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चेतन आनंद (कवि-पत्रकार)

शिक्षक दिवस पर विशेष ********************** “गुरु वह दीपक है जो स्वयं जलकर  औरों के जीवन को रोशन करता है।” ******************************************* डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की  जयंती पर शिक्षक दिवस ************************************* हर वर्ष 5 सितम्बर को भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन शिक्षा, संस्कार और मार्गदर्शन के महत्त्व को याद करने तथा अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। यह दिन हमारे पूर्व राष्ट्रपति, प्रख्यात दार्शनिक और महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को समर्पित है। उन्होंने शिक्षा को मानव जीवन की आत्मा बताया था। शिक्षक: समाज निर्माण के आधार ****************************** शिक्षक केवल पाठ्यक्रम की पढ़ाई कराने वाले नहीं होते, बल्कि वे समाज का भविष्य गढ़ने वाले शिल्पकार होते हैं। वे बच्चों को अनुशासन, मूल्य और संस्कार सिखाते हैं। शिक्षक ही वह व्यक्ति है जो विद्यार्थी की जिज्ञासा को सही दिशा देता है और उसे आत्मविश्वास से परिपूर्ण करता है। तकनीकी युग में भी अविस्मरणीय भूमिका ************************************** आज जब डिजिट...

सितंबर ४, बाल कविता, तुहिना-दादी, मुक्तिका, सॉनेट, नर्मदा, दोहा,

सलिल सृजन सितंबर ४ विश्व ताइक्वांडो दिवस * सलिल दोहावली शील न रोने में तनिक, शील धरे मन धैर्य। शुभ के प्रति आश्वस्त हो, करें अशुभ से वैर्य।। • गत की कम चर्चा करें, आगत की हो फिक्र। जो मन में हरदम रहे, वह न चाहता जिक्र।। • मैं तुम हम होकर करें, चुप हो उसकी याद। जिसकी सुधियों को रखा, निशि-वासर आबाद।। • बीता समय न लौटता, यही सृष्टि का सत्य। प्रभु दर्शन देते नहीं, भक्त सुमिरते नित्य।। • नए दिवस का अवतरण, अर्ध रात्रि के बाद। उषा भोर होती प्रगट, लेकर शुभ संवाद।। • सरला मति होती भ्रमित, सच लगता संसार। कहते हैं मतिमान सब, है संसार असार।। • सुख का नित सुमिरन करें, सके न दुख तब व्याप। दुख की माला फेरकर, सुख खोते हम आप।। • सुख के पल जितने मिले, वे प्रभु कृपा प्रसाद। कृष्ण कांत संतोष दें, बिसरे कभी न याद।। • सदानंद थाती मिली, रूप पर्व-त्यौहार। नव पीढ़ी को साथ ले, मना लुटाएँ प्यार।। • श्वास श्वास सिंगार कर, आस आस मनुहार हास बना पाथेय लें, उन्नत रखें लिलार।। • बसा आत्म परमात्म जो, वह सर्वथा सुशील। लीन आप में आप है, जला याद कंदील।। • अश्रु पात कर मत करें, ईश्वर का अपमान। होनी को स्वीकार कर, रखें दैव ...

प्रसंग चित्रण, चित्र पर कविता

प्रसंग चित्रण प्रसंग है एक नवयुवती छज्जे पर क्रोधित मुख मुद्रा में है जैसे वह छत से कूदकर आत्महत्या करने वाली है। विभिन्न कवियों से अगर इस पर लिखने को कहा जाता तो वो कैसे लिखते ? ० मैथिली शरण गुप्त अट्टालिका पर एक रमणी अनमनी सी है अहो किस वेदना के भार से संतप्त हो देवी कहो? धीरज धरो संसार में, किसके नही दुर्दिन फिरे हे राम! रक्षा कीजिए, अबला न भूतल पर गिरे। ___________________________________ रामधारी सिंह दिनकर दग्ध ह्रदय में धधक रही, उत्तप्त प्रेम की ज्वाला, हिमगिरी के उत्स निचोड़, फोड़ पाताल, बनो विकराला, ले ध्वन्सों के निर्माण त्राण से, गोद भरो पृथ्वी की, छत पर से मत गिरो, गिरो अम्बर से वज्र सरीखी. __________________________________ श्याम नारायण पांडे ओ घमंड मंडिनी, अखंड खंड मंडिनी वीरता विमंडिनी, प्रचंड चंड चंडिनी सिंहनी की ठान से, आन बान शान से मान से, गुमान से, तुम गिरो मकान से तुम डगर डगर गिरो, तुम नगर नगर गिरो तुम गिरो अगर गिरो, शत्रु पर मगर गिरो। __________________________________ गोपाल दास सक्सेना 'नीरज' रूपसी उदास न हो, आज मुस्कुराती जा मौत में भी जिन्दगी, के फूल...