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अगर ''क्रूक''में इमरान हाशमी की जगह सन्नी देओल होते तो क्या होता?

यह सवाल है यहाँ आने वाले हर मेहमान से..तो अपने जवाबों को कमेंट्स बॉक्स में डालें अगर ''क्रूक''में इमरान हाशमी की जगह सन्नी देओल होते तो क्या होता?

मुक्तिका: फिर ज़मीं पर..... संजीव 'सलिल'

मुक्तिका: फिर ज़मीं पर..... संजीव 'सलिल' * फिर ज़मीं पर कहीं काफ़िर कहीं क़ादिर क्यों है? फिर ज़मीं पर कहीं नाफ़िर कहीं नादिर क्यों है? * फिर ज़मीं पर कहीं बे-घर कहीं बा-घर क्यों है? फिर ज़मीं पर कहीं नासिख कहीं नाशिर क्यों है? * चाहते हम भी तुम्हें चाहते हो तुम भी हमें. फिर ज़मीं पर कहीं नाज़िल कहीं नाज़िर क्यों है? * कौन किसका है सगा और किसे गैर कहें? फिर ज़मीं पर कहीं ताइर कहीं ताहिर क्यों है? * धूप है, छाँव है, सुख-दुःख है सभी का यक सा. फिर ज़मीं पर कहीं तालिब कहीं ताजिर क्यों है? * ज़र्रे -ज़र्रे में बसा वो न 'सलिल' दिखता है. फिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद कहीं  मंदिर क्यों है? * पानी जन आँख में बाकी न 'सलिल' सूख गया. फिर ज़मीं पर कहीं सलिला कहीं सागर क्यों है? * -- दिव्यनर्मदा.ब्लागस्पाट.कॉम कुछ शब्दों के अर्थ : काफ़िर = नास्तिक, धर्मद्वेषी, क़ादिर = समर्थ, ईश्वर, नाफ़िर = घृणा करनेवाला, नादिर = श्रेष्ठ, अद्भुत, बे-घर = आवासहीन, बा-घर = घर वाला, जिसके पास घर हो, नासिख = लिखनेवाला,  नाशिर = प्रकाशित करनेवाला, नाज़िल = मुसीबत, नाज़ि...

न समझोगे तो मिट जाओगे हिंदुस्तांवालो...

आशुतोष बीस साल बाद भी उस अस्सी साल के बुजुर्ग का चेहरा मैं भूल नहीं पाया। झुर्रियों से अटे उस चेहरे से भरभर टपकते आंसू और खरखराती आवाज। वो आवाज आज भी मेरे कानों में गूंजती है। 'आज राजीव गांधी होते तो अमर हो जाते'। अयोध्या में विवादित जमीन के पास शिलान्यास के करीब खड़े उस बुजुर्ग ने बड़ी मासूमियत से कहा था। मैंने बस इतना पूछा था-बाबा आपको कैसा लग रहा है। ये पूछना था कि वो फफक-फफक के रो पड़े। मैं उन दिनों जेएनयू में पढ़ रहा था। सीपीआई ने अयोध्या में रैली का आह्वान किया था। सी. राजेश्वर राव सीपीआई के जनरल सेक्रेटरी थे। मैं और सुहेल रैली में शामिल होने चल पड़े थे। रामजन्मभूमि के नाम पर संघ परिवार का उन्माद अपने उफान पर था। ट्रेन में कई बार मारपीट होते-होते बची थी। बचते-बचाते हम अयोध्या पहुंचे। स्टेशन से उतरकर पैदल ही हम बाबरी मस्जिद की तरफ बढ़े। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे थे सुहेल के चेहरे की लकीरें बदलती जा रहीं थी। अचानक एक मोड़ पर सुहेल रुका और बोला-मैं अब आगे नहीं जाऊंगा। तुम चले जाओ। डर तो मुझे भी लग रहा था। पर मैं आगे बढ़ता गया। और इन बुजुर्ग से मुलाकात हुई। बुजुर्ग की झुर्रिय...

दोस्तों के साथ मस्ती के कुछ पल

कल जबलपुर की यात्रा से लौटा हूँ तो कुछ मजे के पल तस्वीरों में कैद है दिल किया की इन्हें दोस्तों के साथ बाँट लूं तो दोस्तों आपके सामने कुछ तस्वीरें है ,उम्मीद है कुछ लोगों को पसंद ना भी आये,फिर भी हम तो यही कहेंगे...जय हिन्दुस्तान-जय यंगिस्तान   

अपने राशि के स्‍वामी ग्रह को जानें ।।

प्रिय बन्‍धु आपके अपने संस्‍कृत जालसंग्राहक संस्‍कृतम्-भारतस्‍य जीवनम् पर  ज्‍योतिषाचार्य जी ने उपयोगी तथ्य राशि व ग्रहों के विषय में प्रस्तुत किये हैं । जाल-ज्योतिषं -राशि-स्वामी अपने राशि के स्‍वामी ग्रह को जानें तथा टिप्‍पणियों द्वारा महोदय के प्रयास के विषय में अपने राय प्रकट करें । प्रतुल जी ने आदर्श देश की विशेषताऍं बताई हैं, आदर्श देशः देखें व उत्‍साह वर्धन करें । -- भवदीय: - आनन्‍द:

बच्चो को दे प्यार और विश्वास

  महिला एवं शिशु विकास मंत्रालय ने युनिसफ़ और कुच्छ एनजीओ के साथ मिलकर हाल ही मै चाइल्ड येब्युस के मामले मै भारत के १६ राज्यों का सर्वे किया है ! इस सर्वे मै शामिल ५३% बच्चो ने माना की वे कभी ना कभी शारीरिक शोषण करने वालो में से ५०% जान पहचान वाले लोग ही थे ! बचियों  की तुलना में बच्चे शारीरिक शोषण का ज्यादा शिकार हो रहे हैं !                                            ये हमारे देश मै नहीं दुनिया भर मै घटने वाली जटिल समस्या है जिसको हम किसी भी तरह नज़र अंदाज़ नहीं कर सकते जिसकी खबर हम हर रोज़ अख़बार , टेलीविज़न के माध्यम से देखते और सुनते हैं ! कितना प्यार करते हैं हम अपने बच्चो से ? हमारा जवाब होता है ''''''''बहुत ज्यादा ;;;;; कितना ख्याल रखते हैं हम अपने बच्चो का ? हमारा फिर वही जवाब '''''बहुत ज्यादा ! फिर ये सब  केसे हो जाता है ? कही न कही तो हम उनकी देख रेख मै चुक कर ही रहे हैं जिसका भुगतान हमारे मासूम बच्चो को उठाना पड़ता है ! कोन सी है हमारी वो भूल ? ह...

यात्रा करो अनंत मन की

        इन्सान दिन- रात अपनी इच्छाओ की पूर्ति मै व्यसस्त रहता है ! अपने मतलब के लिए कही हाथ जोड़ता है और कही बाहें फेलता है ! लेकिन संसार मै न्याय से अन्याय , सम्मान से अपमान , ख़ुशी से दुखी होकर दुनिया का वैभव इकठा किया जा सकता है पर परमात्मा की कृपा नहीं पाई जा सकती ! जब तक भगवान की कृपा नहीं होगी तब तक वैभव के शिखर पर बैठ कर भी इन्सान की आँखों से आंसू ही झरते रहते हैं !जब भगवान की कृपा होती है तब आप जंगल मै रहो या वीराने मै हर जगह खुशियाली साथ रहती है सम्पुरण संतुष्टि प्रकृति मै या माया मै नहीं होती थोड़ी देर के लिए तो लगता है की सब कुच्छ मिल गया लेकिन कुच्छ देर बाद ही लगता है की अभी बहुत पाना बाक़ी है ! इन्सान प्रेम की अभिलाषा मै बहुत सारे रिश्ते बनाता है लेकिन प्रेम भी पूरा नहीं होता ! भटकाव तो सभी के जीवन मै आता है लेकिन एसा महसूस  होता है की थोड़ी दूर और चलु शायद कहीं शांति , विश्राम ,या चैन मिल जाये !             टेगोर ने कहा था -------मै हर रोज़ सुख के घर का पता मालूम करता हु लेकिन हर शाम को फिर भूल जाता हु ...