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लो क सं घ र्ष !: सरकारी गुन्ड़न से बंधू , बोलौ कैसे जान बची॥

नेता पुलिस दुऔ हत्यारे ,कैसे मान सम्मान बची। सरकारी गुन्ड़न से बंधू, बोलौ कैसे जान बची ॥ नेता जी सत्ता के बल पर, घर औ जमीन हथियाय रहे। जो करें शिकायत थाने पर, थानेदारो लातियाय रहे ॥ असहाय गरीब किसानन कै, अब कैसे खेत मकान बची। सरकारी गुन्ड़न से बंधू, बोलौ कैसे जान बची ॥ अपराधी चोर लुटेरा अब, सत्ता कै दामन थाम रहे। औ बड़े-बड़े आइ ए एस , सब उनका ठोक सलाम रहे ॥ कैसे देश की महिमा, कैसे देश कै गौरव गान बची। सरकारी गुन्ड़न से बंधू, बोलौ कैसे जान बची ॥ जहाँ देखो ठेकेदारन कै, बस अब तौ तूती बोल रही। माफिया कै नजर भाई टेढी , अफसरन कै कुर्सी डोल रही॥ कैसे ई दूषित समाज से, भारत कै पहिचान बची। सरकारी गुन्ड़न से बंधू , बोलौ कैसे जान बची॥ ईमानदार अधिकारीं का सत्ता कै गुंडे डांट रहे। भष्टाचारी अफसर नेता, सब मिलिकै बन्दर बाँट रहे॥ सीधे साँचे अधिकारिन कै , अब कैसे ईमान बची। सरकारी गुन्ड़न से बंधू , बोलौ कैसे जान बची॥ मोहम्मद जमील शास्त्री

लो क सं घ र्ष !: अनगिनत नाम बंधन के

नियति ,कर्म या भाग्य ईश, अनगिनत नाम बंधन के। अनचाहे ही अनुबंधित, है सारे जीव जगत के ॥ यह धरा स्वर्ग हो जाए, क्या मानव जी पायेगा । पतझड़ में कलिका फूले , क्या सम्भव हो पायेगा ॥ पुष्पों को तोड़ पुजारी , साधना सफल करता है। पाषाण ह्रदय का मन भी, क्या उसे ग्रहण करता है॥ डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही'

''हिन्दुस्तान का दर्द'' के सभी लेखकों एवं पाठकों को संजय सेन सागर का नमस्कार

हिन्दुस्तान का दर्द के सभी लेखकों एवं पाठकों को संजय सेन सागर का नमस्कार,एक लम्बा अरसा गुजार गया आप लोगों से इम्तियान से चर्चा नहीं कर सका जिसका मुझे तहे दिल से खेद है..मे तो हमेशा आप लोगों से चर्चा करना चाहता था ओर मैं बार बार ब्लॉग पर आया भी लेकिन समय ना दे सका... हिन्दुस्तान के दर्द की बात करने वाले इतने दिल वाले तो होते ही है की मुझे माफ़ कर सके तो आशा मुझे माफ़ी मिल जायेगी! तो ना आने की बजह और सुन लीजिये दरअसल फिल्म अभिनेता कुणाल कपूर जी मेरे सागर जिले मे आये थे और काफी चर्चा के बाद एक फिल्म लिखनी थी उनके लिए..फिल्म लगभग पूरी लिखी जा चुकी है कुछ काम बाकी है..लेकिन अब मे फुर्सत हूँ तो अब तो आता ही रहूँगा..आप लोग भी आते रहिये..और जैसे ही फिल्म बनती है आप सबको खबर कर दूंगा ठीक है तो .. जय हिन्दुस्तान -जय यंगिस्तान आपका संजय सेन सागर आगे पढ़ें के आगे यहाँ

चले आओ भैया पियारे की हे जी॥(अवधी)

बहिनी पियारी चिठिया लिख भेजय .. चले आओ भैया पियारे की हे जी॥ कैसे के आई बहिनी tohare के देशवा॥ प्यास लगी बड़ी जोर की हे जी॥ गलियां गलियां भैया कुअना खोदौबय॥ घुततघुटा चले आयो की हे जी॥ बहिनी पियारी चिठिया लिख भेजय ॥ चले आओ भैया पियारे की हे जी॥ kaisen की आई बहिनी तोहरे के देशवा॥ भूख लगे बड़ी जोर की हे जी ॥ गलियां गलियां भैया जेवना प्रोस्बय॥ जेवत जेवत चले आओ की हे जी॥ बहिनी पियारी चिठिया लिख भेजय .. चले आओ भैया पियारे की हे जी॥

लो क सं घ र्ष !: प्रतिरोध के नये क्षेत्र: साहित्य, दलित और मुस्लिम दलित

हिन्दी में दलित-साहित्य का इतिहास साहित्य की जनतांत्रिक परम्परा तथा भाषा के सामाजिक आधार के विस्तार के साथ जुड़ा हुआ है। इसे सामंती व्यवस्था के अवसान, जो निश्चित ही पुरोहितवाद के लिए भी एक झटका साबित हुआ तथा समाज में जनतांत्रिक सोच के उदय, भले ही रूढ़िग्रस्त ही क्यों न हो, के साथ ही प्रजातांत्रिक शासन-व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में भी देखा जा सकता है। यहाँ हम यह स्वीकार करते चलें कि अन्यायपरक वर्ण-व्यवस्था पर आघात-दर-आघात करने वाला कविता का भक्ति-आंदोलन, ज्योतिबा फुले द्वारा आरम्भ किया गया सामाजिक पुनर्निर्माण का ऐतिहासिक अभियान, वर्ण-व्यवस्था के जुल्म से निजात पाने की इच्छा तथा प्रतिरोधस्वरूप बड़ी संख्या में संभव हुआ धर्मांतरण-जैसी दूरगामी प्रभावों वाली घटनाएँ सामंती व्यवस्था के काल में ही घटित हुई। भारतीय समाज, उसमें भी ज़्यादा अकल्पनीय दमन से त्रस्त दलित वर्ग को महामुक्ति के चिरस्मरणीय दूत के रूप में बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर का मिलना (मुक्ति-पथ पर जिनके कदमों के निशान बहुत गहरे हैं) एक सामंत का ही अवदान है। मानववादी उदारता से उपजी सहानुभूति की यह प्रवृत्ति ही साहित्य में भी...

नए फ्लेवर में नशे के बाजीगर परोस रहे है धुम्रपान का सामान " हुक्का रेस्टोरेंट "

आप सभी को याद होगी गाँधी जयन्ती 2 अक्तूबर, 2008 से पूरे देशभर में अधिसूचना जारी कर ‘सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान’ को प्रतिबंधित कर सरकार ने धुम्रपान करने वालो की शामत ला दी थी ,आज वही सरकार धूम्रपान की हिमायती बन नशे के बाजीगर के साथ मिल कर लोगों की जेबे निचोड़ने नए जुगाड़ में लगी है ऐसा मै नहीं कहता सरकारी आदेशो की धज्जिया उडाते , नियम कानून को ताक पर रख मुह चिढ़ते " हुक्का रेस्टोरेंट " जो हिन्दुस्तान के पाश ईलाके से लेकर ,गली कूचो में धड्ले से चलाये जा रहे उनको देख के तो कम से कम यही कहा जा सकता है , जब हर तरफ धूम्रपान’ के प्रतिबंधित का प्रयास कर स्मोक फ्री जोन बनाने की पहल जा रही हो ऐसे में खुले आम " रेस्टोरेंट " की आड़ में " हुक्का रेस्टोरेंट " स्मोक फ्री जोन बनाने की बात करने और प्रयास में जुटे लोगो के मुह में तमाचा है गाँधी जयन्ती 2 अक्तूबर, 2008 से पूरे देशभर में अधिसूचना जारी कर जीएसआर 417 (ई) दिनांक 30 मई, 2008 के अनुरूप केन्द्र सरकार ने ‘सार्वजनि...
सभी सबुद्ध जनों को मेरा प्रणाम, दरअसल आज अपनी रचना के बहाने मैं इस वृहद् मंच के सहयोग की आशा लिये, एक बात बाँटना चाह रहा हूँ, मित्रो एक छोटी अशासकीय संस्था है 'सुकून' जो नई दिल्ली के कुछ छात्रों द्वारा शुरू की गयी हैं जिसने अपनी लक्ष्य साधना अपने शब्दों में कहूँ तो देश की सामजिक एक आर्थिक सबलता को कसौटी पर रख कर शुरू की हैं.उनके कार्य और उद्देश्य ने मुझे भी खासा प्रभावित किया और मैं भी इस संस्था के साथ जुड़कर संकल्प यात्रा में लग गया. मित्रो हमारी संस्था का उद्देश्य लोगो में 'स्वयंसेवा' का भाव जगाना हैं,मेरा खुद भी यही मानना हैं की विकास फिर भले वो किसी भी स्तर का हो प्रादेशिक,राष्ट्रीय या फिर अंतर्राष्ट्रीय अपनी सबसे बड़ी मांग रखता हैं स्वयं सेवा या कहे जागरूकता. क्यूंकि कोई भी इन्सान जितनी श्रेष्ठता से स्वयं की मदद कर सकता हैं,दूसरा कोई उसके लिए नहीं कर सकता, हमारा लक्ष्य भी यही हैं ,की सभी व्यक्ति अपने कर्तव्यो के प्रति जागरूक हो,और इस संकल्प यज्ञ में अपनी आहुति दे,और उन्हें सिर्फ एक काम दिया जाये की वे समाज की सबसे छोटी इकाई पर अति महत्वपूर्ण इकाई जो की उनकी एकात्म...