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सुरा नहीं सोम- शराब नहीं औषधि ।।

आदरणीय बन्‍धु  आपके समक्ष इस सप्‍ताह आपके अपने संस्‍कृतजालपृष्‍ठ संग्राहक संस्‍कृतम्-भारतस्‍य जीवनम् पर प्रस्‍तुत किये गये लेखों की सूची प्रस्‍तुत कर रहा हूँ । अपने अमूल्‍य विचार द्वारा संस्‍कृत के विकास में सहयोग प्रदान करें । बृहस्पतिवार, १८ नवम्बर २०१० सोमरसविषये कानिचन् तत्‍वानि – वेदरहस्‍यम् मंगलवार, १६ नवम्बर २०१०  मया अपि अद्य श्रीअयोध्‍यापरिक्रमा कृता 14क्रोशस्य परिक्रमा समाप्ता , श्व: आरभ्य 5क्रोशी परिक्रमा आरभ्‍यते ।।-अयोध्या मेला मंगलवार, १६ नवम्बर २०१० श्री अनिरूद्धमुनि पाण्डेतय 'आर्त' कृत श्रीहनुमत् विनयकुंज  ! सोमवार, १५ नवम्बर २०१० हरिभजनसिंह: नूतनं विश्वपकीर्तिमानम् अकरोत् ।। भवदीय: - आनन्‍द:

यु न कहो पत्थर दिल

क्यु इतना प्यार दिखाती हो  उस पर लुट जाना चाहती हो  फिर हर बार क्या सोच कर तुम  उससे खुद को यु बचाती हो  क्या तेरे दिल मै प्यार नहीं ? क्या उसके जेसा एहसास नहीं  फिर बार बार उस तक जाके  क्यु लोट जाना चाहती हो  उसके एहसास जगाती हो  उसके अरमान सजाती हो  जब वो सपनो मै रंग भरता है  तो क्यु........  बेरंग उसे कर आती हो  फिर क्यु उसका अच्छा तुम चाहती हो  उसके अरमान जगाती हो  अपने को यु पत्थर  दिल कह फिर  क्यु  उसका दिल  यु दुखाती हो ?

ताकि लाइव रहे मोहल्ला लाइव

By  संजय तिवारी   अविनाश दास असमंजस में हैं कि मोहल्ला की गलियां अवरुद्ध तो न हो जाएंगी? कोई चार साल पहले एनडीटीवी में काम करते हुए ब्लागिंग के जरिए इंटरनेट की दुनिया में प्रवेश करनेवाले अविनाश दास इन ब्लाग से उठकर वेबसाइट पर आये और जो जमात उन्होंने मोहल्ला पर विकसित की थी उस जमात के साथ अपने डोमेन पर बहस को जिन्दा रखा. विपक्ष की सास्वत आवाज बनाये रखी. लेकिन ब्लाग ब्लाग होता है और जब हम अपने डोमेन पर आते हैं तो वह वेबसाइट हो जाती है. और वेबसाइट की रेंज एक हजार रूपये से लेकर एक करोड़ सालाना तक कुछ भी हो सकती है. वैसे तो दूर अमेरिका के एक शहर सैन फ्रांसिस्को में बहस चल रही है कि वेब 2 की दुनिया कैसी होगी लेकिन यहां अपने देश में वेब 1 ही अभी तक आकार नहीं ले सका है. दशक की शुरूआत में जब पूरी दुनिया में इंटरनेट की क्रांति का पहला बबूला फूट रहा था तो भारतीय समाज इंटरनेट से आंखें चार करने को भी तैयार नहीं था. कुछ नामी गिरामी बड़ी कंपनियों ने पैसे जरूर लगाए लेकिन उस वक्त न तो नेट की समझ थी और न ही जरूरत तो जो उस पैसे को पैसे में बदलने में कारगर हो सके. इसी दौर में भारत में गूगल का प...

प्यारी सी कली जब फूल बन खिली

एक प्यारा सा सन्देश बेटियों के नाम ............. तुम तो इस बगिया की                प्यारी सी वो कलियाँ हो  माँ - बाबा के प्यार से               अब फूल  बन खिली हो  जिन्दगी की दोड़ मै              खुद को कम न समझना  तुम पर ही टिकी होगी नीव             पर उसे विरासत न समझना  किसी के अत्याचार को  तुम                   हरगिज कभी  न सहना पर किसी को प्यार देने से भी                 पीछे कभी  तुम ना हटना   बच्चों  को प्यार देना                 अच्छे संस्कार देना  कोई तुम्हें दुत्कारे तो                उसका भी जवाब देना  सबका ख्याल रखना             ...

आह

बहुत समय से युवती की व्यथा लिख रही थी ! आज दिल ने कहा क्यु  न मर्द की आह भी लिख डालू !  हम कहते हैं की मर्द बेवफा होता है ! तो क्या उनके  सीने  मै दर्द नहीं होता है ? ओरत तो अपने दर्द को आंसुओ से बयाँ कर देती है ! मर्द का व्यक्तितव तो उसे इसकी भी इज्ज़ाज़त नहीं देता !  कहाँ समेटता होगा वो इस दर्द को ? वकत के साथ साथ सबका  छुटता हुआ साथ ! किसी से कुछ भी तो नहीं कह पाता है वो , बस अपने आपको अपने मै समेटता चला जाता है ! अपनी भावनाओ को किसी से कह भी नहीं पाता उसे भी तो सहानुभूति , प्यार की जरुरत होती होगी न फिर वो बेवफा केसे हो सकता है ? हमारा प्यार जब उसे हिम्मत दे सकता है तो वही प्यार उसे मरहम क्यु  नहीं  ?

अमेरिका के साये से बाहर निकले भारत

हमें उम्‍मीद है... उम्‍मीद है एक नए और शांतिपूर्ण अमेरिका की...' अपनी इन बातों के साथ दो साल पहले जब राष्‍ट्रपति बराक ओबामा देश को संबोधित कर रहे थे, तो उन्‍होंने गांधी के आदर्शों और दुनिया में भारत की उभरती नई तस्‍वीर का जिक्र भी किया था. दिवाली के देर रात राष्‍ट्रपति ओबामा मुंबई पहुंच रहे हैं. क्‍या यह एक नई रोशनी की शुरुआत होगी या फिर भारत और अमेरिका के संबंधों में यथास्थिति बनी रहेगी...यह अगले तीन दिनों में साफ हो जाएगा. घर में पराजय का मुंह देखकर राष्‍ट्रपति ओबामा एक नई शुरुआत की कोशिश और अपने देश की अर्थव्‍यवस्‍था को संवारने की जद्दोजहद के साथ भारत पहुंच रहे हैं. भले ही भारत सरकार अमेरिकी राष्‍ट्रपति के इस दौरे से बहुत उम्‍मीदें नहीं लगा रही, लेकिन भारत के पड़ोसी देशों, पाकिस्‍तान और चीन में इस दौरे को लेकर काफी कौतूहल रहेगा. यह शायद पहला मौका है, जब एक अमेरिकी राष्‍ट्रपति भारत के दौरे के साथ पाकिस्‍तान में कुछ घंटे नहीं बिता रहा. इसे लेकर भले ही भारतीय विदेश मंत्रालय संतुष्‍ट न हो, लेकिन अंदर ही अंदर खुशी की लहर जरूर होगी. भले ही ओबामा ने तीन महीने पहले ही 750 करोड़ के आर्थि...

जिंदगी जीना भी एक कला

इक दिन जिंदगी से................ मैने शिकायत जो ये की ........ तो उसने भी हंसके हमसे ये कह दिया ? कोंन कहता है जिंदगी हंसी नहीं होती एक बार आजमा के तो देखो तुम हो न जाये हमसे मोहबत  तो कहना एक बार हमारी गली आके तो देखो तुम लोग कहते हैं मोहबत बेवफा होती शायद उनमे भी कोई कमी होती होगी जरा इजहारे वफ़ा का अंदाज़ तो सीखो इकरारे वफ़ा चल के न आये तो हमसे कहना तुम हाँ ........... वो हर पल इम्तहान लेती है उसका बस जवाब बन जाओ तुम अपने को उसकी आदत जो बना दोगे जिंदगी हंसी न बन जाये तो मुझसे कहना तुम उससे ......गरचे फिर दूर भी तुम जाओगे उसे [ जिंदगी ] तुम अपने  उतने ही करीब पाओगे जिंदगी के जीने का तो इतना सा फसना है फिर इससे दूर कहाँ तक जाओगे तुम ?