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लो क सं घ र्ष !: सत्यमेव जयते

एक अच्छी खबर देश के सभी राज्यों के सरकारी कार्यालयों को ‘सत्यमेव जयते’ का प्रयोग करने के निर्देश दिये गये हैं, इसीक्रम में उ0प्र0 सरकार ने इसके अनुपालन के निर्देश जारी किये। भौतिकता की बुराईयों से बचने के लिये हल निकालना ही चाहिये। पहले भी इस तरफ ध्यान दिया गया था, जब हर दफतर में गांधी जी की शांति स्थापना वाली मुद्रा की फोटो लगायी गई थी, उनके उठाये हुए हाथ की पांचो उंगुलियां सामने थीं। सभी जानते हैं कि पहले बाबू लोग (सभी नहीं) दो रूपया शर्माकर ले लेते थे, बाद में महंगाई आई तो मांग भी बढ़ी, शर्माते सकुचाते गांधी की तस्वीर का सहारा लेने लगे। सरकारें अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिये कुछ टोटके करती हैं। यूरोप में तो कुछ दूसरे ही उपाय किये जाते हैं, जब बुराई हद से आगे बढ़ जाती है तो कानून बनाकर उसे जायज करार दे देते हैं, यह देश, सभ्य देश है? अगर बुराई को समाप्त करने का दृढ़ संकल्प न हो तो विधि विधान या शासनादेशों से कुछ भी होने वाला नहीं है, इसे ‘फेस-सेविंग’ ही कहा जायेगा। आदर्श वादिता बड़ी अच्छी चीज है अगर यह अपने स्थान पर न रूक जाये, इसके आगे भी एक लम्बा सफर है। मनसा, वाधा कर्मणा तक जाते ह...

वह एक कवि है..

भावनाओ के धनी। बिचारो के बादशाह । इच्छाओं के काबू में करने वाला॥ दूर तक आत्मा की नज़रो से देखने वाला। अथाह सागर में गोता लगाता हुआ॥ जहा रवि (सूर्य) न पहुच सके वहा पहुचने वाला॥ अपनी लेखनी से मन को हर्षित कर देने वाला वह कोई और नहीं वह एक कवि है॥

बड़े देदर्द हो मिया॥

लड़की: बड़े देदर्द हो मिया॥ हमें फुद्दू बनाते हो॥ खुद छत पे आते हो॥ हमें आँखे दिखाते हो॥ सही है मै भी जाना अपना॥ प्यार की डोर जो बाँधी॥ मै बनू नैया तुम्हारी॥ तुम बनो हमारे मांझी॥ नैनो की ललक यारा॥ नाहक दिखाते हो॥ सोचो जो सही सोचो॥ तुम मेरे सतयुग के साथी॥ मै करू पूजा तुम्हारी॥ फिर बनू चरणों की दासी॥ हँसे गा देखकर मौसम॥ क्यों मेरा मन दुखाते हो॥

लडकिया जब दिल तोड़ती है॥

लडकिया जब दिल तोड़ती है॥ क्या अच्छा लगता है॥ रोता है दिल बेचारा॥ नाजुक बच्चा लगता है॥ बोलो क्या अच्छा लगता है,, खो जाती है सपने सहारे॥ कांटे चुभते राहो में॥ घट जाती है उम्र बेचारी॥ फरक पड़ता है बाहों पे॥ बेवफा का सहारा हमको॥ क्या सच्चा लगता है॥ मिल जाते है जब अकेले॥ काली रात भांदो में॥ तुम भी नशीली हो जाती हो॥ पेड़ोकी उस छाहो में॥ बेदर्दी तेरा स्वाद अब ॥ क्यों खट्टा लगता है॥

यास्मीन की कला में समाया कण्डोम

सतीश सिंह यास्मीन एक तो मुस्लिम औरत हैं ऊपर से बिहार जैसे परंपरागत राज्य के पिछड़े हुए गांव में रहती हैं. लेकिन यास्मीन जो काम कर रही है वह तथाकथित आधुनिक और सभ्य समाज की भी किसी महिला के लिए शायद ही संभव हो. अपने मधुबनी कला के जरिए सेक्स शिक्षा का संदेश दे रही है. उनकी ही तर्ज पर मधुबनी की कुछ और महिला कलाकार कला को नयी परिभाषा दे रही हैं. हमारे समाज में सेक्स को वर्जित माना जाता है और शारारिक जरुरतों की अवहेलना की जाती है। दरअसल जीवन को संपूर्णता में जीने की कोशिश कोई नहीं करना चाहता। यौन कार्यकलापों को अश्लीलता की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मूल कारण है हमारी सभ्यता और संस्कृति, जो हमें उन्मुक्त एवं स्वछंद होने से रोकती है। इस पूरे कवायद में हम इतने शालीन हो जाते हैं कि कंडोम और अन्यान्य जरुरी ऐतिहातों को बरतना ही भूल जाते हैं। आज सेक्स से जुड़ी समस्याओं पर बात करने के लिए कोई तैयार नहीं है। इस संबध में सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदम भी नाकाफी हैं। इसी अधूरे काम को करने का बीड़ा उठाया है बिहार की कुछ ग्रामीण महिला कलाकारों ने की जिसमें उत्तर बिहार की रहनेवाली यास्मीन भी शामिल ...

लो क सं घ र्ष !: वादा लपेट लो, जो लंगोटी नहीं तो क्या ?

अर्थ शास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग्राम की आवाजे आ रही हैं तथा युवाओं के हाथों में मोबाइल सेट हैं मेरे मन में इस प्रगति के प्रति कोई विरोध नहीं है, मानवता के आधार पर अमीर गरीब समान हैं, परन्तु आश्चर्य इस बात पर हुआ कि इन आदमियों में खेलने वाले बच्चे अधिकतर कुपोषित थे तथा कपड़े तक मयस्सर नहीं थें, शायद ये लोग ग्लैमरस जिन्दगी की चकाचौंध का शिकार हो गये, इनकी जेब कम्पनियों ने काट ली और ये प्राथमिकताएं तय करने में गलती कर बैठे। आवश्यकताओें में खाने का पहला नम्बर है, इनमें अनाज सब से मुख्य है। गरीब को रोटी चाहियें, परन्तु हमारी खाद्य नीति ने गरीब को भूखा मरने पर मजबूर कर दिया। लगता है हमारे केन्द्रीय खाद्य मंत्री शरद पवार के भी कुछ निहित स्वार्थ थे जिसके कारण उन्होंने आयात निर्यात का मकड़जाल फैलाकर कुछ बड़ों को शायद फायदा पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने अक्सर ऐसे विरोधाभासी बयान दिय...