Skip to main content

Posts

नव गीत: सागर उथला / पर्वत गहरा... संजीव 'सलिल'

नव गीत: संजीव 'सलिल' सागर उथला, पर्वत गहरा... * डाकू तो ईमानदार पर पाया चोर सिपाही. सौ पाए तो हैं अयोग्य, दस पायें वाहा-वाही. नाली का पानी बहता है, नदिया का जल ठहरा. सागर उथला, पर्वत गहरा... * अध्यापक को सबक सिखाता कॉलर पकड़े छात्र. सत्य-असत्य न जानें-मानें, लक्ष्य स्वार्थ है मात्र. बहस कर रहा है वकील न्यायालय गूंगा-बहरा. सागर उथला, पर्वत गहरा... * मना-मनाकर भारत हारा, लेकिन पाक न माने. लातों का जो भूत बात की भाषा कैसे जाने? दुर्विचार ने सद्विचार का जाना नहीं ककहरा. सागर उथला, पर्वत गहरा... *

वाजपेयी का मुखौटा या संघ का खिलौना

आशुतोष मैनेजिंग एडिटर ibn7 लिब्रहान कमीशन ने अयोध्या का सच सामने लाने में 17 साल लगाए और इसको लेकर उसकी जी भर के आलोचना की जानी चाहिए। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद ये भी लगता है कि कमीशन ने कांग्रेस लीडरशिप को भी जाने अनजाने बचाने की कोशिश की है। वो नरसिंहराव को जिम्मेदारी के बोझ से मुक्त कर देती है लेकिन पूरी रिपोर्ट ने सबसे ज्यादा चौंकाया अटल बिहारी वाजपेयी को अयोध्या मामले में घसीट कर। इस वजह से हिंदूवादियों और कुछ भ्रमित सेकुलरवादियों को मिर्ची लगी हैं। वो इसी आधार पर जस्टिस लिब्रहान की मंशा और विवेक पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। कमीशन बड़े दिलचस्प अंदाज में वाजपेयी को 'स्यूडो-माडरेट' बताती है। यानी वो शख्स जो दिखने में तो उदारवादी है पर हकीकत में उदारवाद का ढोंग कर रहा है, वो 'छद्म -उदारवादी' है। पेज 942, पैरा 166.6 में रिपोर्ट लिखती है 'आडवाणी, वाजपेयी, जोशी को संघ परिवार की साजिश पता न हो ये नही माना जा सकता है। '...पैरा 166.7 'ये नेता संघ परिवार का आदेश न मानने की हिम्मत नहीं सकते थे, विशेषकर आरएसएस का आदेश। ऐसा करने की कीमत थी बीजेपी और सार्वजनिक जीवन से...

लो क सं घ र्ष !: लोकतंत्र जिसका गुन अमेरिका गाता है

अमेरिका ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई को चेताविनी दी है कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ व अच्छे काम- काज के नतीजे जाहिर करो अन्यथा उनकी जगह कोई और लेगा । अमेरिका जिसके पास पूरी दुनिया में लोकतंत्र कायम करने का ठेका है वह अब लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकारों के नेताओं को यह बताएगा कि तुम्हारा काम काज ठीक नही है । तुम्हारी जगह पर हम दूसरे व्यक्ति को नेता नियुक्त करेंगे । जनता द्वारा किसी भी चुनी गई सरकार को हटाने का हक़ जनता को ही होता है लेकिन साम्राज्यवादियों के अगुआ अमेरिका ने पूरी दुनिया के अधिकांश राष्ट्राध्यक्षों को अपना नौकर समझ रखा है और धीरे - धीरे वह जनता को भी गुलाम समझने लगा है । अमेरिकां साम्राज्यवादी दुनिया में लोगों को लोकतंत्र का सपना दिखाते हैं और उसके बहाने वह उस देश को गुलाम बनने कि रणनीति बनाते हैं । अफगानिस्तान में हामिद करजई कि सरकार उनकी पिट्ठू सरकार है ही और अब जब अफगान समस्या का समाधान नही कर पा रहे...

लो क सं घ र्ष !: हिन्दी राष्ट्रीय भाषा नही है ?

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा मानने से इनकार कर दिया है और उन्होंने कहा है की हिन्दी राष्ट्रीय भाषा नही है अपितु सरकारी भाषा है । यह बात शिव सेना , मनसे के अतिरिक्त किसी अन्य ने कही होती तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ , भाजपा सहित उनखे तनखैया पत्रकारों का हिन्दी प्रेम जाग्रत होकर एक उन्माद पैदा करने का कार्य कर रहे होते चूँकि , मामला उन्ही लोगों से सम्बंधित है , इसलिए उनका हिन्दी प्रेम नदारद है । हमारा पहले से ही सुस्पष्ट विचार है की ऐसे तत्व विघटनकारी तत्व हैं जो देश की एकता और अखंडता को कभी धर्म के नाम पर , कभी जाति के नाम पर , कभी भाषा के नाम पर , कभी प्रान्त के नाम पर नष्ट करना चाहते हैं । आज जरूरत इस बात की है कि ऐसे तत्वों को चिन्हित किया जाना आवश्यक है । सुमन loksangharsha . blogspot .com

भारत को कूड़ा घर बनाया

ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने भारत को कूड़ा घर बनाया। साम्राज्यवादी देशों ने सोमालिया में अपने वहां का कूड़ा डालना शुरू कर दिया जिससे पूरे देश में संक्रामक बीमारियाँ फ़ैल गयीं, जिससे काफ़ी लोग मरे। जैव विविधता भी नष्ट हो गई , पूरे देश में भुखमरी की स्तिथि में आज वहां के लोग समुद्री डाकू बन गए हैं। उसी तरह लन्दन म्यूनिसिपिल कार्पोरेशन का उन्नीस कंटेनर कूड़ा दिल्ली के निकट दादरी में पकड़ा गया है । विकसित देश अपने यहाँ के इलेक्ट्रोनिक कचरे से लेकर अन्य कचरों को भारत में भेजकर इस देश को कूड़ा घर बना देना चाहते हैं और इस देश को सोमालिया जैसा कर देना चाहते हैं। आज जरूरत इस बात की है कि साम्राज्यवादी शक्तियों का कदम कदम पर अगर मुंहतोड़ जवाब नही दिया जाएगा तो यह लोग अपने शैतानी हरकतों से हमारे देश को बरबाद कर देंगे । सुमन loksangharsha.blogspot.com

लो क सं घ र्ष !: भारत को कूड़ा घर बनाया

ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने भारत को कूड़ा घर बनाया। साम्राज्यवादी देशों ने सोमालिया में अपने वहां का कूड़ा डालना शुरू कर दिया जिससे पूरे देश में संक्रामक बीमारियाँ फ़ैल गयीं, जिससे काफ़ी लोग मरे। जैव विविधता भी नष्ट हो गई , पूरे देश में भुखमरी की स्तिथि में आज वहां के लोग समुद्री डाकू बन गए हैं। उसी तरह लन्दन म्यूनिसिपिल कार्पोरेशन का उन्नीस कंटेनर कूड़ा दिल्ली के निकट दादरी में पकड़ा गया है । विकसित देश अपने यहाँ के इलेक्ट्रोनिक कचरे से लेकर अन्य कचरों को भारत में भेजकर इस देश को कूड़ा घर बना देना चाहते हैं और इस देश को सोमालिया जैसा कर देना चाहते हैं। आज जरूरत इस बात की है कि साम्राज्यवादी शक्तियों का कदम कदम पर अगर मुंहतोड़ जवाब नही दिया जाएगा तो यह लोग अपने शैतानी हरकतों से हमारे देश को बरबाद कर देंगे । सुमन loksangharsha.blogspot.com