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आपके सहयोग से मेरी पोस्टें हुई दो हजार पार ...... Saturday, January 29, 2011 मेरे दोस्तों मेरे भाइयों मेरे ब्लोगर्स परिवार के लोगों आज में अपनी पोस्टों की गिनती करने लगा तो पता चला इनकी संख्या दो हजार के पार हो गयी हे । दोस्तों मार्च २०१० से शुरू मेरा यह सफर आज ३० दिसम्बर शहीद दिवस पर २००० पोस्टें पार कर जाएगा यह मेने सोचा भी नही था लेकिन लिखने का एक जूनून था और में बिना किसी टिप्पणी के इन्तिज़ार में लिखे जा रहा था लिखे जा रहा था कई बार मुझे वक्त ने , मजबूरी ने ,टिप्पणी चाहने के लालच ने इंटरनेट की तकनीकी खराबी ने ब्लोगिंग टिप्स की जानकारी के अभाव ने मुझे इस अभियान से रोकने की कोशिश के दोस्तों में ठिठका तो सही टिप्पणी के लालच में भटका तो सही लेकिन फिर अपने लक्ष्य के लियें अपने कम को आगे बढाने के लियें डट गया और काम शुरू कर दिया मुझे मेरे एक ब्लोगर मित्र ने फॉर कर बधाई दी के भाई अब तो बस करो तुम ब्लोगिंग की दुनिया में सबसे तेज़ लिखने वाले और अल्प समय मार्च २०१० से केवल नो माह में २००० पोस्टों से अधिक लिखने वाले पहले ब्लोगर बन गये हो मुझे यकीन नहीं आया मेने अपनी पोस्टें गिनी तो स...

बुरा मत कहो बुरा मत सुनो बुरा मत देखो

                           " आज महान दुखद: घटना घटी है उसे आप सुन चुके हैं ! यह घटना हमारे इतिहास मैं अभूतपूर्व है ! महात्मा गाँधी अपनी प्रार्थना सभा मै जा रहें थे जबकि एक उन्मत्त व्यक्ति ने उन पर तीन गोलियां चलाई ! ये गोलियां गाँधी के हृदय के पार जा चुकी !"                            ये शब्द हमारे देश के प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने जनता के सामने तब कहे जब गाँधी जी के सीने मै नत्थू  राम गोडसे ........ तीन गोलियां उतार चुका था जिससे गाँधी जी की जान जा चुकी थी ! इस बात को हुए 63 साल हो चुके हैं ! आज ही के दिन 30 जनवरी 1948 का ही वो काला दिन था जब गाँधी जी प्रार्थना सभा मै जाने की तैयारी कर रहें थे वो ठीक  5 बजे प्रार्थना सभा मै पहुँच जाते थे पर उस दिन बल्लभ भाई  पटेल के साथ गुफ्तगू की वजह से उन्हें 15 मिनट की देर हो गई और वो 10 बजकर 15 मिनट पर वहां पहुंचे ! प्रार्थना सभा मै लोग बड़ी बेसब्री से उनकी...

सफ़र

घर से चले थे घर का पता साथ लेके हम ! चल पड़े थे काफिले संग  दूर तलख हम ! मिलते भी रहें राही बदल बदल के राह मै , रुकते भी गये अपने काफिले के संग हम ! अपनी अपनी मंजिल पर मुसाफिर ठहर गये , और दूर तलख सब किनारों मै खो गये ! मंजिल पर अब अकेले से हो गये थे हम ! राहें थी अलग -अलग कहीं खो गये थे हम ! फिर हाथ पकड़ कर किसी ने थाम तो लिया , पता तो था अलग सा पर आराम सा लगा ! अब दिल की खवाइशों को सुकूं सा मिला  ! जैसे  किसी नदी को सागर का पता मिला ! अब अपनी राह पर फिर चल पड़े हैं  हम ! अब तो सफ़र तन्हां ही तय करने लगे है हम ! क्युकी हम जान गये साथ न कोई आया था ! और जानतें हैं की साथ न अब कोई जायेगा !

दैनिक जनवाणी में आपका स्वागत है

दैनिक जनवाणी में आपका स्वागत हैदैनिक जनवाणी मेरठ से प्रकाषित होने वाला प्रमुख अखबार है। अखबार में आपका स्वागत है। अखबार के लिए आप अपने आलेख, कविता, गजल, कहानी और लघु कथा आदि भेज सकते हैं। हमारा एक काॅलम वे पढ़ रहें हैं इस काॅलम के लिए आप हमें आजकल किस साहित्यकार की पुस्तक पढ़ रहे हैं। उस पुस्तक में क्या नया है। क्यों पढ़ रहे हैं आदि लिखकर भेज सकते हैं। दूसरा काॅलम जो न पढ़ सका है इस काॅलम के लिए आप हमें उस पुस्तक के बारे में लिख कर भेज सकते हैं, जो आप पढ़ नहीं सके। क्यों नहीं पढ़ सके। क्या मजबूरी रही। क्यों पढ़ना चाहते थे। मलाल एक काॅलम है। इस काॅलम में आप लिख सकते हैं कि जिंदगी में आप को किस बात का मलाल रहा। इनके अलावा एक काॅलम सुकून का दिन है। आप अपना कौनसा दिन सुकून के साथ किस तरह बिताते हैं, इसके बारे में अपने अनुभव भेज सकते हैं। षब्द सीमा 500-600 तक हो। साथ में अपनी पासपोर्ट साइज फोटो भेजना मत भूलिएगा सलीम अख्तर सिद्दीकीदैनिक जनवाणी में आपका स्वागत हैदैनिक जनवाणी मेरठ से प्रकाषित होने वाला प्रमुख अखबार है। अखबार में आपका स्वागत है। अखबार के लिए आप अपने आलेख, कविता, गजल, कहानी और लघु कथा ...

गणतंत्र दिवस

                                   अब देखो न समय कैसे  पंख लगा के उड़ता है की हम उसे कितना भी  रोकना  चाहें तो भी नहीं रोक पाते ! आज हमारे देश मै गणतंत्र के 61 वर्ष पुरे होने जा रहेँ हैं तो हमारे मन मै ये सवाल आना लाज़मी है की इतने समय मै हमने क्या खोया और क्या पाया ? अब देखो हमारे देश मै 1950 मै आर्थिक विकास दर 1 . 9  % थी ! अब 8 . 5 से 9 % के बीच मै है ! उस समय साक्षरता की दर 18 % थी और अब हमारे देश मै इसकी दर 68  %  है ! उस वक़्त देश मै 48 % गरीब लोग माने जाते थे ! आज इसकी संख्या 37 . 2 % रह गई है ! इस संख्या मै बहुत बड़ा इजाफा तो नहीं हुआ पर तब से अब तक के अनुमान से इसकी हालत सुधरी जरुर है ! इस वक़्त हमारे देश मै 602 लोग अरबपतियों मै शुमार ...

डा श्याम गुप्त का गीत ......ए मेरे मन ....

ऐ मेरे मन ...ऐ मेरे में..ऐ मेरे में .. आज तू है उदास क्यों इतना , कैसी चिंता ने तुझको घेरा है | किन ख्यालों में आज डूबा हुआ, कौन से गम ने डाला डेरा है ||.....ऐ मेरे मन ... हमने देखे जो सपने तू उन्हें याद न कर, टूटे सपनों की किसी से तू फ़रियाद न कर | तेर सपने थे कि सुन्दर ज़हां बसायेंगे, देश संस्कृति को नए ढंग से सजायेंगे |.....ऐ मेरे मन .... मिट गए देश की खातिर जो लिए सिर  पै कफ़न, मिट गए चाह लिए एसा व स्वाधीन वतन | मिट गए आस लिए देश बनेगा ये चमन | लुट गए देश पै ,बन जाए यही राहे- अमन ||.......ऐ मेरे मन .... बात अब देश संस्कृति की न करता कोई, उन शहीदों की भी राहों पै न चलता कोई | याद में वीरों की अब कौन लगाए मेले , बीर रस के भी नहीं गीतों को सुनता कोई ||......ऐ मेरे मन .... श्याम, चलिए जहां गम के न हों मेले कोई, हम अकेले हों न हों सारे झमेले कोई | याद में वीरों की पथ-दीप जलाए जाएँ, उन की रहां को भी पुष्पों से सजाये कोई || ऐ मेरे मन ....ऐ मेरे मन .... ऐ मेरे मन .....||

कट्टरताओं मत बाँटो देश ---- मिथिलेश

नया युग वैज्ञानिक अध्यात्म का है । इसमें किसी तरह की कट्टरता मूढता अथवा पागलपन है। मूढताए अथवा अंधताये धर्म की हो या जाति की अथवा फिर भाषा या क्षेत्र की पूरी तरह से बेईमानी हो चुकी है । लेकिन हमारें यहां की राजनीति इतनी भ्रष्ट हो गई है कि उन्हे देश को बाँटने के सिवाय कोई और मुद्दा ही नहीं दिखता । कभी वे अलग राज्य के नाम पर राजनीति कर रहे हैं तो कभी जाति और धर्म के नाम पर । जिस दश में लोग बिना खाए सो जा रहे हो , कुपोषण का शिकार हो रहें हो , लड़किया घर से निकलने पर डर रही हो उस देश में ऐसे मुद्दों पर राजनीति करना मात्र मूर्खता ही कही जा सकती है । आज से पाँच-छह सौ साल पहले यूरोप जिस अंधविश्वास दंभ एंव धार्मिक बर्बरता के युग में जी रहा था, उस युग में आज अपने देश को घसीटने की पूरी कोशिश की जा रही है जो किसी भी तरह से उचित नही है। जो मूर्खतायें अब तक हमारे निजी जीवन का नाश कर रही थी वही अब देशव्यापी प्रागंण में फैलकर हमारी बची-खुची मानवीय संवेदना का ग्रास कर रही है । जिनकें कारण अभी तक हमारे व्यक्तित्व का पतन होता रहा है जो हमारी गुलामी का प्रमुख कारण रही, अब उन्ही के कारण हमारा देश एक बार फ...