Skip to main content

Posts

लो क सं घ र्ष !: हड्डियों से यहां कोठियां सजें

कृषक और मजदूर हमारे तरसें दाने-दाने को, दिनभर खून जलाते हैं वो, रोटी, वस्त्र कमाने को, फिर भी भूखों रहते बेचारे, अधनंगे से फिरते हैं, भूपति और पूंजीपतियों की कठिन यातना सहते हैं, भत्ता -वेतन सांसद और मंत्रियों के बढ़ते जाते हैं, हम निर्धन के बालक भूखे ही सो जाते हैं। शव निकल रहा हो और शहनाइयां बजें। दुखियों की हड्डियों से यहां कोठियां सजें।। - मुहम्मद शुऐब एडवोकेट

कुंवर ने बुलंद किया सियासत का झण्डा

अलीगढ़। अस्सलाम वालेअकुम... जैसे ही एएमयू के कैनेडी हाॅल में राहुल आए, उनके मुंह से निकलने वाले यह पहले शब्द थे। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी पूरी तैयारी के साथ अलीगढ़ व एटा आए और पूरे उत्साह के साथ लोगों से रूबरू हुए। मीडिया से दूरी बनाते हुए सोची समझी रणनीति के तहत राहुल 2012 के चुनावों की प्रारंभिक तैयारी कर गए। वे यूथ कांग्रेस के सदस्यों के दिमाग की चाभी अभी से टाइट कर गए कि टिकट या पद लेना हो तो जमीनी स्तर पर काम करें, तभी उनकी दावेदारी के बारे में सोचा जाएगा। वह यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपनी रणनीति समझाकर चले गए। राहुल का अलीगढ़ व एटा दौरा सियासी लोगों खलबली मचा गया। लिब्रहान कमेटी की रिपोेर्ट संसद में पेश हो चुकी है। छह दिसंबर को बाबरी एक्शन कमेटी के लोग विवादित ढांचा विध्वंस की बरसी मनाते हैं। वहीं सात दिसंबर से लिब्रहान की रिपोर्ट पर संसद में चर्चा होनी थी। ऐसे में मुस्लिम नेताओं को मरहम और मुस्लिम वोटों में संेध लगाने के लिए भी राहुल ने एएमयू को चुना। शायद इसीलिए मीडिया को भी दूर ही रखा गया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को अभी से जुट जाने और जमीनी स्तर से काम करने की सीख दी। राहुल...

हिन्दी , हिन्दुस्तान का यही तो दर्द है, दोहरी चाल ----डा श्याम गुप्त

---अब आप युवा कांग्रेस में भरती होने के इस विज्ञापन के फ़ार्म को देखिये --निर्देश संख्या १ पर है---आवेदन पत्र को केवल अंग्रेज़ी में भरें , और अंत में निर्देश ५ है कि आप हिन्दी भाषा में भी भर सकते है | अब केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी ( जो देश में अधिकतम समय सत्तासीन रही है )के युवा सदस्यता का मापदंड ही दोहरा है | हिन्दी भाषा तो निचले पायदान पर ही है, तो फ़ार्म तो सिर्फ़ अंग्रेज़ी मेंही भरना है क्योंकि ये युवा नेता वास्तव में तो अंग्रेज़ी में ही खाते, पीते, उठते ,बैठते,पढ़ते लिखते हैं , हिन्दी तो बस गाँव की जनता को दिखाने को ही बोलते हैं, हिन्दी का नाम तो बस लीपी-पोती है | क्या आशा-अपेक्षा करे देश व जनता व भविष्य - एसे युवा नेता,एसे युवाओं , युवाओं की पार्टी , मुख्य पार्टी,व सरकार से ?? -----हम सब सोचें , विचारें --क्या होगा हिन्दी का ?????!!!!!

लो क सं घ र्ष !: धन्य हैं हमारी खुफिया एजेंसियां

हमारी खुफिया एजेंसियां 26 जनवरी , 15 अगस्त , 6 दिसम्बर जैसे मौकों पर व आतंकी मामलों में मीडिया के माध्यम से मालूम होता है की वो काफ़ी सक्रिय हैं और देश चलाने का सारा भार उन्ही के ऊपर है । खुफिया एजेंसियों की बातें और उनकी खुफिया सूचनाएं बराबर अखबार में पढने व इलेक्ट्रोनिक माध्यम से सुनने को मिलती हैं । छुट भैया नेता रोज प्रेस विज्ञप्ति जारी करता है और छपने पर अखबार खरीद कर जगह - जगह किसी न किसी बहाने लोगो को पढवाता रहता है और उसी तरह खुफिया एजेंसियां मीडिया में अपने समाचार प्रकाशित करवाती रहती हैं। खुफिया सूचनाओं का अखबारों में प्रकाशित होना क्या इस बात का धोतक नही है कि जान बूझ कर वह प्रकाशित करवाई जाती हैं और उन सूचनाओ में कोई गोपनीयता नही है । अक्सर विशिष्ट अवसरों से पहले तमाम तरह की कार्यवाहियां मीडिया के माध्यम से मालूम होती हैं जो समाज में सनसनी व भय फैलाने का कार्य करती हैं अंत में वो सारी की सारी सूचनाएं ग़लत साबित होती हैं । नागरिक उस ...

प्रभु (दशरथ) चावला की राम कहानी

आलोक तोमर कहानी अब नए-नए मोड़ लेती जा रही है। तत्कालीन पाकिस्तान के डेरा गाजीखान से दो साल का एक बच्चा विभाजन के दौरान शरणार्थी के तौर पर माता पिता के साथ भारत आया था। जमुना पार में झिलमिल कॉलोनी में परिवार को एक छोटा सा घर मिला। यह बालक अब प्रधानमंत्रियों और कैबिनेट सचिवों के साथ उठता बैठता है और दिल्ली के पुलिस कमिश्नर उसके फोन पर लगभग खड़े हो कर बात करते है। जानने वाले बताते हैं कि बच्चा बड़ा हुआ और देशबंधु कॉलेज, कालका जी से पढ़ाई करने के बाद पहले एक कॉलेज में पढ़ाया और फिर पत्रकार बन गया। ऐसे भी बहुत सारे लोग हैं जिन्होंने इस बच्चे यानी प्रभु चावला को झिलमिल कॉलोनी की रामलीला में दशरथ की भूमिका करते देखा था। लेकिन प्रभु चावला सिर्फ मंच तक ही दशरथ रह गए। बेटे अंकुर को राम नहीं बना पाए। सीबीआई की फाइलों में अंकुर चावला का नाम अमर उजाला दलाली प्रकरण के एक दलाल के तौर पर दर्ज है। अब आपको बताते हैं अमर उजाला की कहानी। 1948 मे ही जब प्रभु चावला माता पिता की गोद में सीमा पार कर के दिल्ली पहुंचे थे, आगरा में स्वर्गीय डोरी लाल अग्रवाल और स्वर्गीय एम एल माहेश्वरी ने मिल कर अमर उजाला ...

किसी खजाने से कम नहीं हैं ये किताबें..

महंगी किताबों की दुनिया में अब एक नया पन्ना जुड़ने जा रहा है। क्रिकेट लीजेंड बन चुके सचिन तेंडुलकर पर लिखी गई किताब अब दुनिया की महंगी किताबों को टक्कर देने के लिए तैयार है। महंगी मूल प्रतियों और कीमती हस्ताक्षरों वाली किताबों के बीच यह किताब कहां होगी जानने की कोशिश की डीबी स्टार ने। शेक्सपियरः माना जाता है कि सबसे बेहतरीन प्लेराइटर शेक्सपियर द्वारा हस्ताक्षरित सिर्फ 6 प्रतियां ही अब दुनिया में बची हैं। जाहिर है इसके चलते अब इन प्रतियों की कीमत भी कम नहीं है। सबसे महंगे ऑटोग्राफ के तौर पर माने जाने वाले शेक्सपियर के हस्ताक्षरों को 5 मिलियन डॉलर से ज्यादा का अांका जाता है। मजे की बात यह है कि उनकी मेनुस्क्रिप्ट पर उनके साइन मिलना मुश्किल है लेकिन सौदों से जुड़े दूसरे दस्तावेजों में ये मिल जाते हैं। उनके 1623 में प्रकाशित फस्र्ट फोलियो के प्रथम संस्करण को 5.1 मिलियन डॉलर में खरीदा गया और अब इसकी कीमत कई गुना है। बिल ने खरीदी कोडेक्स लिसेस्टरः बिल गेट्स ने लियोनाडरे द विंसी की कोडेक्स लीसेस्टर खरीदी जिसकी कीमत 30.8 मिलियन डॉलर रखी गई थी। इसमें ओरिजनल ड्राइंग, नोट्स और स्कैच भी शामिल हो...

लो क सं घ र्ष !: कलंक दिवस है आज

6 दिसम्बर 1992 को नियोजित तरीके से अयोध्या में बाबरी मस्जिद को तोड़ डाला गया था । भारतीय संविधान के अनुसार देश धर्म निरपेक्ष है और सभी को अपना धर्म मानने उपासना करने का संवैधानिक अधिकार है । देश के अन्दर एक छोटा सा तबका जो पहले ब्रिटिश साम्राज्यवाद से संचालित होता था और अब अमेरिकन साम्राज्यवाद से संचालित होता है। साम्राज्यवादियों के इशारे पर देश कि एकता और अखंडता को कमजोर करने की नियत से यह प्रलाप करता है कि वह देश का यह स्वरूप बदल कर एक ऐसे धार्मिक राष्ट्र के रूप में तब्दील कर देना चाहता है कि जिससे वर्तमान देश का स्वरूप ही न बचा रहे । ऐसे तत्वों ने देश के अन्दर गृहयुद्ध करवाने के लिए बाबरी मस्जिद विवाद खड़ा किया था । देश धार्मिक विवाद में फंसा रहे और उसकी प्रगति रुकी रहे जिससे देश साम्राज्यवादी ताकतों के सामने खड़ा न हो सके । इस विवाद से आज तक मुक्ति नही मिल पायी है और हम आर्थिक रूप से भी कमजोर हुए है और हमारी प्रगति बाधित हुई है । देश का वर्तमान स्वरूप 15 अगस्त ...