Skip to main content

दो दुम का दोहा: आचार्य संजीव 'सलिल'

प्रजातंत्र में प्रजा के, मन में भारी पीर।

अपराधी नेता बनें, स्थिति है गंभीर॥

न इनको बख्शा जाए।

कोई औकात दिखाए॥

*********

Comments

  1. भारतीय संबिधान में छेद हो चुके है और उन छेदों को जब भरा जाएँ तो ऐसी प्रथा ऐसा कानून बनाया जाना चहिये की आरोपी और असिक्षित चुनाव न लढ सके !

    ReplyDelete
  2. भारतीय संबिधान में छेद हो चुके है और उन छेदों को जब भरा जाएँ तो ऐसी प्रथा ऐसा कानून बनाया जाना चहिये की आरोपी और असिक्षित चुनाव न लढ सके !

    ReplyDelete

Post a Comment

आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर