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सत्य ही कहा गया क़ानून अँधा होता है

सच ही कहा गया है कानून की आँखें नहीं होती सिर्फ और सिर्फ अंधा है बिलकुल सत्य वचन है जिससे हम सभी अच्छी तरह से वाकिफ है आज कनून नाम मात्र है हर तरफ झूट और भ्रष्टाचार का बोलबाला है सच्चे मुजरिम को रिहा कर दिया जा रहा और मासूम बेगुनाहों जेल की चार दीवारी में कैद किया जा रहा है.....गुंडे आराम की ज़िन्दगी व्यतीत कर रहे है और शरीफ हवालात की हवा खा रहे है , सत्य है की एक देश की हिफाज़त कानून के रखवाले करते है लेकिन यह भी सत्य है कानून की धज्जियाँ उडाने में बस और बस इन्ही अफसरानों का बड़ा हाथ है आज देश के कानून पर किसी भी इंसान को भरोसा नहीं है बस जनता इनके भय से अपने सम्मान को बचा कर ज़िन्दगी के दिन को काट रहे है ऐसा इसलिए की हम मासूम ही इनके शिकार बन जाते है जब कोई बड़ा हादसा या वाक्य पेश आता है सच्चे मुजरिम न कभी पकडे जाते है और न कभी कनून का हाथ उनके गिरेबानो तक पहुंचा वोह इसलिए की वोह कनून को अपने पैरो टेल और जेब में रखते है यह गुंडे और बदमाश जब कनून तोड़ते है तो उन्हें सम्मानित किया जाता है और मासूम बेगुनाह को फांसी और उम्र कैद की सजा झेलनी पड़ती है एक बार वाक्य हम आपको सुनाते है ........पत्रकारों की एक टीम जेल का दौरा कर रही थी काल कोठरी में एक साहब भी बंद थे जो शक्ल से खासे शरीफ और गरीब दिखाई दे रहे थे एक पत्रकार ने उनके बारे में जेलर से पुछा इन साहब क्या जुर्म किया है ??उन्होंने कोई जुर्म नहीं किया ' जेलर ने बताया , उन्होंने मशहूर डाकू को कत्ल करते देखा था यह उसके कत्ल के इकलौते चश्मदीद गवाह है उन्हें हिफाज़त के ख्याल से जेल में रखा जा रहा है .........और डाकू कहा है दुसरे पत्रकार ने तलब किया वो ज़मानत पर रिहा हो चूका है जेलर ने इत्मीनान से जवाब दिया...देखा आपने असलियत हमारे कनून की सच्चा मुजरिम बहार सुकून की ज़िन्दगी गुजार रहा है और गरीब बेचारा जिसका कुसूर सिर्फ कत्ल को देखा था काल कोठरी में घुटन भरी ज़िन्दगी जीने को मजबूर है ........मेरा कहने का मतलब साफ़ है अगर कनून के लोग ही कनून की धज्जियाँ उडाये गे तो देश के हित के जो अमन और अमान को जो कायम रखना है कैसे कायम रख पायेगे और कैसे देश की सभी जनता को कनून पर अटूट विश्वाश हम लाने में कामयाब होंगे .........देश को मज़बूत और ताकतवर बनाने के लिए कनून को भ्रष्टाचार को ख़त्म करना होगा कनून सबके लिए एक है समानता को बरकरार रखना होगा ताकि हमारा अटूट विश्वाश देश के कनून पर से न उठे......

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--- संजय सेन सागर

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