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लो क सं घ र्ष !: उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र कामयाब हुआ

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के स्तिथि अति गंभीर है । कोंट्रैक्ट किलर नीरज सिंह को जब जौनपुर पैसेंज़र से ले जाया जा रहा था तो कुछ हमलावरों ने उन दोनों सिपाहियों की हत्या कर अपराधी को छुड़ा कर लेकर चले गए । बरेली में अभी तक कर्फ्यू चल रहा था । आए दिन हत्याएं व लूटपाट का दौर जारी है एक तरफ पुलिस थानों में सिपाही व उपनिरीक्षकों की संख्या मानक से अत्यधिक कम है और इन पुलिस कर्मियों का अधिकांश समय सत्ता रूढ़ दल के नेताओं के जलूस प्रदर्शन को कामयाब करने में लगा रहता है । पुलिस के उच्च अधिकारीयों की कार्यप्रणाली विधिक न होने के कारण अफरातफरी का महल रहता है गंभीर अपराधों की विवेचना थाने में बैठकर हो जाती है। अंतर्गत धरा 161 सी . आर . पी . सी के बयान थाने व पुलिस उपाधीक्षक के कार्यालयों में ही हो जाती है । उच्च अधिकारीयों को मीडिया में छाए रहने के लिए कुछ गुड वर्क चाहिए उसके लिए सुनियोजित तरीके से गुड वर्क की ...

तेज और मेहनती बनें युवा-राहुल

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी जी ठीक ही कहते है की ..अगर तेज और मेहनती हमारे देश की युवा हने तो देश को गर्त से बचाया जा सकते है। लेकिन उसके साथ साथ ईमान दार होना नितांत आवश्यक है॥ क्यों की हमारे युवा लोगो को ये भी मालुम है की हमारे देश में कितना बड़ा भ्रष्टाचार भरा पडा है॥ क्यों की वे उस रास्ते से गुजर चुके ..जब उन्हें नौकरी के लिए धक्के खाने पड़ते है॥ उअर भी क्या क्या करना पड़ता है॥ उसे भी युवा लोगो से सामना हो चुका है। और ये बात भी सही है .की राहुल जी ही युवाओं को गठित करके देश का संचालन कर सकते है... उसमे देश का भविष्य उज्जवल है..

ये भी कोई हर्जाना है!

सरकार ने परमाणु हर्जाना विधेयक लोकसभा में पेश नहीं किया, यह अच्छा किया। पेश न करने का कारण यह भी हो सकता है कि 35 कांग्रेस सांसद अनुपस्थित थे और सारे विरोधी दल एकजुट थे। वह पेश होता तो शायद गिर जाता। कारण जो भी हो, इस विधेयक का अटक जाना भारत के हित में है। यह ठीक है कि प्रधानमंत्री अगले माह जब अमेरिका जाएंगे तो यह विधेयक उनके हाथ में नहीं होगा, लेकिन क्या कीचड़ में सने हाथों के साथ जाने से यह कहीं अच्छा नहीं कि वे खाली हाथ ही जाएं? जाहिर है कि इस विधेयक को कानून बनने में जितनी देर लगेगी, भारत-अमेरिकी परमाणु सहयोग में उतनी ही देर होती चली जाएगी, क्योंकि अमेरिकी सरकार का आग्रह है कि भारत पहले परमाणु दुर्घटना की स्थिति में हर्जाने के सवाल को सुलझाए। अमेरिका किसी भी हालत में कोई भी हर्जाना नहीं भरना चाहता। सच्चई तो यह है कि भारत में इस तरह का कोई कानून पहले से बना हुआ ही नहीं है। लगभग 50 साल पहले जब परमाणु ऊर्जा संबंधी कानून बना तो उस समय यह कल्पना ही नहीं रही होगी कि कभी भयंकर परमाणु दुर्घटना हो सकती है। इस तरह की दुर्घटनाओं के बारे में दुनिया की नींद तब टूटी, जब 1979 ...

लो क सं घ र्ष !: पोथी पढ़ पढ़ जगमुआ, पंडित भया न कोय......

यह कहावत तो आप ने सुनी होगी जब जागे तब सबेरा। यह खबर आई है। कौतूहल पूर्ण और प्रशंसनीय। इस वर्ष की बोर्ड परीक्षा दे रहे हैं भाजपा सरकार में समाज कल्याण राज्यमंत्री रहे दल बहादुर कोरी। यह पूर्व राज्यमंत्री रहे दल बहादुर कोरी। यह पूर्व राज्यमंत्री इस वर्ष प्रतापगढ़ के एक केन्द्र से हाईस्कूल की परीक्षा दे रहे हैं। देर शायद दुरूस्त आयद। यही क्या कम है कि सुबह के भूले शाम को घर पहुंचे। साक्षरता या समाज में शिक्षा के प्रसार के लिये सरकारें या समाज में शिक्षा के प्रसाद के लिये सरकारें व्यथित रहती है, बड़ी रक़में खर्च की जा रही है।‘मिड़ डे मील‘ से बच्चे कम, दूसरे ज़्यादा फ़ायदा उठा रहे है। आज़ादी के 63 र्वष हो चुके, परन्तु साक्षरता दर हम अधिक नही बढ़ा सके। लगता यह है कि दो भारत हैं-एक अमीरों का दूसरा ग़रीबों का। शहरी अमीर बस्तियों में बच्चों को पढ़ाना‘ स्टेटस सिंबल‘ है। शिक्षा-माफ़िया या व्यवसायी‘ क्रेज़‘ पैदा करके दोनो हाथों से धन लूट रहे हैं, दूसरी ओर ग़रीब भारत की जनता पहले भोजन और रोज़गार से जूलमे-शिक्षा तो बाद की चीज़ है। साक्षर वह भी है जो पढ़ना लिखना नहीं जानता बस अगले से हस्ताक्षर तक पहुँच गया हमारे ...

लो क सं घ र्ष !: उक्रेन में राष्ट्रपति चुनावः अमरीकी साम्राज्यवाद के लिए एक झटका

1990-91 में विश्व में एकध्रुवीय हो जाने और अमरीका का इसका अगुआ बन जाने के बाद से ही उसने विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। लेकिन यूरोप और खासकर पूर्वी यूरोप पर उसका विशेष ध्यान है। इस अभियान में उसने सर्वप्रथम युगोस्वालिया को सभी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और मान्यताओं की अवहेलना करते हुए कई भागों में विभक्त कर दिया। इसके साथ ही उसका दूसरा निशाना उन राष्ट्रों पर था, जो पहले समाजवादी खेमों के सदस्य थे। इस मुहिम में इन राष्ट्रों को नाटो सैनिक संगठन में सम्मिलित करना शामिल थे। इसके साथ ही मध्य एशिया के राष्ट्रों और इनके माध्यम से कैस्पियन सागर के तेल सम्पदा पर अधिकार जमाना इनकी नीति का भाग था। शुरू में उसे कुछ सफलता भी मिली, जैसे कि बुल्गारिया, पोलैंड, रूमानिया आदि को नाटो का सदस्य बनाया गया और इनमें से कुछ में अमरीकी नाटो फौजी अड्डे भी स्थापित किये गये। लेकिन अभियान के इस क्रम में उसे बड़ा झटका ज्याॅर्जिया संकट के रूप में लगा। लम्बे समय से अमरीका उक्रेन को नाटो में शामिल करने के लिए प्रयत्नशील है। इस संबंध में उतार-चढ़ाव होता रहा है। उक्रेन में अभी-अभी राष्ट्रपति का...

हाइकु गजल : संजीव 'सलिल'

आया वसंत, / इन्द्रधनुषी हुए / दिशा-दिगंत.. शोभा अनंत / हुए मोहित, सुर / मानव संत.. * प्रीत के गीत / गुनगुनाती धूप / बनालो मीत. जलाते दिए / एक-दूजे के लिए / कामिनी-कंत.. * पीताभी पर्ण / संभावित जननी / जैसे विवर्ण.. हो हरियाली / मिलेगी खुशहाली / होगे श्रीमंत.. * चूमता कली / मधुकर गुंजार / लजाती लली.. सूरज हुआ / उषा पर निसार / लाली अनंत.. * प्रीत की रीत / जानकार न जाने / नीत-अनीत. क्यों कन्यादान? / 'सलिल' वरदान / दें एकदंत.. **********************

लो क सं घ र्ष !: जन प्रतिनिधियों की शैक्षिक आर्हता व चरित्र का सत्यापन जरूरी हो

उ0 प्र0 पंचायत चुनावों में इस बार प्रधान बनने के लिए शैक्षिक योग्यता अनिवार्य कर दी गई है। अब हाईस्कूल फेल व्यक्ति प्रधानी की कुर्सी पर नहीं पहुंच सकेंगे। देर से सही परन्तु सही दिशा में बढ़ाया गया यह एक अच्छा कदम कहा जायेगा यही काम अगर विधान सभा, विधान परिषद, लोक सभा, राज्य सभा, में भी कर दिया जाए तो कम से कम इन पदों पर जाहिल दिमाग न बैठ सकेंगे और कुछ तो गरिमा इन पदों की वापस लौटेंगी। उ0प्र0 में पंचायत के चुनावों में प्रधान के पद पर अब वही व्यक्ति अपनी उम्मीदवारी का दावा कर सकेंगे जो कम से कम हाईस्कूल पास हो। इस फैसले से भले ही अंगूठा टेक प्रधानों को अघात लगा हो कि अब वह प्रधान न बन सकेंगे परन्तु इसके परिणाम अच्छे आयेंगे। लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई ग्राम पंचायत होती है और पंचायती राज अधिनियम के द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ग्रामीण स्तर पर स्थित ग्राम पंचायतों को विकास के लिए केन्द्र से भेजे जाने वाले धन का उपयोग करने का जिम्मेदार बताया था। उसके बाद से प्रधानी के चुनाव की अहमियत काफी बढ़ गई है और जो चुनाव बगैर धन खर्चा किए पहले हो जाया करता था वह अब लाखों रूपये में होने लगा ह...