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chhand salila: anugeet chhand -sanjiv

छंद सलिला: अनुगीत छंद  संजीव * छंद लक्षण:  जाति महाभागवत, प्रति पद २६ मात्रा,                     यति१६-१०, पदांत लघु  लक्षण छंद:     अनुगीत सोलह-दस कलाएँ , अंत लघु स्वीकार     बिम्ब रस लय भाव गति-यतिमय , नित रचें साभार           उदाहरण: १. आओ! मैं-तुम नीर-क्षीरवत , एक बनें मिलकर    देश-राह से शूल हटाकर , फूल रखें चुनकर         आतंकी दुश्मन भारत के , जा न सकें बचकर          गढ़ पायें समरस समाज हम , रीति नयी रचकर     २. धर्म-अधर्म जान लें पहलें , कर्तव्य करें तब                 वर्तमान को हँस स्वीकारें , ध्यान धरें कल कल     किलकिल की धारा मोड़ें हम , धार बहे कलकल      कलरव गूँजे दसों दिशा में , हरा रहे जंगल     ३. यातायात...

chhand salila: geeta chhand -sanjiv

छंद सलिला: गीता  छंद  संजीव * छंद-लक्षण: जाति महाभागवत, प्रति पद - मात्रा २६ मात्रा, यति १४ - १२, पदांत गुरु लघु. लक्षण छंद:     चौदह भुवन विख्यात है , कुरु क्षेत्र गीता-ज्ञान     आदित्य बारह मास नित , निष्काम करे विहान       अर्जुन सदृश जो करेगा , हरी पर अटल विश्वास       गुरु-लघु न व्यापे अंत हो , हरि-हस्त का आभास             संकेत: आदित्य = बारह   उदाहरण: १. जीवन भवन की नीव है , विश्वास- श्रम दीवार    दृढ़ छत लगन की डालिये , रख हौसलों का द्वार       ख्वाबों की रखें खिड़कियाँ , नव कोशिशों का फर्श       सहयोग की हो छपाई , चिर उमंगों का अर्श  २. अपने वतन में हो रहा , परदेश का आभास              अपनी विरासत खो रहे , किंचित नहीं अहसास     होटल अधिक क्यो...

chhand salila: geetika chhand -sanjiv

छंद  सलिला:  गीतिका छंद  संजीव  * छंद लक्षण: प्रति पद २६ मात्रा, यति १४-१२, पदांत लघु गुरु  लक्षण छंद:      लोक-राशि गति-यति भू-नभ , साथ-साथ ही रहते      लघु-गुरु गहकर हाथ- अंत , गीतिका छंद कहते  उदाहरण: ​​ १. चौपालों में सूनापन , खेत-मेड में झगड़े      उनकी जय-जय होती जो , धन-बल में हैं तगड़े      खोट न अपनी देखें , बतला थका आइना      कोई फर्क नहीं पड़ता ,  अगड़े हों या पिछड़े २.  आइए, फरमाइए भी , ह्रदय में जो बात है            ​ ​ क्या पता कल जीत किसकी , और किसकी मात है        ​ ​ झेलिये धीरज धरे रह , मौन जो हालात है        ​ ​ एक सा रहता समय कब ​?​  , रात लाती प्रात है ​३. ​सियासत ने कर दिया है , विरासत से दूर क्यों?     हिमाकत ने कर दिया है , अजाने मजबूर यों ...

आईए,अनुच्छेद 370 को समझें

धार्मिक राष्ट्रवाद के नशे में गाफिल रहने वालों को आमजनों की क्षेत्रीय व नस्लीय आकांक्षाएं दिखलाई नहीं देतीं। विभिन्न रंगों के अति राष्ट्रवादी भी इसी दृष्दिोष से पीड़ित रहते हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दिल्ली में सत्ता पर काबिज होने के बाद से संविधान की अनुच्छेद 370  को हटाने का मुद्दा एक बार फिर राजनीति के मंच के केन्द्र में आ गया है। इस मुद्दे को प्रधानमंत्री कार्यालय के एक राज्यमंत्री ने उठाया और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती ने इसका कड़ा विरोध किया। भारतीय संघ के गठन के साथ ही, हिमाचल प्रदेश, उत्तर.पूर्वी राज्यों और जम्मू.कश्मीर के संघ में विलय का प्रश्न चुनौती बनकर उभरा। इन सभी चुनौतियों का अलग.अलग ढंग से मुकाबला किया गया परंतु आज भी ये किसी न किसी रूप में राष्ट्रीय चिंता का कारण बनी हुई हैं। जम्मू.कश्मीर इस संदर्भ में सबसे अधिक चर्चा में है। कश्मीर, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र है और इसलिए वैश्विक शक्तियों ने भी कश्मीर समस्या को उलझाने में कोई कोर.कसर नहीं छोड़ी। भारत और पाकिस्तान ...

Short Love story By Sanjay sen sagar

यूँ तो वो भीड़ भाड़ में जाने से बचने लगा था लेकिन जब किसी काम से वो मॉल पहुंचा तो बिलकुल वही हुआ जिसका उसे डर था। उसकी विशाखा उसे आज फिर दिख गयी। माफ़ कीजिये विशाखा तो अब उसकी रही ही नहीं थी वो किसी और की हो चुकी थी।  कितना अजीब था कुछ महीनो पहले ही विशाखा और वो हर रोज इसी मॉल में घूमने आते,मूवी देखते और ज़िंदगी को लेकर नए नए सपने बुनते रहते।सालों से चलता आ रहा यह किस्सा उस दिन थम गया जब विशाखा के पि ताजी की हार्ट अटैक से मौत हो गयी और उसके रिश्तेदारों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के नाम पर कुछ दिनों में ही उसकी शादी कर दी।उसे तो तब तक यकीन नहीं हुआ था जब तक की विशाखा ने उसके हाथों में अपनी शादी का कार्ड थमा नहीं दिया। उसे यकीन था की विशाखा बस उसकी है और वो शादी नहीं करेगी,पर विशाखा के हाँथ में में कुछ था ही नहीं। सबसे बुरा जो हुआ वो यह की विशाखा की शादी इसी शहर में हुई थी। जब अनजाने में वो पहली बार विशाखा से इसी मॉल में टकराया तो जैसे जान ही निकल गयी,विशाखा के हाँथ को उसके पति ने थामा हुआ था। यह देखकर उसे ऐसा अहसास हुआ जैसे किसी ने उसकी रूह को उससे छीन लिया हो। उस रात का दर्द जैसे उसकी ...

chaupal charcha: sasural men damad -sanjiv

चौपाल-चर्चा:  भारत में सावन में महिलाओं के मायके जाने की रीत है. क्यों न गृह स्वामिनी के जिला बदर के स्थान पर दामाद के ससुराल जाने की रीत हो. इसके अनेक फायदे हो सकते हैं. आप क्या सोचते हैं? १. बीबी की तानाशाही से त्रस्त मानुष सेवक के स्थान पर अतिथि होने का सुख पा सकेगा याने नवाज़ शरीफ भारत में।  २. आधी घरवाली और सरहज के प्रभाव से बचने के लिये बेचारे पत्नीपीड़ित पति को घर पर भी कुछ संरक्षण मिलेगा याने बीजेपी के सहयोगी दलों को भी मंत्री पद।  ३. निठल्ले और निखट्टू की विशेषणों से नवाज़े गये साथी की वास्तविक कीमत पता चल सकेगी याने जसोदा बेन प्रधान मंत्री निवास में। ४. खरीददारी के बाद थैले खुद उठाकर लाने से स्वस्थ्य होगी तो डॉक्टर और दवाई का खर्च आधा होने से वैसी ही ख़ुशी मिलेगी जैसी आडवाणी जो मोदी द्वारा चरण स्पर्श से होती है।  ५. पति के न लौटने तक पली आशंका लौटते ही समाप्त हो जाएगी तो दांपत्य में माधुर्य बढ़ेगा याने सरकार और संघ में तालमेल।  ६. जीजू की जेब काटकर साली तो खुश होगी ही, जेब ...

stree vimarsh;

​ सोचिए, क्या औरतें गैर इस्लामिक और मर्दों की गुलाम मात्र हैं? इस्लामाबाद। द कौंसिल ऑफ़ इस्लामिक आइडिओलॉजी The Council of Islamic Ideology (CII) की १९२ वीं बैठक के निर्णय अनुसार ' औरतों का अस्तित्व शरीया तथा अल्लाह की इच्छा के विपरीत है. कौंसिल के चेयरमैन मौलाना मुहम्मद खान शीरानी ने कहा कि औरतों का होना प्रकृति के नियमों का उल्लंघन है तथा औरतों से इस्लाम और शरीया की रक्षा लिए औरतों को निजी अस्तित्व न रखने के लिए बाध्य किया जाए. मुस्लिम औरतों की शादी के लिए न्यूनतम आयु निर्धारण को इस्लामविरोधी घोषित के २ दिन बाद यह घोषणा की गयी. शीरानी ने औरतों को इस्लाम विरोधी घाषित करते हुए  कहा कि औरतें दो प्रकार की हराम  (निषिद्ध) तथा मकरूह (नापसंद) होती हैं. कोई भी औरत जो अपनी इच्छा अनुसार कार्य करती है हराम तथा इस्लाम के विरुद्ध षड्यंत्रकर्त्री है.  केवल पूरी तरह आज्ञापालक औरत खुद को मकरूह के स्तर तक उठा सकती है, यही इस्लाम की उदारता तथा मुस्लिम पुरुष की कोशिश है. कौंसिल सदस्यों ने औरतों से जुड़े कर ऐतिहासिक सन्दर्भों विचार के बाद पाया की हर औरत फ़ित्ना का  इस्लाम की दुश्मन है. उ...