एक अदहन हमारे अन्दर: . : एक अदहन हमारे अन्दर/ कविता संग्रह/ अभिज्ञात/ प्रकाशक-नाद प्रकाशन, 2 महात्मा गांधी रोड, टीटागढ़, कोलकाता-700119/1990/ मूल्य-22 रुपये EK A... सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ
सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ कुछ दिनों से मुझको भी || यारो कुछ कुछ होने लगा || दिल मेरा भी खोने लगा || अपने दफ्तर की टेबल पर || मै भी अब तो सोने लगा || दिल मेरा भी खोने लगा || रात हसीना एक आती है || सपनो में हमें जगाती है || हाथ पकड़ कर मेरा ओ || अपने साथ उड़ाती है || इश्क के चक्कर में पड़ कर मै || प्रेम बीज को बोने लगा || दिल मेरा भी खोने लगा || अभी गाल में पड़े निशान है || उसने हंस के काटा था || मेरी भी चीख निकल गयी थी || कुछ करने के लिए आमादा था || प्रेम बाग़ में दोनों नाचे थे || उसके बिन अब रोने लगा || दिल मेरा भी खोने लगा ||