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महिला आरक्षण पर मुलायम की सीटी

नेताजी को लगता है कि महिला आरक्षण के बाद संसद में ऐसी महिलाएं आएंगी जिन्हें देखकर लोग (जाहिर है बात संसद की हो रही है तो सांसद) सीटी बजाएंगे। एक प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय सरकार में देश की रक्षा की जिम्मेदारी संभाल चुके मुलायम सिंह यादव सरीखे नेता के इस आपत्तिजनक बयान को सुनकर सबसे पहले एक ही सवाल जेहन में आया। अगर ऐसा है तो थोड़े दिनों पहले तक फिरोजाबाद के गली कूचे में घूम घूमकर लोगों से वोट मांगता पूरा यादव परिवार अपनी बहू डिंपल यादव को संसद तक पहुंचाने का ख्वाब क्यों देख रहा था, क्या वाकई फिरोजाबाद की सांसदी, राज बब्बर से 85000 वोटों से हारने के बाद यादव परिवार ने घर में खुशियां मनाईं होंगी कि चलो अच्छा हुआ घर की इज्जत घर में ही रह गई। वाकई शर्म आती है इस देश के मुलायम सरीखे नेताओं पर, रोना आता है इनकी राजनीति पर और अफसोस होता है इनकी उस सोच पर जो विकास के पथ पर सरपट दौड़ते देश की टांगें खींचकर उसे पीछे ले जाने पर तुली है। मुलायम के कद के किसी भी नेता ने इस देश में आज तक सार्वजनिक मंच से महिलाओं की इतनी बेइज्जती इससे पहले कभी नहीं की। और इसमें कोई शक नहीं कि ऐसा इसलि...

निबंध प्रतियोगिता 2010.

''कलम का सिपाही'' कविता प्रतियोगिता के बाद हिन्दुस्तान का दर्द आपके लिए लेकर आया है निबंध प्रतियोगिता 2010 . इस प्रतियोगिता का मकसद भी होगा हिंदी की सेवा,दोस्तों हिंदी की रक्षा करना हर हिन्दुस्तानी का फर्ज है और हिंदी की रक्षा करना मतलब खुद पर गर्व करना है,तो दोस्तों खुद पर गर्व करो और हिंदी की रक्षा करो..तब तक हिंदी बोलो जब तक कोई आपकी बात सुनने पर मजबूर न हो जाए,उसके सामने हिंदी बोलो जो हिंदी को छोटा मानता है. आइये बात करते है प्रतियोगिता की. निबंध प्रतियोगिता 2010 के अंतर्गत सभी हिंदी प्रेमी भाग ले सकते है उम्र का कोई बंधन नहीं है. तो नीचे दिए गए किसी एक विषय पर आप अपना निबंध हम तक पहुंचा सकते है. १.सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्द २.  मनोरंजन संस्कृति और साहित्य ३.खेल ४.स्वास्थ्य ५.आतंकवाद और निदान पुरूस्कार राशि  इस प्रतियोगिता के अंतर्गत कुल 5500 /-के पुरस्कार बांटे जायेंगे  यह पुरस्कार प्रत्येक विषय के आधार पर दिए जायेंगे मतलब हर विषय का एक विजेता होगा जिसे 1100 /-रुपए की नगद राशि से सम्मानित किया जायेगा. अगर आगे चलकर कोई और पुरूस्कार देन...

लो क सं घ र्ष !: अल्लाह के घर महफ़ूज़ नहीं हैं

महफ़ूज़ नहीं घर बन्दों के, अल्लाह के घर महफूज़ नहीं। इस आग और खून की होली में, अब कोई बशर महफ़ूज़ नहीं॥ शोलों की तपिश बढ़ते-बढ़ते, हर आँगन तक आ पहुंची है। अब फूल झुलसते जाते हैं, पेड़ों के शजर महफ़ूज़ नहीं॥ कल तक थी सुकूँ जिन शहरों में, वह मौत की दस्तक सुनते हैं । हर रोज धमाके होते हैं, अब कोई नगर महफ़ूज़ नहीं॥ दिन-रात भड़कती दोजख में, जिस्मों का ईधन पड़ता है॥ क्या जिक्र हो, आम इंसानों का, खुद फितना गर महफ़ूज़ नहीं॥ आबाद मकां इक लमहे में, वीरान खंडर बन जाते हैं। दीवारों-दर महफ़ूज़ नहीं, और जैद-ओ-बकर महफ़ूज़ नहीं॥ शमशान बने कूचे गलियां, हर सिम्त मची है आहो फुगाँ । फ़रियाद है माओं बहनों की, अब लख्ते-जिगर महफ़ूज़ नहीं ॥ इंसान को डर इंसानों से, इंसान नुमा हैवानों से। महफूज़ नहीं सर पर शिमले, शिमलों में सर महफूज़ नहीं॥ महंगा हो अगर आटा अर्शी, और खुदकश जैकेट सस्ती हो, फिर मौत का भंगड़ा होता है, फिर कोई बशर महफ़ूज़ नहीं॥ -इरशाद 'अर्शी' मलिक पकिस्तान के रावलपिंडी से प्रकाशित चहारसू ( मार्च - अप्रैल अंक 2010 ) से श्री गुलज़ार जावेद की अनुमति से उक्त कविता यहाँ प्रका...

एक घंटे बिजली बचाइए

बिजली की खपत को कम करके चढ़ते पारे को थामने के मकसद से 2007 में ऑस्ट्रेलिया के ‘द सिडनी हेराल्ड’ अखबार की पहल पर 22 लाख लोगों ने बिजली बंद रखी। अब यह ‘अर्थ ऑवर’ आंदोलन हो गया है। इस बार इस अभियान को 88 देशों के क़रीब एक अरब लोग अपना समर्थन देंगे। 'अर्थ आवर' हर साल मार्च महीने के आख़िरी शनिवार को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 31 मार्च 2007 को ऑस्ट्रेलिया में हुई थी। उस समय इसमें 35 देशों और क़रीब 20 लाख लोगों ने भाग लिया था। दुनियाभर में मनेगा अर्थ आवर और मोहाली में जलेंगी फ्लड लाइटें ....क्या IPL थमेगा अर्थ आवर के लिए? एक ओर दुनियाभर के लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयासों में जुटे हैं दूसरी ओर क्रिकेट जगत को सिर्फ धन कमाने से मतलब है। 27 मार्च को रात साढ़े आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक अर्थ आवर में दुनिया अंधेरे में डूबी होगी तब क्रिकेट सितारे दूधिया रोशनी में आईपीएल मैच खेल रहे होंगे। पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने वाले खिलाड़ी क्या अपना वादा निभा पाएंगे? शायद नहीं। जलवायु परिवर्तन 'अर्थ आवर' का आयोजन दुनिया भर में समस्या बन चुके जलवायु परिवर्तन पर विचार कर...

लो क सं घ र्ष !: गिरगिट हैं या भारतीय संघ के अधिकारी

बाबरी मस्जिद को तोड़ने के अपराधिक मामले में आई.पी.एस अधिकारी अंजू गुप्ता ने लाल कृष्ण अडवानी आदि अभियुक्तों के खिलाफ न्यायलय के समक्ष जोरदार तरीके से अभियोजन पक्ष की तरफ से गवाही दी। श्रीमती अंजू गुप्ता ने अपने बयानों में लाल कृष्ण अडवानी के जोशीले भाषण को बाबरी मस्जिद ध्वंश का भी एक कारण बताया है। इसके पूर्व 7 वर्ष पहले श्रीमती अंजू गुप्ता के बयान का आधार पर अभियुक्त तथा पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण अडवानी को विशेष न्यायलय ने आरोपों से उन्मोचित कर दिया था । इस तरह से अदालत गवाह अधिकारियों के गिरगिट की तरह रंग बदलने के खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं करती है । उस समय के कमिश्नर फैजाबाद जो घटना के लिए जिम्मेदार थे, एस.पी गौड़ वह आज भी भारतीय संघ में प्रतिनियुक्त पर तैनात हैं। इसके अतिरिक्त अन्य प्रमुख अधिकारी जो बाबरी मस्जिद ध्वंस के समय थे वे रिटायर हो चुके हैं या मर चुके है। सवाल इस बात का है कि क्या उस समय भारतीय संघ इतना कमजोर हो चुका था कि वह एक मस्जिद कि सुरक्षा नहीं कर पाया ? दूसरी तरफ नौकरशाही कि कोई जिम्मेदारी तय न होने के कारण वह गिरगिट कि तरह रंग बदलती रह...

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आदरणीय जैन ब्लोगर मित्रो ! सादर जय जिनेन्द्र ! मैंने लेखन का वह दोर भी देखा है तब कलम को स्याही के दवात में डुबोकर लेखक लिखता था, और उस दोर के पाठक  साहित्य को सफ़ेद या मटिया रंग से उस पर कवर चढाकर संजो के रखते थे और पढ़ते  थे. युग बदला... यंत्र बदले. लिखने और पढनेका का तरीका बदला. जैसे -जैसे नई-नई तकनीके, प्रोधोगिकी का विकास हो रहा है यंत्रो का विकास हो रहा है. कम्प्यूटर युग में हमारी लेखकी भी और पाठक भी यांत्रिक हो गए है. इसमे कोई विवाद नही है. बल्कि विकास के नये दरवाजे खुले है सहज शुलभता बढ़ी है. आजकल ई लेखन  की बड़ी धूम है. ना किताबे  खरीदने की चिंता ना उसके रखरखाव का बडन! इस कम्प्यूटर युग की क्रान्ति ने तो लेखन एवं लेखको का चेहरा ही बदल दिया है. मुझे लेखन का जो रूप सबसे अधिक पसंद आया वो है ब्लोगिग. ब्लोगिग एक उत्तम माध्यम बन पड़ा  है विचारों के सम्प्रेष्ण के लिए. बिना खर्चे के ही आप अपने विचारों को पाठको तक पहुचाने में सक्षम है. वो भी सचित्र! अति उत्तम ! ब्लोगिग का दुसरा स्वरूप भी मुझे व्यवहारिक जीवन के लिए उत्तम लगा. ब...

लो क सं घ र्ष !: उ0प्र0 सरकार का गुप्त हिन्दुत्व एजेन्डा

मुजफ्फरनगर जिले की खतोली तहसील में स्थित थाना मंसूरपुर के ग्राम पोर बालियान में एक मस्जिद को गिरा कर उस पर पुलिस चौकी स्थापित करने का मामला चर्चा में आया है। समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार को संज्ञान में लेते हुए उ0प्र0 अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष एस0एम0ए0 काजमी ने मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी से रिपोर्ट भी तलब कर ली है। पुलिस का कहना है कि उसने ग्राम पंचायत की भूमि पर नाजायज तौर पर बनी इमारत से उसे रिक्त कराया है। जबकि मुस्लिम पक्ष के अनुसार ग्राम पंचायत की भूमि का पट्टा एक मुसलमान शरीफ को हुआ था जिसके मरणोपरांत उसके लड़के ने इस पर मस्जिद दारूल उलूम देवबन्द से फतवा लेने के बाद बनवाई थी। यह बात बिल्कुल दुरूस्त है कि किसी विवादित भूमि पर मस्जिद नहीं बनवाई जा सकती है मस्जिद के लिए शरई हुक्म है कि वह भूमि हर विवाद से पाक-साफ हो और उसे ईश्वर के नाम पर वक्फ किया गया हो। मुजफ्फर नगर की मस्जिद यदि ग्राम समाज की भूमि पर धोखाधड़ी से बनवाई गई थी तो वह मस्जिद की ईमारत तो हो सकती है अल्लाह का इबादतगाह नहीं। मुजफ्फरनगर की तहसील खतोली के ग्राम पोर बालियान की यह मस्जिद जो उस क्षेत्र के ...