भावनाओ के धनी। बिचारो के बादशाह । इच्छाओं के काबू में करने वाला॥ दूर तक आत्मा की नज़रो से देखने वाला। अथाह सागर में गोता लगाता हुआ॥ जहा रवि (सूर्य) न पहुच सके वहा पहुचने वाला॥ अपनी लेखनी से मन को हर्षित कर देने वाला वह कोई और नहीं वह एक कवि है॥
केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..
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--- संजय सेन सागर