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अभियान को कामयाब बनाने में अपना योगदान प्रदान करें

भोपाल त्रासदी में हमने जो खोया उसे सारी दुनिया जानती है ,हिन्दुस्तान का दर्द  पीड़ितों के पक्ष और सत्ताधीशों की गलत बातों के विपरीत अभियान चला रहा  है । आज इस अभियान में सांसदों को, सरकार को, सुप्रीम कोर्ट को यदि हम एक पोस्टकार्ड लिखकर, याचिका लगाकर केस पुन: खुलवाने की आवाज उठाएंगे तो मानवता के बड़े अभियान में सहभागी होंगे। पीड़ितों को सफलता निश्चित मिलेगी। क्योंकि सारा देश उनके साथ है।तो हिन्दुस्तान के सभी पाठकों एवं लेखकों से मेरा आग्रह है की इस अभियान को कामयाब बनाने में अपना योगदान प्रदान करें,जिससे उन लाखों पीड़ितों को इन्साफ मिल सके एवं जनता की आवाज़ हमेशा की तरह एक बार  फिर बुलंद हो सके...  संजय सेन सागर   जय हिन्दुस्तान-जय यंगिस्तान     

नरक के दरवाजे में पहुंची कार, बचा ड्राइवर

चीन में एक ड्राइवर उस समय बाल-बाल बच गया जब एक व्यस्त सड़क में अचानक हुए गढ्ढे में उसकी कार चली गई। चीन के नामचेंग शहर में व्यस्त सड़क पर बने इस सिंकहोल में यह कार कुछ इस तरह धंस गई की ड्राइवर का निकलना मुश्किल हो गया। बाद में क्रेन की मदद से ड्राइवर को निकाला गया। चीन में इस तरह के गढ्ढें होने के मामले में बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले दो हफ्तों में यह इस तरह का 8वां गढ्ढा है। अप्रैल से अब तक ही ऐसे 35 गढ्ढें देखे जा चुके हैं। हाल ही में ग्वाटेमाला सिटी में सड़क पर हुए एक ऐसे ही विशाल गढ्ढे को नरक के दरवाजे की संज्ञा दी गई थी। जमीन के नीचे की परते खिसक जाने के कारण ही सतह पर अचानक ऐसे गढ्ढे हो जाते हैं। तस्वीरों में देखिए फंसी कार ग्वाटेमाला सिटी में हुआ गढ्ढा, इसमें एक फैक्ट्री समा गई थी

लो क सं घ र्ष !: हिंदी ब्लॉगिंग की दृष्टि से सार्थक रहा वर्ष-2009, भाग-4

वहीं मँहगाई के सन्दर्भ में हवा पानी पर प्रकाशित एक कविता पर निगाहें जाकर टिक जाती हैं जिसमें कहा गया है कि हमनें इस जग में बहुतों से जीतने का दावा किया पर बहुत कोशिशों के बाद भी हम मँहगाई से जीत नहीं पाए। वहीं कानपुर के सर्वेश दुबे अपने ब्लॉग ‘ मन की बातें ’ पर फरमाते हैं - कुछ समय बाद किलो में , वस्तुएँ खरीदना स्वप्न हो जाएगा , 10 ग्राम घी खरीदने के लिए भी बैंक सस्ते दर पर कर्ज उपलब्ध कराएगा। नमस्कार में प्रो . सी . बी . श्रीवास्तव की कविता छपी है जिसमें कहा गया है कि - मुश्किल में हर एक साँस है , हर चेहरा चिंतित उदास है। वे ही क्या निर्धन निर्बल जो , वे भी धन जिनका कि दास है। फैले दावानल से जैसे , झुलस रही सारी अमराई। घटती जातीं सुख सुविधाएँ , बढ़ती जाती है मँहगाई। आमजन से मेरा अभिप्राय उन मजदूरों से है जो रोज कुआँ खोदता है और रोज पानी पीता है। मजदूरों की चिंता और कोई करे या न करे मगर हमारे बीच एक ब्लॉग है जो मजदूरों के हक ...

लो क सं घ र्ष !: हिंदी ब्लॉगिंग की दृष्टि से सार्थक रहा वर्ष-2009, भाग-3

वर्ष -2008 में 26/11 की घटना को लेकर हिन्दी ब्लॉग जगत काफी गंभीर रहा। आतंकवादी घटना की घोर भत्र्सना हुई और यह उस वर्ष का सबसे बड़ा मुद्दा बना , मगर इस वर्ष यानी 2009 में जिस घटना को लेकर सबसे ज्यादा बवाल हुआ वह है समलैंगिकता के पक्ष में दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला। पहली बार हिन्दुस्तान ने समलैंगिकता के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बहस किया है। हिन्दी ब्लॉग जगत ने भी इसके पक्ष विपक्ष में बयान दिए और देश में समलैंगिकता पर बहस एकबारगी सतह पर आ गई । किसी ने कहा कि लैंगिक आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव का स्थान आधुनिक नागरिक समाज में नहीं है, पर लैंगिक मर्यादाओं के भी अपने तकाजे रहे हैं और इसका निर्वाह भी हर देश काल में होता रहा है, तो किसी ने कहा कि भारतीय दंड विधान की धारा 377 जैसे दकियानूसी कानून की आड़ में भारत के सम लैंगिक और ट्रांसजेंडर लोगों को अकारण अपराधी माना जाता रहा है, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने किसी भी प्रकार के यौन और जेंडर रुझानों से ऊपर उठकर सभी नागरिकों के अधिकार को मान्यता देने का ऐति...

जहरीली राजनीति का योगी

12 June, 2010 17:00;00 आनंद पाण्डेय Font size: 135 पिछले कुछ सालों से पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और उसके आस-पास के जिलों में हिन्दू सांप्रदायिक राजनीति एक नए प्रकार के प्रयोग के दौर से गुजर रही है. जाति, धर्म, अपराध और साम्प्रदायिकता के मिश्रण की इस राजनीति के नेता हैं गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मठ के उत्तराधिकारी तथाकथित 'बाबा' योगी आदित्यनाथ. यों तो आदित्यनाथ भाजपा के टिकट पर गोरखपुर से निर्वाचित सांसद हैं लेकिन इस क्षेत्र में वे भाजपा के एजेंडे पर नहीं बल्कि अपने एजेंडे पर चलते हैं. यह एजेंडा है तो हिंदुत्व का ही लेकिन मठ के पूर्ववर्ती नेताओं के विपरीत आदित्य नाथ की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और उनके आक्रामक स्वाभाव ने इसे नयी धार दे दी है. यह धार है हिंदुत्व की राजनीति को और अधिक जहरीली और आक्रामक बनाने वाली. गोरखपुर और उसके आस -पास के दर्जनों जिलों में छोटे-छोटे सामान्य झगड़ों और आपराधिक मसलों को सांप्रदायिक रंग देकर आदित्य नाथ ने समाज को अभूतपूर्व रूप से विभाजित और हिंसाग्रस्त किया है. आदित्यनाथ भाजपा के टिकट पर सिर्फ चुनाव लड़ते हैं और उसके सांगठनिक गतिविधियों में हस्तक्षे...

लो क सं घ र्ष !: हिंदी ब्लॉगिंग की दृष्टि से सार्थक रहा वर्ष-2009, भाग-2

वर्ष -2009 में जो कुछ भी हुआ उसे हिंदी चिट्ठाजगत ने किसी भी माध्यम की तुलना में बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने की पूरी कोशिश की है। चाहे बाढ़ हो या सूखा या फिर मुम्बई के आतंकवादी हमलों के बाद की परिस्थितियाँ , चाहे नक्सलवाद हो या अन्य आपराधिक घटनाएँ , चाहे पिछला लोकसभा चुनाव हो अथवा हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनाव या साम्प्रदायिकता , चाहे फिल्में हों या संगीत , चाहे साहित्य हो या कोई अन्य मुद्दा , तमाम ब्लॉग्स पर इनकी बेहतर प्रस्तुति हुई है। कुछ ब्लॉग ऐसे है जिनकी चर्चा कई ब्लॉग विश्लेषकों के माध्यम से विगत वर्ष 2008 में भी हुई थी और आशा की गई थी कि वर्ष 2009 में इनकी चमक बरकरार रहेगी। ब्लॉग चर्चा के अनुसार सिनेमा पर आधारित तीन ब्लॉग वर्ष 2008 में शीर्ष पर थे । एक तरफ तो प्रमोद सिंह के ब्लॉग सिलेमा सिलेमा पर सारगर्भित टिप्पणियाँ पढ़ने को मिली थीं, वहीं दिनेश श्रीनेत ने इंडियन बाइस्कोप के जरिए निहायत ही निजी कोनों से और भावपूर्ण अंदाज से सिनेमा को देखने की एक बेहतर कोशिश की थी। तीसरे ब्लॉग के रूप में महेन के ...

लो क सं घ र्ष !: हिंदी ब्लॉगिंग की दृष्टि से सार्थक रहा वर्ष-2009, भाग-1

आज जिस प्रकार हिंदी ब्लागर साधन और सूचना की न्यूनता के बावजूद समाज और देश के हित में एक व्यापक जन चेतना को विकसित करने में सफल हो रहे हैं वह कम संतोष की बात नही है। हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप देने में हर उस ब्लाॅगर की महत्वपूर्ण भूमिका है जो बेहतर प्रस्तुतीकरण , गंभीर चिंतन , सम सामयिक विषयों पर सूक्ष्मदृष्टि , सृजनात्मकता , समाज की कुसंगतियों पर प्रहार और साहित्यिक - सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी बात रखने में सफल हो रहे हैं। ब्लॉग लेखन और वाचन के लिए सबसे सुखद पहलू तो यह है कि हिन्दी में बेहतर ब्लॉग लेखन की शुरुआत हो चुकी है जो हम सभी के लिए शुभ संकेत का द्योतक है। वैसे वर्ष -2009 हिंदी ब्लाॅगिंग के लिए व्यापक विस्तार और वृहद प्रभामंडल विकसित करने का महत्वपूर्ण वर्ष रहा है। आइए वर्ष -2009 के महत्वपूर्ण ब्लॉग और ब्लॉगर पर एक नजर डालते हैं । हिंदी ब्लॉग विश्लेषण -2009 की शुरुआत एक ऐसे ब्लॉग से करते हैं जो हिंदी साहि...