सकता है हिंदुस्तान का दर्द। आतंक के सामने घुटने टेक देने की प्रवत्ति, या बेडियो में जकडा हमारा इतिहास। आजादी के केवल ६० सालो के भीतर ही हम फिर गुलाम बन गए है और इस बार गुलाम बनने वाला कोई बाहरी आतताई नही बल्कि हमारी सोच है। ये वही सोच है जो पीढी दर पीढी हमारे खून में बहती चली आ रही है। जो देश आक्रमण करना नही जानता अन्याय का प्रतिकार करना नही जानता, धीमे धीमे खत्म होने लगता है। हम डरपोक लोगो ने पिछले दस हजार सालो में एक ही हमला किया वो भी किवदंती बन चुके राम के साथ मिलकर। वरना तो हम हमले झेलते आए है। एक फ़िल्म हू तू तू देखिये, इसमे एक सीन में मास्टर जी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर की और इशारा करते हुए कहते है कि आजादी अगर इनकी अदा से मिलती तो आज देश की तस्वीर कुछ और ही होती। अमेरिका और हम अति का शिकार हुए है। उसने बन्दूक के बल पर स्वतंत्रता हासिल की और हमने अहिंसा के बल पर। अमेरिका ताकत के दम पर दुनिया को गरियाने लगा और हम इतने अहिंसक हो गए की अपनी सुरक्षा भी नही...

रुदालियों के माफिक रोना छोड़ो भाई ....

लोग देश के पिछड़ेपन पर इस प्रकार रोते हैं जैसे दूसरो की मैय्यत पर रुदालियाँ । हर छोटी- बड़ी कुव्यवस्था के लिए सिस्टम (व्यवस्था ) को जी भर गालियाँ सुना कर ऐसा लगता है मानो कोई जंग जीती हो ! दिन भर में कम से कम एक बार तो किसी न किसी को पकड़ कर अपनी भड़ास निकाल ही लेते हैं हम सब। तब ऐसा महसूस होता है कि जैसे घंटो दबाये मूत्र का त्याग कर दिया है। यह सब आज हमारी दिनचर्या में शामिल है । इसमे एक बड़ी भूमिका मीडिया की भी रहती है । मीडिया तो ठहरी शासन की जन्मजात दुश्मन ! बाज़ार के हाथों में अपना सर्वस्व सौंप चुकी मीडिया जब श्री राम सेना या मनसे को पानी पी पी कर कोसते समय भूल जाती है कि सब किया धरा उसी का है । श्री राम सेना ने किसी को पीटा तो राष्ट्रीय ख़बर हो गई जबकि उसी दिन विदर्भ में दर्जन भर किसान भूख और कर्ज के बोझ से दब करते है और कहीं चर्चा नही होती। राहुल गाँधी एक दिन किसी दलित के घर रुकते हैं तो वो ख़बर होती है लेकिन किशोर तिवारी को कोई नही जनता जिस व्यक्ति ने सारी जिन्दगी विदर्भ के किसानों की सेवा में झोंक दी है। तो भइया यहाँ सब ऐसा ही चलता है ये मैं नही हम सब कह कर टाल जाते हैं । शासन और व्...

मन बहुत पगला रहा है....!!

मन बहुत पगला रहा है....!! मन बहुत अकुला रहा है... ख़ुद को अभिव्यक्त ही कर पा रहा है.... शरीर इक शव बन गया है... और दिल भी पत्थर हुआ जा रहा है.... जिनको सौंप कर अपना कीमती इक-इक वोट निश्चिंत हो गए हैं एकदम से हम... वही हर इक शख्स.... हमारे चिथड़े-चिथड़े कर रहा है... और हमारी चिन्दियाँ-चिन्दियाँ..... नोच-नोच कर खाए जा रहा है.... दिन भर की कसरत के बाद भी.... किसी को नसीब नहीं बीस रुप्पल्ली.... बीस-बीस हज़ार माहवार पाने वाला कामगार.... राज-ब-रोज हड़ताल पर जा रहा है..... मेरे आस पास ये भूखे...नंगे और बदहाल लोगों की भीड़-सी कैसी है..... मेरा देश तो बरसों से ही शाईनिंग इंडिया.... शाईनिंग इंडिया की दुदुम्भी बजा रहा है..... हर तरफ़ गंदगी-ही-गंदगी का आलम है..... अबे चुप करके बैठ जा ना तू..... मेरा नेता अभी ऐ.सी. की हवा में...... चैन की बंशी बजा रहा है..... मेरा दिल किसी करवट..... चैन ही नहीं पा रहा है.... ना जाने ये किस आशंका से घबरा रहा है.....

पूतना वध

विनय बिहारी सिंह जब कंस को लगा कि कृष्ण का वध मुश्किल है तो उसने बहुत ही मायावी मानी जाने वाली राक्षसी पूतना को बुलाया और कृष्ण वध का आदेश दिया। पूतना की तारीफ भी की। वह अद्भुत मायाविनी थी। कोई भी वेश धर सकती थी। जब सुंदर स्त्री का रूप धरती थी तो बड़े- बड़े बुद्धिमान उस उस पर मोहित हो जाते थे। जब वह मथुरा से गोकुल में गई तो उसने. गोपी का रूप बना लिया। उस समय उसके चेहरे पर अद्भुत प्यार छलक रहा था। उसने सबको मायावी जादू की गिरफ्त में ले लिया। कुछ संतों का तो कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण ने खुद ही सबका दिमाग लापरवाह बना दिया क्योंकि उन्हें पूतना क मौका देना था। तो पूतना ने कृष्ण को गोद में ले लिया और चुपके से पास के पहाड़ पर ले गई। उसने पहले से ही अपने स्तनों पर जहर लगा रखा था। भगवान कृष्ण प्रेम से दूध पीने लगे। कथा है कि उन्होंने पूतना का दूध तो पीया ही उसके साथ उसकी जीवनी शक्ति भी पी ली। कंस ने पूतना के मरने की खबर सुनी तो सन्न रह गया। उसने अपने करीबी मंत्रियों से कहा कि कृष्ण भी बहुत मायावी है। लेकिन उसकी माया की काट हमारे पास है। अनंत कोटि ब्रम्हांड के सावामी को भी उसने चुनौती दी। आ...