दो दुम का दोहा: आचार्य संजीव 'सलिल' By Divya Narmada April 22, 2009 प्रजातंत्र में प्रजा के, मन में भारी पीर।अपराधी नेता बनें, स्थिति है गंभीर॥न इनको बख्शा जाए। कोई औकात दिखाए॥ ********* Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Labels अपराधी दोहा नेता प्रजातंत्र Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments News4NationApril 22, 2009 at 11:38 AMभारतीय संबिधान में छेद हो चुके है और उन छेदों को जब भरा जाएँ तो ऐसी प्रथा ऐसा कानून बनाया जाना चहिये की आरोपी और असिक्षित चुनाव न लढ सके !ReplyDeleteRepliesReplyNews4NationApril 22, 2009 at 11:38 AMभारतीय संबिधान में छेद हो चुके है और उन छेदों को जब भरा जाएँ तो ऐसी प्रथा ऐसा कानून बनाया जाना चहिये की आरोपी और असिक्षित चुनाव न लढ सके !ReplyDeleteRepliesReplyAdd commentLoad more... Post a Comment आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!! --- संजय सेन सागर
भारतीय संबिधान में छेद हो चुके है और उन छेदों को जब भरा जाएँ तो ऐसी प्रथा ऐसा कानून बनाया जाना चहिये की आरोपी और असिक्षित चुनाव न लढ सके !
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