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लो क सं घ र्ष !: बोलो देश बंधुओं मेरे, वे कैसा गणतंत्र मनाएं........

फल, सब्जी, शक्कर हुआ सपना, यही कमर तोड़ महंगाई में, ईद का चाँद हुई दालें, सौ रुपया रोज कमाई में। बच्चे रोटी दाल को तरसें, मटरफ़ली देखि ललचायें॥ बोलो देश..... तीस साल तक लड़े मुकदमा, हत्यारे सब बरी होई गए। टूटी थी अंधे की लाठी, गहनों, खेत मकान बिक गए। शोक मनाये मात-पिता कि, न्यायपालिका के गुण गायें। बोलो देश.......... फर्जी मुठभेड़ों में जिनके, प्रिय जन स्वर्ग सिधार गए। जो भ्रष्ट व्यवस्था, सत्ता के, गुंडों से लड़कर हार गए। जो नीर अपराधीन नवजवान हिंसक आतंकी कहलाएं॥ बोलो देश......... गुजरात, उड़ीसा, महाराष्ट्र में, जो जिन्दा ही दफ़न हो गए, धू-धूकर जलते भवनों में, जिनके प्रिय बेकफ़न सो गए। जो अपना सर्वस्व गवांकर, शिविरों में जिंदगी बिताएं॥ बोलो देश....... गोदें सूनी हुई और जिन मांगों के सिन्दूर धुल गए। भस्म हुए स्वर्णिम सपने, आँखों में बनकर अश्रु घुल गए। रक्षक पुलिस बन गयी भक्षक, दंगाई मिलि आग लगायें ॥ बोलो देश...... गए कमाने मायानगरी, बीवी बच्चे आस लगाए, राजठाकरे के गुंडों से, बचकर फिर न वापस आये। मातम करें आश्रित या कि, संविधान की महिमा गाएं॥ बोलो देश...... संविधान की ऐसी की तैसी, करते ...
गणतंत्र दिवस पर विशेष गीत: सारा का सारा हिंदी है आचार्य संजीव 'सलिल' * जो कुछ भी इस देश में है, सारा का सारा हिंदी है. हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है.... मणिपुरी, कथकली, भरतनाट्यम, कुचपुडी, गरबा अपना है. लेजिम, भंगड़ा, राई, डांडिया हर नूपुर का सपना है. गंगा, यमुना, कावेरी, नर्मदा, चनाब, सोन, चम्बल, ब्रम्हपुत्र, झेलम, रावी अठखेली करती हैं प्रति पल. लहर-लहर जयगान गुंजाये, हिंद में है और हिंदी है. हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है.... मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजा सबमें प्रभु एक समान. प्यार लुटाओ जितना, उतना पाओ औरों से सम्मान. स्नेह-सलिल में नित्य नहाकर, निर्माणों के दीप जलाकर. बाधा, संकट, संघर्षों को गले लगाओ नित मुस्काकर. पवन, वन्हि, जल, थल, नभ पावन, कण-कण तीरथ, हिंदी है. हर हिंदी भारत माँ के माथे की उज्जवल बिंदी है.... जै-जैवन्ती, भीमपलासी, मालकौंस, ठुमरी, गांधार. गजल, गीत, कविता, छंदों से छलक रहा है प्यार अपार. अरावली, सतपुडा, हिमालय, मैकल, विन्ध्य, उत्तुंग शिखर. ठहरे-ठहरे गाँव हमारे...

लो क सं घ र्ष !: गणतंत्र दिवस पर विशेष: बोलो देश बंधुओ मेरे .......

अंधे भूखे अधनंगे जो , फुटपथों पर रात बिताएं । बोलो देश बंधुओं मेरे , वे कैसा गणतंत्र मनाएं ॥ पेट की आग बुझाने खातिर , जो नित सुबह अँधेरे उठकर अपना - अपना भाग बटोरते , कूड़े के ढेरों से चुनकर । गंदे नालों के तीरे जो , डेरा डाले दिवस बिताएं ॥ बोलो देश ...... बिकल बिलखते भूखे बच्चे , माओं की छाती से चिपटे , तन पर कुछ चीथड़े लपेटे , सोये झोपड़ियों में सिमटे । दीन - हीन असहाय , अभागे , ठिठुर - ठिठुर कर रात बिताएं ॥ बोलो देश .......... जिनका घर , पशुधन , फसलें , विकराल घाघरा बहा ले गयी । कोई राहत , अनुदान नहीं , चिरनिद्रा में सरकार सो गयी । सड़क किनारे तम्बू ताने , शीत लहर में जान गवाएं ॥ बोलो देश ......... वृद्ध , अपंग , निराश्रय जिनको , सूखी रोटी के लाले हैं , उनके हिस्से के राशन में , कई अरब के घोटाले हैं । वे क्या जन गण मंगलदायक , भारत भाग्य विधाता गायें ॥ बोलो देश ...... बूँद - बूँद पानी को तरसें , झांसी की रानी की धरती । अभी विकास की बाट जोहती बुंदेले वीरों की बस्ती । जहाँ अन्नद...

आँखों का इशारा..

आँखों का इशारा करके जब॥ इंसान समाता है उसमे॥ मिल जाते दोने एक लय में॥ हर्षित होता प्यारा मन॥ फिर रूप निखारने लगता है॥ कलियाँ फूल बन जाती है॥ अपने प्यारे उपवन में फिर॥ खिशिया मंगल गाती है॥

अब देर न कर रूठन वाले॥

रूठ कर क्यों बैठे हो टूटे दिल॥ हमसे भी ज़रा तो बात कर ले॥ सूखा है समुन्दर तपिस बढ़ी॥ हे मेघ ज़रा बरसात कर दे। हरियर क्यारी हो जायेगी॥ कलियों का खिलाना जारी होगा॥ भवरे भी मचलते आयेगे॥ हे यार अब उपकार कर दे॥ हम आस लगाए बैठे है कब से॥ तुम मांग सजाओ गे मेरी॥ सोलह सिंगर जब कर निकालू॥ सकुचा जाएगी समय घडी॥ अब देर न कर रूठन वाले॥ थोड़ी से मुस्कान दे दे॥

महफ़िल सजा ली..

जिंदगी जब हंस के बोली॥ राह पर चलता गया मै॥ भूल कर अज्ञान बना न॥ न तो ईर्ष्या द्वेष मन में॥ भाग्य ने धोखा दिया न॥ न तो पथ से भटका मै॥ सब सितारे साथ मिलकर॥ करते है क्या हंसी ठिठोली॥ जीव जंतु मायूस न होते॥ नदिया कलरव कर सुनाती॥ पर्वतो की महिमा निराली॥ प्रिये पवन खूब गीत सुनाती॥ आसमा धरती के मध्य मै॥ एक सही महफ़िल सजा ली॥

लो क सं घ र्ष !: गुंडागर्दी का ईनाम

लखनऊ के जिला मजिस्त्रेट अमित घोष की गुंडागर्दी के कारण राज्य कर्म चारियो की हड़ताल हो गयी थी । सैकड़ो राजकर्मचारियों के सर फूटे थे करोडो रुपयों का नुकसान हुआ लेकिन समय बद्द वेतनमान के तहत उनको ईनाम के रूप में सरकार सुपर टाइम स्केल में प्रौन्नति की जा रही है कृषि विभाग के जिस कर्मचारी को थप्पड़ों से पीटा था उसके ऊपर फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जा चुका है । राज्य द्वारा नियमो कानूनों का उल्लंघन अब आम बात हो गयी है अमित घोष के खिलाफ कमिश्नर की जांच लंबित है जांचें इन अधिकारियों के खिलाफ चलती रहती हैं और इनको प्रोमोशन दर प्रोमोशन मिलता रहता है ये अधिकारिगण अच्छी तरह से जानते हैं कि लोकतंत्र में इनके खिलाफ कुछ नहीं हो सकता है इन अधिकारियों की कार्यशैली आम आदमी की रक्षा के लिए न होकर उनका उत्पीडन करने के लिए है गाँव देहात में इन अधिकारियों की भूमिका बहुत ही निंदनीय हो जाती है । राजधानी लखनऊ के अगल बगल के जिलो में प्रशासनिक अधिका...