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ऑर्कुट प्रेमिका की बेवफाई में मेडिकल स्टूडेंट ने दे दी जान

इससे पहले सुंदर लड़कियां ही क्यों होती हैं न्यूज एंकर तो ये है इनकी तरक्की का राज अगरतला. ऑर्कुट पर एक लड़की के प्यार में पागल हुए एक मेडिकल स्टूडेंट ने लड़की के तवज्जों न देने के बाद आत्महत्या कर ली। यह सनसनीखेज मामला त्रिपुरा की राजधानी अगरतला का है। अगरतला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज का छात्र रूपकनाथ की दोस्ती सोशल नेटवर्किंग साइट ऑर्कुट पर एक लड़की से हुई। इंटरनेट पर बनी दोस्त के प्यार में रूपक पागल हो गया। रूपक की इंटनेट प्रेमिका दक्षिण भारत के एक कॉलेज से पढ़ाई कर रही है। पुलिस के मुताबिक रूपक के दोस्तों ने उसकी इंटरनेट प्रेमिका रूबी (परिवर्तित नाम) के फोन कॉल आने के बाद जब उसके कमरे में जाकर देखा तो पंखे से लटका हुआ पाया। रूबी ने फोन कर उसके दोस्तों को बताया था कि सुबह से उसका फोन नहीं उठा रहा है। इस पर रूपक के दोस्त उसके हॉस्टल कमरे की ओर भागे। कमरा अंदर से बंद था। दरवाजा तोड़कर अंदर घुसा गया तो रूपक का शव पंखे से लटक रहा था। मरने से पहले रूपक ने अपने कमरे की दीवारों पर अपने खून से प्रेमिका का नाम लिख दिया था। आत्महत्या करने से पहले रूपक ने अपने शरीर पर घाव भी किए थे। रूपक ने अपने...

किंग खान की बचपन से अब तक की खास तस्वीरें.

बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख़ का आज 45वां जन्मदिन है|इस मौके पर हम लेकर आए हैं उनके बचपन से लेकर अब तक की खास तस्वीरें:
आदरणीय बन्धु आपके अपने संस्कृत जाल पृष्ठ संस्कृतं भारतस्य जीवनं पर इस माह प्रस्तुत किये गए लेखों कि सूची प्रस्तुत कर रहा हूँ टिप्पड़ियों से स्वागत करें भूमि वर्गः भ्रष्टाचार छद्म निरोधनं एका आवश्‍यकी सूचना ।। सन्देश वर्तमान कालस्‍य कृतानां क्रियाणां वाक्‍यानां निर्माणप्रक्रिया ।। -- भवदीय: - आनन्‍द:

डेथ ऑफ अ डायलॉग

पत्रकारों के लिए कुछ मुद्दे जिनको वो खास फॉलो करते हैं काफी बार अडिक्टिव बन जाते हैं। मसलन बिहार-यूपी की राजनीति हो, क्रिकेट का करिश्मा, पाकिस्तान और चीन की कूटनीति या फिर कश्मीर का मसला। 25 सितंबर को जब से गृह मंत्री चिदंबरम साहब ने कैबिनेट की सुरक्षा समिति की बैठक के बाद आठ सूत्रीय कार्यक्रम का एलान किया और कहा कि केंद्र के वार्ताकार नियुक्त होंगे तबसे कश्मीर के हालात पर नज़र बनाए रखने वाले हम तमाम पत्रकारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज़ हो गईं। जहां दो पत्रकार मिले, एक ही सवाल- आखिर कौन होंगे वार्ताकार। थियरीज़ बनने लगीं, सबके सूत्र अलग-अलग नामों को उछालने लगे। पहले लगा शायद चीफ इंफर्मेशन कमिश्नर और कश्मीर में लंबा वक्त गुजार चुके वरिष्ठ कश्मीरी नौकरशाह वजाहत हबीबुल्लाह, जम्मू यूनिवर्सिटी के वाइस चांसेलर रह चुके और जेएनयू में प्रोफेसर अमिताभ मट्टू जैसे नाम शामिल होगें। फिर हम सभी ने इन अटकलों को खारिज किया। हमें यकीन था इस बार केंद्र की मंशा गंभीर है, सो राजनीतिक चेहरे होंगे। फिर ख्याली पुलाव पकने लगे। किसी ने कहा कांग्रेस के फायरफाइटर प्रणब दा कहीं खुद मसले का कमान ना संभालें। पर फिर ...

मुस्लिम आतंकवादी नहीं होते

मुस्लिम आतंकवादी नहीं होते और ना आतंकवादी मुस्लिम हो सकते है. रोशनी में जीने वाले चिरागों को क्या बुझाएंगे, जो मुर्दों को नहीं जलाते वो जिन्दों को क्या जलाएंगे. जय हिंद..! !

तो ये है इनकी तरक्की का राज

इसे कहते हैं अखबार का सही उपयोग, ऐसे ही नहीं इस अखबार ने दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की कर ली। जी आप बिल्कुल ठीक समझें, यहां बात दैनिक भास्कर की हो रही है। इस अखबार पर हमेशा से ही प्रशासन से साठ-गांठ कर अपना हित साधने के आरोप लगते रहे हैं। जिसके भौतिक उदाहरण है- गरीबों की हड़पी हुई जमीन पर अरबों रूपये का डीबी मॉल, आदित्य एवेन्यू जैसे कई पॉश्‍ा कॉलोनियां, नमक, कपडों की फैक्ट्री, एफएम, केबल और ना जाने क्या-क्या? यह सब भी केवल अखबार की दम पर, कैसे? आइए आपको इनकी तरक्की का राज बताते है। यह अखबार अपने सर्कुलेशन को बिल्कुल प्रोफेशनल तरीके से भुनाता है। इसीलिए तो इनके कोई भी काम शासन-प्रशासन में अटकते नहीं। जब कभी कोई बड़ा प्रोजेक्ट किसी राज्य में शुरू करना हो तो वहां की सरकार को घेरना शुरू कर देते हैं, इसी के चलते उमा भारती ने प्रेस कान्फ्रेन्स बुलाकर खुले तौर पर इस अखबार की ब्लैकमेलिंग उजागर की थी। उमा जी ने तमाम इलेक्‍ट्रॉनिक एवं प्रिन्ट मीडिया के सामने भास्कर पर आरोप लगाया था कि उनके किसी भूमि संबंधी विवाद का चूंकि उमा भारती ने समर्थन नहीं किया इसीलिए अखबार में उनकी झूठी खबरें प्रकाशित की ग...

सुंदर लड़कियां ही क्यों होती हैं न्यूज एंकर

अपनी हमउम्र टेलीविजन एंकर दोस्तों से जब भी बात होती है तो खुद अपने ही बारे में कहा करती है- मुझे पता है कि पांच-छ साल बाद हमें कौन पूछेगा? इसलिए सोचती हूं कि अभी जितना बेहतर कर सकूं( इस बेहतर में काम,पैसा,नाम,स्टैब्लिश होना सब शामिल है) कर लेती हूं। फिर न तो ये चेहरा रहेगा और न ही हमारी अभी जैसी पूछ रहेगी। सुनने में तो ये बात बहुत ही सहज लगती है और एक घड़ी को हम मान भी लेते हैं कि सही बात है कि जब उनके चेहरे पर वो चमक,वो फ्रेशनेस और वो चुस्ती झलकेगी ही नहीं तो कोई चैनल क्यों उन्हें भाव देगा? लेकिन इस सहजता से मान लेनेवाली बात को थोड़ा पलटकर एक सवाल की शक्ल में सामने रखें तो- क्या न्यूज चैनलों में फीमेल एंकर को सिर्फ और सिर्फ शक्ल के आधार पर रखा जाता है? यानी एंकरिंग के लिए सिर्फ अच्छी शक्ल का ही होना काफी है,इसके अलावे किसी तरह की काबिलियत की जरुरत नहीं होती? अगर इसका जबाब हां है तो फिर बेहतर है कि इस पेशे में आने के लिए मॉडलिंग के कोर्स करने चाहिए,लड़कियों आप मीडिया कोर्स करना छोड़ दें। ये समझ इसलिए भी पक्की हो सकती है कि पिछले साल जिस तरह से एक न्यूज चैनल ने अपनी ग्रांड ओपनि...