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लोकनाथ ब्रह्मचारी

विनय बिहारी सिंह लोकनाथ ब्रह्मचारी १८वीं शताब्दी में ढाका (बांग्लादेश) जिले में रहे और विलक्षण संत के रूप में ख्याति प्राप्त की। उस समय ढाका भारत का ही अंग था। उन्होंने वैसे तो कई दुखी लोगों की मदद की। लेकिन एक घटना बांग्लादेश में आज भी याद की जाती है। यह तो कहने की जरूरत नहीं कि सच्चे संत लोक कल्याण के लिए चमत्कार करते रहे हैं। आइए पहले उस विवरण को जानें। उनके बारे में गोपीनाथ कविराज ने लिखा है कि उनके एक सहपाठी ने इस घटना का जिक्र किया था। इस सहपाठी को मलेरिया ने धर दबोचा। वे महीनों खाट पर पड़े रहे। बहुत इलाज हुआ लेकिन बुखार था कि ठीक ही नहीं हो रहा था। वे दिन पर दिन कमजोर होते जा रहे थे। तब किसी ने कहा कि आप लोकनाथ ब्रह्मचारी के पास जाइए। शायद वे कुछ चमत्कार कर दें। मरता क्या न करता। उनके सहपाठी अपने पिता के साथ ब्रह्मचारी के पास पहुंचे। उनके पिता ने कहा- महात्मा जी इस लड़के का बुखार उतर ही नहीं रहा है। लोकनाथ ब्रह्मचारी ने कहा- तो मैं क्या करूं। डाक्टर को दिखाओ। लड़के के पिता ने कहा- बहुत सारे डाक्टरों को दिखाया लेकिन बुखार उतर नहीं रहा है। लेकिन लोकनाथ ब्रह्मचारी चुपचाप बैठे रहे...

सुंदर लड़कियां ज्यादा हैं-सैनिक कम, कैसे रुकें रेप

इटली के नेता सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने कहा है कि रोम में बलात्कार की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए तीस हजार सैनिकों की नियुक्ति की जाएगी। बर्लुस्कोनी ने कहा कि रोम में बलात्कार जैसे अपराध पर रोक लगाने के लिए 30 हजार सैनिकों को तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस जोखिम को रोकने के लिए इतनी बड़ी सुरक्षा देना संभव नहीं है क्योंकि हमारे पास उतने सैनिक नहीं हैं जितनी कि सुंदर लड़कियां। उन्होंने कहा कि कुकर्म जैसी घटनाओं पर तब तक रोक नहीं लग सकती जब तक कि जितनी संख्या में सुंदर लड़कियां हों और उतने ही सैनिक मौजूद न हो। पिछले साल दोबारा सत्ता में आये बर्लुस्कोनी की विपक्ष यह कह कर आलोचना कर रहा है कि वह देश को एक पुलिस राज्य में तब्दील कर रहे हैं। इस महीने रोम में हुये बलात्कार के तीन जघन्यतम कांड को विशेष तौर पर निशाना बनाते हुए विपक्ष ने कहा कि सेना के इस्तेमाल से अपराध नहीं रुके हैं। इसका जबाव देते हुये बर्लुस्कोनी ने कहा कि ये घटनाएं तब भी होंगी जबकि किसी भी देश में पूरी तरह सेना का वर्चस्व हो। उन्होंने कहा कि इस जोखिम को रोकने के लिए इतनी बड़ी सुरक्षा देना संभव नहीं है क्योंकि हमारे पास उत...

नारी देह, नग्नता और हमारा समाज

संवादघर  ( www.samwaadghar.blogspot.com)  में   नारी की दैहिक स्वतंत्रता व सामाजिक उपयोगिता पर जो बहस चल रही है वह रोचक तो है ही ,  बहुत महत्वपूर्ण भी है । एक ऐसा एंगिल जिससे अभी तक किसी ने इस विषय पर बात नहीं की है ,  मैं सुधी पाठकों के सम्मुख रख रहा हूं  !   बहस को और उलझाने के लिये नहीं बल्कि सुलझाने में मदद हो सके इसलिये  !  नारी देह के डि - सैक्सुअलाइज़ेशन  (de-sexualization)  की दो स्थिति हो सकती हैं ।    पहली स्थिति है  -  जहरीला फल चखने से पहले वाले आदम और हव्वा की  - जो यौन भावना से पूर्णतः अपरिचित थे और शिशुओं की सी पवित्रता से ईडन गार्डन में रहते थे।    ऐसा एक ही स्थिति में संभव है  -  जो भी शिशु इस दुनिया में आये    उसे ऐसे लोक में छोड़ दिया जाये जो ईडन गार्डन के ही समकक्ष हो । वहां यौनभावना का नामो - निशां भी न हो ।   " धीरे धीरे इस दुनिया से भी यौनभावना को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना है " -  यह भी लक्ष्य हमें अपने सामने रखना होगा ।   यदि यह संभव नहीं है या    हम इसके लिये तैयार नहीं हैं तो दूसरी स्थिति ये हो सकती है कि हम न्यूडिस्ट समाज की ओर बढ़ें और ठीक वैसे ...

मनोज द्विवेदी जी का लेख

हिन्दुस्तानी की आवाज़ प्रतियोगिता के तहत हम आज मनोज द्विवेदी जी का लेख प्रकाशित करने जा रहे है,मनोज जी के लेख ने शीर्ष पांच मे प्रथम स्थान बनाया है ! मनोज द्विवेदी,दिल्ली हमने आपसे पूछा- ''हिन्दुस्तान को अमेरिका के तलवे चाटने की क्या जरूरत है क्या इससे पाकिस्तान पर कोई फर्क पड़ेगा।'' मनोज जी ने कहा- वर्तमान में भारत-पाकिस्तान के बीच जिस तरह गर्मागर्म बहस छिड़ी है। इसका विषय अमेरिका आयातित है, आपको यह जानकर अफसोस होगा कि जिस आतंक को खत्म करने की मुहिम अमेरिका ने शुरू की है, उसे पैदा करने वाला भी खुद अमेरिका ही है । इसी उद्देश्य पूर्ति के लिये पाकिस्तान की धरती पर भारी संख्या में अमेरिकी सेना की मौजूदगी है। जिसकी वजह से ही भारत कोई भी कार्यवाही करने से पहले अमेरिका की तरफ देख रहा या यूं कहिये की अमेरिका के तलवे चाटना पड़ रहा है, क्योंकि पाकिस्तान पर हमला परोक्ष रूप से अमेरिका पर हमला होगा। दूसरी बात इस पूरे प्रकरण में चीन की चुप्पी यानि मौनम् सम्मति लक्षणम्। चीन की तरफ से भारत को मौन स्वीकृति है, क्योंकि उसे पता है कि भारत का कोई भी कठोर कदम अमेरिकी हितों को भी रौंद डा...

रोया हूँ बहुत...

रोया हूँ बहुत तब जरा करार मिला है इस जहाँ से किसे सच्चा प्यार मिला है? गुज़र रही है जिंदगानी इम्तेहान के दौर से, एक ख़तम हुआ तो दूसरा तैयार मिला है मेरे दामन को खुशियों का नही है मलाल, गम का खजाना इसे बेसुमार मिला है वो कमनसीब हें जिन्हें महबूब मिल गया, मैं खुशनसीब हूँ मुझको इंतज़ार मिला है गम नही है मुझको दुश्मन हुआ ज़माना, जब दोस्त लिए हाथों में तलवार मिला है सब कुछ खुदा ने तुमको कैसे दे दिया? मुझे तो उसके दर से इंतजार मिला है

''आर पी भटनागर''बने हिन्दुस्तानी की आवाज़ और जीते 5000 रुपए

''हिन्दुस्तानी की आवाज़'' प्रतियोगिता मे भाग लेने वाले,पाठकों और लेखकों सहित सभी देशवासियों को इस पवन पर्व की शुभकामनाएं!हम उन लेखकों का बहुत-बहुत शुक्रिया अदा करना चाहेंगे जिन्होंने इस प्रतियोगिता मे भाग लेकर इसे सफल बनाया,इसे हम पूर्म सफलता तो नहीं कह सकते पर प्रयास किया था हमने जो कुछ हद तक पूरा भी हुआ है ! आज हम हाजिर है आपके सामने''हिन्दुस्तानी की आवाज़'' प्रतियोगिता के परिणामों के साथ!दोस्तों हमें हजारों की संख्या मे तो लेख प्राप्त नहीं हुए,लेकिन हां मुकाबला जरुर रहा !इस मुकाबले के विजेता रहे छतीसगढ़ के ''आर.पी.भटनागर'' जिन्हें जांच कमेटी ने विजेता घोषित किया! ''आर.पी.भटनागर'' जी को हिन्दुस्तान का दर्द ब्लॉग की तरफ से पांच हज़ार रुपए एवं प्रमाण पत्र सहित ससम्मान सम्मानित किया जा रहा है ! इसी प्रयास मे अब हम शीर्ष पांच लेखकों के नाम घोषित कर रहे है जिन्होंने कोई पुरूस्कार तो नहीं जीता पर सबका दिल जरुर जीत लिया ! १.मनोज द्विवेदी २.कुसुमलता मौर्य ३.जगदीश यादव ४.आचार्य महादेवन ५.कशिश श्रीवास्तव सभी लेखकों का हम फिर...

गणतंत्र दिवस है आज ..............

........................ कल क्रमिक भूख हड़ताल का ३५ वां दिन था । दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति दफ्तर के बाहरएक छोटे से टेंट में संस्कृत के छात्र धरने पर बैठे थे । उपवास कर रहे दो लोगो ही हालत कुछ ठीक नही थी । हम पहुंचे तो थे उनका साथ देने, होसला बढ़ाने , लकिन वहां की परिस्थितियों ने अन्दर से झकझोर दिया । आज के समय में गांधीगिरी कर रहे इन युवा छात्रों-छात्राओं की बात सुनने वाला कोई नही था । महिना बीत गया धरना प्रदर्शन और उपवास करते -करते विश्वविद्यालय प्रशासन की छोडिये छात्र संघ का कोई अधिकारी भी नही आया । बात-चित में हड़ताल का नतृत्व कर रही किरण ने बताया तीन-चार बार बुलाने पर भी डूसु अध्यक्ष नुपुर शर्मा या अन्य कोई नही आया। वाह रे गणतंत्र ! २६ जनवरी आने ही वाला है । देश भर में तिरंगा फहराएगा , देश को उचाईयों पर ले जाने के लोकलुभावन वादे होंगे ...........पर हकीक़त सबके सामने है............. दिल्ली इस दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी में छात्र हितों की अनदेखी हो रही है । इससे तो अच्छा है किजामिया के तर्ज पर दिल्ली विश्विद्यालय भी चुनाव पर पाबन्दी लगा दे । अरे, जब छात्र संघ के लोग भ...