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सांप्रदायिकता का जहर गांधीवादी विचारक और लेखक कुमार प्रशांत जेपी की छांव में पले-बढ़े. शांति सेना के साथ जुड़कर लंबे समय तक काम किया. वर्तमान संदर्भ में हमारे सामने जो चुनौतियां हैं उनके मुख्यरूप से तीन प्रकार हैं. पहली चुनौती है सांप्रदायिकता, दूसरी चुनौती है पूंजी का जहर और तीसरी चुनौती है हिंसा का फैलता दायरा. गांधी शांति प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए इन तीनों विषयों पर कुमार प्रशांत ने विस्तार से प्रकाश डाला है. हम क्रमशः यहां प्रकाशित कर रहे हैं- संपादक . गांधी को समझनेवाले कई लोग मुझसे यह सवाल पूछते हैं कि गांधी ने जीवनभर इतनी सारी बातें कहीं फिर तुम लोगों ने यही एक बात क्यों पकड़ ली है? और भी तो बहुत सारी बातें कही है उसने. मित्रों मेरे लिए सांप्रदायिकता हिन्दू-मुसलमान का झगड़ा मात्र नहीं है. सांप्रदायिकता इससे बड़ी चुनौती है. आप लोगों ने संग्रहालयों में देखा होगा कि वहां लिखा रहता है कि यह पेड़ का तना इतने सालों पहले दब गया और उसके कारण इस पत्थर का निर्माण हो गया. कोई पेड़ का तना एक निश्चित तापमान पर लंबे समय तक धरती के नीचे दबा रहा तो वह पत्थर हो गया. ये आज आ...
शिवराज सिंह बनने चले नरेन्द्र मोदी मध्यप्रदेश को गुजरात की तर्ज पर टिकेट बांटकर शिवराज सिंह चौहान ने नरेन्द्र मोदी बनने की कोशिश की है जो थोडी मुश्किल सी नजर आ रही है क्यों की गुजरात और मध्यप्रदेश की राजनीति मे जमीन आसमान का फर्क है! जहा मोदी जी ने एक नए चेहरों का उपयोग कर सत्ता हासिल की है तो मध्यप्रदेश मे यही कदम शिवराज के लिए घातक नजर आ रहा है ! शिवराज सिंह ने जहा एक तरफ नरयावली के मंत्री कबीर पंथी को जमीन पर पटक दिया तो वही हरनाम सिंह राठौर ने खुद भाजपा को अलविदा कर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया बीना से शुशीला सिरोठिया का पत्ता साफ़ हुआ तो कुल मिलकर २८ साताधरियों को खामियाजा भुगतना पड़ा है !! शिवराज सिंह के इस कदम से जहा भाजपा कर्येकर्ताओं मे रोष है तो बही उमा भारती भाजपा से नाराजों को जनशक्ति मे मिलाने की कोशिश मे लगी हुई है ..जो काफी हद तक भाजपा को नुक्सान पहुचाने मे सफल होंगी! भाजपा का मुकावला एक तरफ तो कांग्रेस से है लेकिन जनशक्ति और बसपा उसकी राहों मे कांटे बिछा रहे है यह कहना गलत नहीं होगा !!! जिसका प्रभाव नतीजों मे देखने को मिलेगा !!! संजय सेन सागर http://www.yaadonkaaaina.b...

दीपावली की आप सभी को मंगलमय हो

लावारिस नहीं है कोई लाश शव, शवयात्रा, कफन और दाह संस्कार ऐसे शब्द हैं जिनका प्रयोग कोई आपके सामने करे तो सारा माहौल भारी हो जाएगा. मगर आज हम चंडीगढ़ की जिस महिला समाजसेवी का परिचय आपसे करवाने जा रहे हैं ये शब्द और उनसे जुड़ी हुई क्रियाएं उनकी रोजमर्रा की जिंदगी हैं. अमरजीत कौर ढिल्लों चंडीगढ़ में रहती हैं और मृत देह का कफन-दफन उनके जीवन का अनिवार्य हिस्सा है. आप कभी भी उनके घर में जाईये, वहां आपको कुछ कफन के टुकड़े हमेशा धरे मिल जाएंगे. लावारिश लाशों की इस तारणहार को आप बड़ी आसानी से पीजीआई, चंडीगढ़ में ढूंढ़ सकते हैं. उनका मानना है कि ज्यादातर जरूरतमंद और गरीब लोग पीजीआई में ही आते हैं इसी वजह से वे यहां मौजूद रहती हैं, ताकि जिसे भी उनकी जरूरत हों वे समय पर उसके लिए वहां मौजूद रह सकें. वे पीजीआई में आये गरीबों की हर तरह से मदद करती हैं. जिनके पास इलाज के लिए पैसों की कमी है उसके लिए पैसों की व्यवस्था करवाना. कई लोग ऐसे भी आते हैं जो इलाज कराने में ही इतना चुक जाते हैं कि वापस लौटने का किराया तक नहीं बचता. वे घर तक पहुंच सकें, इसकी चिंता भी वे करती हैं. शायद अपने इन्हीं परोपकारी कार्य...
चार पैग चढ़ाकर राम मंदिर पर फैसला मशहूर साहित्यकार खुशवंत सिंह ने अपने कालम में मनमोहन सिंह और लालकृष्ण आडवाणी पर टिप्पणी की है. उम्र के जिस पडाव पर खुशवंत सिंह हैं, वहां उनसे निष्पक्ष सोच की उम्मीद की जाती है, लेकिन जिस तरीके से उन्होंने मनमोहन सिंह की तरफदारी करते हुए लालकृष्ण आडवाणी को घेरने की कोशिश की है, उससे यही लगता है सरदारों पर जो चुटकुले बने हैं, वो सब खुशवंत सिंह के मिजाज को देखते हुए ही बनाये गए हैं. मनमोहन सिंह बेशक इमानदार हो सकते हैं. कांग्रेस वालों का बैकग्राउंड देखते हुए उन्हें निश्चय ही अपवाद कहा जा सकता है, लेकिन एक अर्थशास्त्री के रूप में उनकी उपलब्धियों को देखते हुए आज की महंगाई के लिए उन्हें बरी कैसे किया जा सकता है. लालकृष्ण आडवाणी से नाइत्तफाक रखने वाले उनसे लाख विषयों पर बैर कर सकते हैं, लेकिन इस बात से कौन इनकार कर सकता है कि आडवाणी एक सुलझे हुए नेता हैं, किसी भी विषय पर अपनी सोच रखते हैं, इतिहास का अध्ययन उनने मनमोहन सिंह से ज्यादा किया है. जो कांग्रेस पार्टी आज देशी अध्यक्ष नही जुटा सकती, जो पार्टी सोनिया गाँधी के इशारे पर नरसिम्हा राव कि उपलब्धियों को जमी...
राज के हरकतों से तंग आ गया हूँ राज के हरकतों से तंग आ गया हूँ और अब मुह से भड़ास निकलने का दिल भी नहीं होता मेरा मतलब सीधा है भाइयों अब हमे भी एक बार हाथ साफ़ करने का अवसर मिलना चाहिए राज तो आये दिन हाथ साफ़ कर लेते है पर हम भी इंसान है हमारी भी कुछ भावनाए है ॥हमारा भी दिल करता है हाथ साफ़ करने का ।और राज से अच्छा विकल्प हो ही नहीं सकता !क्यों की भैया अपना तो ऐसा ही जो सोचा सो सोचा ..अब इंतज़ार है मौके का !ऐसी बात नहीं है की मैं अकेले हाथ साफ़ कर लूँगा ..मैं अपने सारे भाइयों को मौका दूंगा यार विस्वास करो मे लेकः हूँ नेता तो हूँ नहीं !!आज एक पूजा का आयोजन कर रहा हूँ जिससे भगवान् mujhe jaldi se जल्दी अवसर उपलब्धी कराये आप सभी आमंत्रित है ! संजय सेन सागर
हिंदू संगठनों के नाम पर हंगामा मालेगाँव धमाके में मस्जिद को निशाना बनाया गया था महाराष्ट्र के मालेगाँव और गुजरात के मोडासा में हाल में हुए धमाकों में हिंदू संगठनों के कथित रूप से शामिल होने के मुद्दे पर राज्यसभा में गुरुवार को भारी हंगामा हुआ. राज्यसभा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) की वृंदा कारत ने जैसे ही यह मांग उठाई भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने इसका विरोध करते हुए सिमी पर भी इसी तरह की कार्रवाई की मांग शुरू कर दी. वृंदा कारत ने एक अंग्रेजी अख़बार की एक ख़बर का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू कट्टरपंथी संगठनों का महाराष्ट्र के मालेगाँव और गुजरात के मोडासा धमाकों में हाथ था. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की आतंकवाद निरोधक शाखा (एटीएस) के अनुसार घटना में बजरंग दल का हाथ था. हिंदू कट्टरपंथी संगठनों का महाराष्ट्र के मालेगाँव और गुजरात के मोदासा धमाकों में हाथ था. वृंदा कारत, सीपीएम नेता वृंदा कारत का कहना था कि चरमपंथ से निपटने के मामले में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए. उन्होंने हिन्दूवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कहा कि किसी समुदाय विशेष पर चरमपंथी होन...