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यहाँ तो चलेगी हमारी मर्जी

आज आपको जीवन के एक और अनुभव से परिचित कराती हूॅँ। जिसमें सरकारी दफ्तर के कर्मचारीयेां की कामचोरी साफ नजर आती है। जाने कितने सरकारी दफ्तर है। जहाँ पर काम करने की समय सीमा कर्मचारियों की मर्जी पर ही निर्भर करती है। काम के लिए निर्धारित समय सीमा कर्मचारियों के लिए कोई मायने नहीं रखती। बात कुछ दिन पहले कि है। घर पर कोई न होने के कारण बिजली का बिल जमा करने की जिम्मेदार मेरे सर थी। वही शिवरात्रि की छुट्टी पर अपने घर भिण्ड जाने का मन भी था। सो शनिवार को बिल जमा करने का मन बना लिया। अब मैने सबसे पहले बिल देखा जिस पर बिल जमा करने के लिए सुबह नौ बजे से शांम 4 बजे का समय दिया था। इसलिए जल्दी जल्दी सारे काम खत्म कर 2 बजे के करीब पास ही के सर्विस क्रमांक पर पहुँची। वहाँ पहुँची तो देखा कि बिल जमा करने वाली खिडकी बन्द हो चुकी अब मैने दोबारा बिल पर दिए समय को देखना उचित समझा कहीं मैने देखने मैने कोई गलती तो नहीं कर दी ...

नकली भड़ास के मुंह पर ''व्योम श्रीवास्तव'' का तमाचा

नकली भड़ास के कुछ लेखकों ने व्योम श्रीवास्तव जी पर कुछ निराधार आरोप लगाये थे की उन्होंने जो पोस्ट यहाँ पर डाली है उससे वर्किंग वूमन की चाबी ख़राब हुई है क्योंकि यह पोस्ट फर्जी सर्वे के आधार पर हुई थी! इसी आरोप के पीछा छुडाने के लिए आज व्योम जी ने मुझे फ़ोन किया की संजय जी भले ही आपने मेरी सदस्यता समाप्त कर दी है लेकिन अंतिम बार आप इसी पोस्ट को जरुर प्रकाशित कीजियेगा!उनकी इस इच्छा को आखिरी इच्छा मानते हुई हम उनकी पोस्ट को जैसा का तैसा प्रकाशित कर रहे है !मैंने तो पोस्ट प्रकाशित की थी सेक्सी कपड़े क्यों पहनती हैं महिलाएं.. एवं सेक्स करने से भी ज्यादा जरूरी काम क्या.. इन पोस्टों पर उन चोटी मानसिकता वाले लेखकों का कहना था की यह पोस्ट बिना किसी सर्वे की यहाँ प्रकाशित कर दी गई है जबकि यह रिपोर्ट देनिक भास्कर को लन्दन द्वारा प्राप्त सर्वों के आधार पर थी जिसका यहाँ http://www.bhaskar.com/2009/02/20/0902200010_sexi_clothes.html पूर्ण बर्णन है इसी प्रकार मेरी दूसरी पोस्ट भी भास्कर की रिपोर्ट पर ही आधारित थी जिसे यहाँ देखा जा सकता है http://www.bhaskar.com/2009/02/19/0902190010_sex_life.html अ...

एक से अधिक पति रखना क्यूँ मना है?

पिछले सन्डे मैं अपने एक रिश्तेदार के घर गया था, बात चल रही थी इस्लाम में मर्दों को बड़ी छुट मिली है और औरतों पर बड़ा ज़ुल्म होता है वगैरह वगैरह .... मैंने उनसे कहा भाई, आप एक मुसलमान होकर ऐसी बात कर रहें है? उन्होंने कहा "जो सच है, वो सच है|" मैंने कहा "नहीं भाई, सच ये नहीं है, आपको कम-अज़-कम पूरी बात जान लेना चाहिए तब ही इल्ज़ाम लगाना चाहिए, इस्लाम तो पूरी दुनिया के लिए मुक्ति का पैगाम और समाज के लिए सही ढंग से जीने का तरीका ही बताता है" उन्हें तैश आ गया और उन्होंने कहा "सलीम, तुम बहुत ज़्यादा जानकार समझते हो, एक बात बताओ अगर इस्लाम में एक मर्द को एक से अधिक बीवी रखने की इजाज़त है तो इसकी क्या वजह है कि इस्लाम औरत को एक से ज़्यादा शौहर (पति) रखने कि इजाज़त नहीं देता है? उस वक़्त जो मैंने उन्हें बताया और उसके बाद इस बाबत कुछ किताबों का मुताला भी किया, का सारांश यहाँ पर पोस्ट कर रहा हूँ|   इंशा अल्लाह मेरे उन रिश्तेदार की तरह आपको भी मुतमईन कर सकूँगा, इस आशा के साथ प्रस्तुत है कुछ तर्क और सत्य तथा इस्लामिक नियम | आप लोगो में से कुछ लोग, जिनमे मेरे उन रिश्ते...

ख्वाब को ख्वाब ही बना रहने दो.....

ख्वाब को ख्वाब ही बना रहने दो..... ख्वाब कोई आग ना बन जाए कहीं !! आग के जलते ही तुम बुझा दो इसे सब कुछ ही ख़ाक ना हो जाए कहीं !! अपने मन को कहीं संभाल कर रख तेरे दामन में दाग ना हो जाए कहीं !! तेरी जानिब इसलिए मैं नहीं आता !! मेरी नज़रें तुझमें ही खो जाए ना कहीं !! खामोशी से इक ग़ज़ल कह गया"गाफिल" इसके मतलब कुछ और हो जाए ना कहीं !!

व्योम श्रीवास्तव की सदयस्ता समाप्त कर दी गयी है

व्योम जी हिन्दुस्तान का दर्द ब्लॉग मे एक अच्छे लेखक की हैसियत से जाने जाते है लेकिन आजकल उन्होंने जिस तरह की पोस्ट ब्लॉग पर पोस्ट की बह हमारा मकसद नहीं थी सो उनकी सदस्यता समाप्त की जाती है,ऐसा न हीं है की यह अचानक किया जा रहा है बल्कि पहले भी उन्हें खुद को बदलने का समय दिया गया था ,लेकिन वो अपने फैसले पर अडिग थे !उनके इस रवैये को आप चंद घंटों पहले की गयी पोस्ट पर समझ सकते है , उनकी इस बजह से ''हिन्दुस्तान का दर्द'' ब्लॉग के अच्छे १५ लेखक इस ब्लॉग को छोड़ चुके है बजह बस इतनी थी की बह भी यहाँ मेरी तरह अश्लीलता नहीं चाहते थे !खैर जो हुआ सो ठीक हुआ ! मैं सबको बताना चाहता हूँ की व्योम जी शायद भोपाल के ऍम पी नगर मे रहते है और उनका मोबाइल नंबर है ०९६१७३३९३११ .... उनका मोबाइल नंबर यहाँ प्रकाशित करने की बजह है की कुछ लोग व्योम और संजय को एक ही व्यक्ति समझते थे जो गलत थे !व्योम जी को भगवान् सद्बुद्धि दे हम सब यही दुआ करते है !मैं चाहता हूँ की आप सभी मिलकर एक अच्छे समाज की नींव रखें जिसमे मुझे भी सहयोग करने का अवसर मिले हमारा लक्ष्य अश्लीलता या गाली गलोच नहीं है ! संजय सेन सागर ...

सेक्सी कपड़े क्यों पहनती हैं महिलाएं..

एक सर्वे के मुताबिक अधिकतर महिलाओं के सेक्सी, तंग या पारदर्शक कपड़े पहनने के पीछे उनके दिल में एक तमन्ना रहती है, वह है अपने करीबियों को अपनी तरफ ज्यादा से ज्यादा खींचना। जी हां सेक्सी कपड़े पहनने के पीछे महिलाओं का मुख्य उद्देश्य ज्यादातर ऑफिस में बॉस के दिल में अपने लिए ज्यादा जगह बनाना होता है। 27 फीसदी महिलाओं ने स्वीकार किया कि प्रमोशन या अधिक बोनस मिलने की इच्छा और बॉस को खुश करने के लिए कम और ज्यादा आकर्षण वाले कपड़े पहनना पड़ता है। इनमें 20 में से 1 महिला तो सेक्सी कपड़े पहनकर नियमति ऑफिस आती हैं और सबकी आंखों में दिनभर आकर्षण का केन्द्र बनी रहती है। सर्वे में भाग लेने वाली लगभग 3 हजार में से 78 फीसदी महिलाओं का मानना है कि सेक्सी वस्त्रों का असर प्रतिदिन के काम-काज पर गहरी छाप छोड़ता है। जबकि 54 फीसदी महिलाओं का मानना है कि इस प्रकार के कपड़ो के पहनने से ऑफिस में काम अच्छे तरीके से संम्पन्न हो जाता है। इस सर्वे को करने वाली वेबसाइट की फैशन फोरम की प्रवक्ता ने बताया कि आपके ज्यादा आकर्षित और पारदर्शी कपड़े पर आपकी सफलता का केन्द्रबिंदु निश्चित हो जाता है। जबकि 61 फीसदी महिलाओं...

जय हो !

आज ऐ आर रहमान को अपने देश का नाम इस तरह से रौशन करते देख उनके बारे में कुछ लिखने का मन हुआ| मैंने कुछ समय पहले इस्लामिक वेबदुनिया नामक ब्लॉग पर उनके बारे में एक लेख पढ़ा था सो सोचा क्यूँ न उसे ही प्रकाशित कर दिया जाए | पेश है वो आलेख: हम ईश्वर की शरण में आना चाहते थे  इस्लाम कबूल करने का फैसला अचानक नहीं लिया गया बल्कि इसमें हमें दस साल लगे। यह फैसला मेरा और मेरी मां दोनों का सामूहिक फैसला था। हम दोनों सर्वशक्तिमान ईश्वर की शरण में आना चाहते थे।  संगीतकार ए आर रहमान ने सन् २००६ में अपनी मां के साथ हज अदा किया था। हज पर गए रहमान से अरब न्यूज के सैयद फैसल अली ने बातचीत की। यहां पेश है उस वक्त सैयद फैसल अली की रहमान से हुई गुफ्तगू।  भारत के मशहूर संगीतकार ए आर रहमान किसी परिचय के मोहताज नहीं है। तड़क-भड़क और शोहरत की चकाचौंध से दूर रहने वाले ए आर रहमान की जिंदगी ने एक नई करवट ली जब वे इस्लाम की आगोश में आए। रहमान कहते हैं-इस्लाम कबूल करने पर जिंदगी के प्रति मेरा नजरिया बदल गया। भारतीय फिल्मी-दुनिया में लोग कामयाबी के लिए मुस्लिम होते हुए हिन्दू नाम रख लेते हैं,लेकिन मेरे मामले में इसका उ...