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उमा की नौटंकी वाली राजनीति का अंत

यही कुछ पांच साल पहेले की बात है तब भाजपा की राजनीति मे एक साध्वी का सिक्का चलता था ,जिनका नाम श्री उमा भारती है! जिनके नाम से लाखों जनता अपना काम धाम छोड़कर आ जाती थी !! लेकिन यह उमा की ग़लतफ़हमी थी बह जनता उमा के लिए न होकर भाजपा के लिए हुआ करती थी ,इसी ग़लतफ़हमी के नशे मे चूर उमा ने भाजपा के लाल कृष्ण आडवानी जी का अपमान कर डाला और खुद को उनसे बड़ा बात दिया जिसके कारण उन्हें पार्टी से बेदखल कर दिया गया !!उमा नादाँ है वो समझती थी की भाजपा उनसे है इसलिए उन्होंने अपनी नयी पार्टी खड़ी कर दी !! उन्हें लगता था की उनकी पार्टी का नगाडा बजेगा लेकिन नगाडा तो नहीं बजा उनकी बैंड जरुर बज गयी ! इस बार फिर अच्छाई की जीत हुई जनता की जीत हुई जनता जो चाहती थी बही हुआ !!उमा भारती की राजनीति का भविष्य कुछ नहीं है तब तक तो और भी नहीं जब तक की बही बह दूसरों को समझना और सम्मान देना नहीं सीख जाती ! उनकी जनशक्ति पार्टी की हालत ये हो गयी की उस मुहफट ढोंगी नारी को जनता ने ठुकरा दिया उसे अर्श से फर्स पर पटक दिया जनता ने बात दिया की जो किसी और को नहीं समझता उसे भी कोई नहीं समझता !!खुद को साध्वी कहने वाली उमा के...

मप्र : शिवराज के राज को जनता ने दिया समर्थन

मप्र : शिवराज के राज को जनता ने दिया समर्थन मध्यप्रदेश से आ रहे शुरुआती रुझानों में यह साफ हो गया है कि भाजपा एक बार फिर सत्ता में वापसी कर रही है और शिवराज सिंह के शासन को जनता ने अपना पूरा समर्थन दिया है। मध्यप्रदेश चुनाव 2008 में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अभी तक 32 सीटें जीत ली है तथा १क्२ सीटों पर बढ़त बना ली है। इस तरह से शिवराज के शासन को मध्यप्रदेश की जनता ने पसंद किया है और एक बड़ी जीत की तरफ भाजपा बढ़ रही है। मप्र विधानसभा चुनाव 2008 : ताजा स्थिति कांग्रेस : 8 सीटें जीती , 53 सीटों पर बढ़त भाजपा : 32सीटें जीती 102 सीटों पर बढ़त अन्य : 4 जीते 25सीटों पर बढ़त इसलिए दिया जनता ने शिवराज को दोबारा मौका >> शिवराज सिंह चौहान के बेहतरीन शासन की सबसे बड़ी भूमिका, विकास कार्यों ने जनता का दिल जीता । >> गुजरात की तर्ज पर विधायकों का टिकट काटना भाजपा के लिए जीत का सबसे बड़ा कारण बना। क्यों हारी कांग्रेस... >> कांग्रेस में बढ़ती गुटबाजी। >> सिंधिया, कमलनाथ , सुरेश पचौरी, और दिग्गी राजा ने परदे के पीछे गुटबाजी पार्टी को ले डूबी।

देश की पहली पसंद सोनिया

देश की पहली पसंद सोनिया देश के 23 फीसदी लोग मानते हैं कि सोनिया गांधी इस मौके पर भारत का नेतृत्व करने के लिहाज से सबसे योग्य राजनेता हैं। सोनिया के बाद दूसरे पायदान पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, तीसरे पर लालकृष्ण आडवाणी और चौथे स्थान पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। इन तीनों को क्रमश: 22 , 19 और 14 फीसदी वोट मिले हैं।

'वे' सफल क्यों हुए

मुंबई, लक्षद्वीप, पोरबंदर और कोंकण के तटों पर पिछले दो दशकों से सिर्फ और सिर्फ डी कंपनी का कब्जा है. 1993 में दुनिया में पहली बार श्रृंखलाबद्ध विस्फोट मुंबई में हुए थे. इन विस्फोटो में दाऊद की क्या भूमिका थी? आरडीएक्स पाकिस्तानी सेना ने दिया था, ट्रेनिंग पाकिस्तानी सेना ने दिया था. डी कंपनी ने लाजिस्टिक का सपोर्ट दिया था. प्रशिक्षण के लिए टिकट और वीजा उपलब्ध कराना तथा आरडीएक्स और एक-56 जैसी राईफलें को मुंबई तक लाने का काम भी डी कंपनी ने किया था. वे सफल क्यों हुए? क्योंकि जिस दाऊद फड़सें उर्फ टकल्या और टाईगर मेनन का नेटवर्क इस्तेमाल में लाया गया था वह नेटवर्क सालों से इस रूट से स्मगलिंग करता था. हर विभाग को उनका नियमित हफ्ता जाता था. नेवी, कोस्टगार्ड, मरीन प्रिवेन्टिव और कस्टम में से किसी को उनका कंसाइनमेन्ट खोलकर देखने की जरूरत महसूस नहीं हुई. वैसे भी इस तरह के स्मगरलों की पहुंच वित्त मंत्रालय तक होती है और सुरक्षा बलों के पास इस तरह के हथियार और उपकरण नहीं होते हैं कि वे इनसे मुकाबला कर सकें. लड़ेंगे तो या तो मरेंगे या फिर वहां से हटाकर कहीं दूर फेंक दिये जाएंगे. लेकिन यदि वे स्मगलरों...

अख़बारों की दुनिया

पाक मीडिया का पलटवारः हिन्दुओं ने कराया मुंबई पर हमला

27 नवंबर की सुबह अखबारों में एक फोटो छपी थी जो अजमल आमिर कसाव की थी. कसाब जिस हाथ में एक-47 लेकर आगे बढ़ रहा था उस हाथ में रक्षा सूत्र बंधा हुआ था. वही रक्षासूत्र जो आमतौर हिन्दू तीर्थों में भक्तों के हाथ में बांध दिया जाता है. हो सकता है उस दिन यह बात किसी ने नोटिस नहीं की लेकिन पाकिस्तान मीडिया ने पलटवार करने के लिए उसी तर्क को सामने रख दिया है. दो दिन पहले टाईम्स आफ इंडिया के टीवी चैनल टाईम्स नाऊ से बात करते हुए जीओ टीवी के मुखिया हामिद मीर ने कहा कि आप पाकिस्तान पर आरोप कैसे लगा सकते हैं. और अगर भारत पाकिस्तान पर आरोप लगाता है तो उसकी विश्वसनीयता क्या होगी? थोड़े समय पहले समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट के लिए पाकिस्तान के लोगों को जिम्मेदारा ठहराया गया था लेकिन अब आप ही कह रहे हैं कि आपकी सेना के एक कर्नल ने इसे अंजाम दिया." टाईम्स नाऊ के तेज-तर्रार संपादक अर्णव गोस्वामी के पास कोई जवाब नहीं था. उनके साथ बैठी एंकर ने बात पलट दी. पाकिस्तान प्रायोजित इस आतंकी हमले को लेकर भारतीय मीडिया ने जिस तरह की नादानी दिखाई है उसका नतीजा है कि खुल्लम-खुल्ला हर सबूत होने के बाद भी भारत को...

सबको पता था कि हमला होगा

मुंबई में आतंकी हमले की पूर्व आशंका नहीं बल्कि जानकारी थी. हम यहां ऐसे कुछ बयान दे रहे हैं जो हमारे देश के महत्वपूर्ण मंत्रालयों का जिम्मा संभालने वाले मंत्रियों ने समय-समय पर दिये थे. इन बयानों से साफ है कि मुंबई पर बड़े आतंकी हमले की जानकारी सबको थी. इतनी सटीक जानकारी होने के बावजूद हमारे प्रशासन ने कार्यवाही क्यों नहीं की? आतंकवाद की बलिवेदी पर बकरों की कुर्बानी शुरू हो गयी है. यूपीए की गॉडमदर को पहली भेंट गृहराज्यमंत्री शिवराज पाटिल के राजनीतिक वध से दी गयी. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के भी विकेट उखड़ गये हैं. सुनाई दे रहा है कि गॉडमदर के सामने मनमोहन सिंह, प्रणव मुखर्जी और रक्षामंत्री ए के एंटनी ने भी अपनी कुर्बानी देने का प्रस्ताव रखा था. जो भी हो रहा है उसमें एक सवाल हम लोगों के लिए उभरता है कि इस गलाकाट प्रतियोगिता से हासिल क्या होगा? शिवराज पाटिल की बजाय चिदंबरम गृहमंत्री हो गये तो क्या अब इस देश पर आतंकी हमले नहीं होंगे? क्या हम मान लें कि अब हमारे सुरक्षा तंत्र और खुफिया तंत्र के बीच बेहतर तालमेल हो जाएगा? सबसे पहले देश के सुरक्षा सलाहकार को ही देखते हैं. इं...