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sakaratmak soch

उत्तर प्रदेश  की शामली तहसील के लांक गाँव  में हुई कल की पंचायत में युवा पीढ़ी को भटकने से रोकने के लिए लड़कियों को मोबाईल फोन प्रयोग न करने की सलाह दी जाने पर  भाकियू  सुप्रीमो चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत  के पुत्र राकेश टिकेत ने सकारात्मक व् समयोचित प्रतिक्रिया  देते हुए कहा कि ''समाज प्रगति कर रहा है; ऐसे में लड़कियों को मोबाईल या अन्य आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से रोकना गलत है .यह परिवार की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को समझाए .'' वास्तव  में सभी आधुनिक उपकरण हमारे  ज्ञानवर्धन ; मनोरंजन के साधन है पर ये हमें नैतिकता से दूर ले जाये ;हमे हमारे लक्ष्यों  से भटका दे ; यह सही नहीं है. मै तो सभी माता-पिताओं से यही अपील करुँगी कि बच्चो को ऐसे गैजेट्स दिलवाते समय उचित प्रयोग की सलाह दे और समय-समय पर उनके आचरण पर भी ध्यान  देते रहे.नौकरीपेशा व् उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले युवक-युवतियों को तो खुद इनका इस्तेमाल उचित रूप में करना चाहिए. अन्यथा कुछ भटके हुए युवक-युवतियों के कारनामों के कारण सभी पर मोबाईल सहित अन...

दूरदर्शन की दुनिया

अजब --गजब हो गई है                   दूरदर्शन की दुनिया भी ! जो देखो............ अपने आप को                           भुनाने मै लगी हुई है ! कभी राखी का इंसाफ है तो ,            कभी बिग बॉस की आवाज़ बनी हुई है ! ये बाजारवाद तो परम्पराओ को ,                     विकृत रूप देने मै लगी हुई है ! और देखो न ये तो  युवावर्ग मै              रोज़गार का गन्दा रूप भरने  मै लगी हुई है ! और कहती है.......... वो परिवार को ,                               बस  जोड़ने मै लगी हुई है ? ये तो  वास्तव मै वास्तविकता का ,                           मजाक उड़ाने मै लगी हुई है ? हर पूंजीवाद अपन...

वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओम पुरोहित 'कागद' जी रो राजस्थान रै सांसदा नै कागद

घणां मानीता अनै आदरजोग सांसद सा , जय राजस्थानी-जय राजस्थान ! आप उण रजस्थान रा घणां हेताळू अनै म्होबी सांसद हो जिण री मायाड़ भाषा राजस्थानी है ! आप ओ भी जाणो हो कै राजस्थान रो नांव ई राजस्थानी भाषा रै ताण थरपीज्यो हो ! आज आज़ादी रै ६३ सालां बाद भी १३ करोड़ राजस्थानी आपरी मायड़ भाशा राजस्थानी री राजमानाता सारू बिलखै ! आपां दुनियां री लूंठी भाषा रा मालक होंवता थकां ईं ग्राम पंचायत सूं लेय’र संसद तांई में आपरी मायड़ भाषा राजस्थानी में नी बोल सकां ! आज़ादी सूं लेय’र हाल तांईं अबोला हां ! आपणी जुबान माथै ताळो है ! संसद में बोलण री दरकार है कै " सगळी भाषावां नै मानता-म्हानै टाळो क्यूं-म्हारी जुबान पर ताळो क्यूं ?"आप सूं आस है कै आप संसद रै शीतकालीन सत्र में आ बात जोरदार ढंग सूं उठास्यो अनै राजस्थानी भाषा नै संविधान री आठवीं अनुसूची में भेळण री मांग मनवास्यो ! आपणी मायड भाषा राजस्थानी नै संविधान री आठवीं अनुसूची में भेळण सारू राजस्थान में चाल रैयै आंदोलन सूं आप आच्छी तरियां परिचित ह...

मत कहो अनाथ

क्यु  कहते हैं कुच्छ लोग खुद को अनाथ क्या उनके माँ बाबा के .......... संस्कार उनके साथ नहीं ? अनाथ तो शायद वो होते हैं  जिनके माँ - बाप तो हैं पर............. उनके दिल मै उनके लिए  कोई स्थान नहीं उनके पास सब कुच्छ है पर उसकी कदर नहीं अनाथो की तरह रहते हैं और दर्द उनको देते हैं केसी चाह है ये इन्सान की ? जिसके पास माँ बाप नहीं ........... वो उन्हें पाना चाहता है और जिसके पास दोनों हैं वो उसकी कीमत ही नहीं जानता  ? काश वो इस दर्द को कभी समझ पाता .............. और माँ पाप का एहसान चुका पाता वक़्त ही तो है गुजरने मै कितना समय लेगा ? फिर उस दर्द की भरपाई कोंन करेगा ?

बढता भारत संभालो युवावर्ग

मनमोहन जी कुच्छ यु बोले .............                  अब तो दुनिया मै                                   भारत की है साख बड़ी फ़्रांस , रूस , चीन , अमेरिका मै                                रिश्तो की अब बात बनी       दक्षिण एशिया के पास तो                               तेजी से बड़ने की वो शक्ति है  लेकिन ये सब बाते तो                शांति , सोहार्द पर ही निर्भर करती हैं पाकिस्तान के संबंधो को                      सामान्य बनाने का विचार किया लेकिन आतंकी तंत्र पर काबू पाने तक                        उस बात ...

पत्रकारिता यदि व्यवसाय है तो क्या व्यवसाय में आदर्श की हत्या माफ होती है?

समय, काल, परिस्थितियों के साथ-साथ पत्रकारिता की परिभाषा भी बदली है। उसका रूप, रंग और उद्देश्य ने भी करवट ली है। जिस पत्रकारिता का जन्म कभी 'मिशन' के तौर पर हुआ माना जाता था और जिसने अपनी महत्ता समाज़ की बुराइयों को जड से नष्ट करने के लिये स्थापित की थी वो आज अपनी उम्र के एक ऐसे पडाव पर आ पहुंची है जहां आगे खतरनाक खाई है और पीछे धकेलने वाले हजारों-हजार नये किंतु ओछे विचार। ये ओछे विचार ही आज की मांग बन चुके हैं। ऐसे विचार जिनमे स्वार्थगत चाटुकारिता निहित है, बे-ईमानी को किसी बेहतर रंग-रोगन से रोशन किया गया हैं और जिनमे ऐसे लोगों का वर्चस्व है जो अपनी सडी हुई मानसिकता को बाज़ार की ऊंची दुकानों में सजाये रखने का गुर जानते हैं। कह सकते हैं कि महात्मा गांधी की तरह ही पत्रकारिता भी आज महज इस्तमाल की चीज बन कर रह गई है। इसका हाल ठीक वैसा है जैसे घर में खांसता बूढा अपनी ही संतानों से सताया हुआ हो, या उसे बेघर कर दिया गया हो और उसकी विरासत को लूटा-झपटा जा रहा हो। सत्य, ईमानदारी, निष्ठा, समर्पण वाले अति व्यंजन इस शब्द को स्वर्णाक्षर जरूर देते हैं किंतु यह दिखने वाली वह मरिचिका है जिसके आगे...

बाल-कहानी परी का प्यार

हिन्दुस्तान का दर्द के पाठकों के लिए आज पेश है मेरे द्वारा रचनाकार पर ११ मार्च २००८ को लिखी गयी यह बाल कहानी,सच कितना अजीब सा लगता है जब सालों पुराना कोई लेख या हमारी रचना हमें फिर से पढने को मिलती है  हम तब भी बच्चे थे और आज भी बच्चे है..तो दोस्तों नजर दाल लीजिये इस रचना पर........... -संजय सेन सागर एक गांव में किसान रहता था जिसका बहुत ही सुखी परिवार था। उसकी पत्नी और आठ सान की बेटी मोहनी बडे आराम से रहती थी। अचानक एक दिन किसान की पत्नी का स्वास्थ्य बिगड़ गया। किसान ने खूब इलाज कराया यहां तक की उसके खेत भी बिक गये पर इलाज में कोई लाभ नहीं हुआ और एक दिन वही हुआ जिसका किसान को डर था। एक दिन किसान की पत्नी का देहांत हो गया। अब तो जैसे किसान के उपर आसमान टूट पड़ा ।अब तो उसे मोहनी की फिक्र होने लगी । दिन भर किसान को दूसरों के खेत में मजदूरी करनी पड़ती थी और रात को स्वयं ही भोजन बनाना पड़ता था। यह सब देखकर मोहनी को बड़ा ही दुख होता था उसे लगने लगा की अब उसे भी काम सीख लेना चाहिए लेकिन उसकी उम्र बहुत कम थी। मोहनी काम सीखने लगी वह बहुत ही परेशान होती थी ।यह सब देखकर एक परी को बहु...