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एक बार तो पुचकार लो..

आँख से आंसू निकलते आके इसको थाम लो॥ य तो अपने पास बुला लो य तो मुझको मार दो॥ सहन होती नहीं बिरह के आग में जल रही हूँ॥ सब्र अब टूट चुका है बिन तेरे तड़पती हूँ॥ अब आके मेरा हाथ थामो बंधन में मुझको बाँध दो॥ शाम होते ही मातम जवानी पे छा जाता है॥ सावन का सौभाग्य पास अपने बुलाता है॥ मै डूबती हूँ अधर में हे यार मुझे उबार लो॥ मैंने सजाया था जो सपना उसे टूटने मत देना॥ अपने दिल के कोने में हमें ही बसा लेना॥ दिल से जब दिल मिले बस एक बार पुचकार दो॥

दो गज कफ़न ,,,,,,,,दो गज कफ़न .......

दो गज कफ़न से मेरी अर्थी सजाओगे॥ मुझको पता है याद तुम बहुत ही आओगे॥ हम हंस के जा रहे है तुम रो के विदा मत करना॥ मेरे चिता में आग तुम ही लगाओ गे॥ यही दुआ करेगे हम तुम नाम करके आना॥ पूछू गा प्रश्न मै तुम उत्तर हमें बताना॥ मेरी सतह से उंच तुम मंजिल बनाओगे॥ अद्भुत बना के रखना अपने नियम कायदे॥ किसी से गलत कभी लेना नहीं फायदे॥ मेरे सखा के फूल तुम गम गमाओ गे॥ कभी किसी से वैर विरोध नहीं करना॥ सच्ची डगर पे सदा ही चलते रहना॥ एकदिन गगन में तारे बन तुम ॥ टिम टिमाओगे॥

हिन्दुस्तान का दर्द पर छापा गया चोरी का लेख हटा,सभी लेखकों को चेतावनी ऐसा ना करें..

००७ के नाम से लिखने वाले लेखक शम्भुनाथ जी जो की ''हिन्दुस्तान का दर्द''के भी सदस्य है,उन्होंने एक लेख कवि ओम व्यास ओम का निधनहिन्दुस्तान का दर्द पर प्रकाशित किया था जो की असल मे वेबदुनिया की लेखिका गायत्री शर्मा ने वेबदुनिया के लिए ही लिखा था. यह रहा चोरी का लेख यह लेख सम्भूनाथ जी ने वेबदुनिया की बिना आज्ञा के यहाँ प्रकाशित किया था यह जानकारी अभी कुछ देर पहले ही मुझे वेबदुनिया के एक पदाधिकारी ने दी ,जिसकी बजह से मुझे ओर वेबदुनिया के सदस्यों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा~ हम इस लेख को हिन्दुस्तान का दर्द से हटा रहे है और संभुनाथ जी को भविष्य मे ऐसा ना करने की चेतावनी देते है.. यह रहा असली लेख http://hindi.webdunia.com/miscellaneous/literature/sansmatan/0907/08/1090708051_1.htm इस तरह से किसी और का लेख अपने नाम से प्रकाशित करना एक अपराध है और सभी लेखकों से आग्रह है की किसी लेख का अगर आप उपयोग करते है तो उसके मौलिक लेखक एवं स्त्रोत को जरुर प्रकाशित करें ! संजय सेन सागर संपादक- हिन्दुस्तान का दर्द आगे पढ़ें के आगे यहाँ