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मैं अभी कुछ दिन तक नहीं लिखूंगा !!!!!

प्रि ये दोस्तों, पाठको और आलोचकों सबको मेरा प्यार भरा सलाम, बड़े दुःख के साथ मुझे आप लोगो को सूचित करना पड़ रहा है की कुछ दिनों के लिए मुझे अपने प्रिये ब्लॉग से दूर रहना पड़ेगा.... पता नही कुछ दिनों से लगातार सर मे दर्द था डॉक्टर को दिखाया तो उसने सारी बात बताने के बाद एक शिफुगा छोड़ दिया की मैं बिल्कुल अपने कंप्यूटर से दूर रहूँ। यह सुनने के बाद मेरे पिताजी ने साफ़ तौर पे कह दिया की आप कंप्यूटर रूम आगे पढ़े ....

धार्मिक स्थल पर भी वेश्यावृत्ति

sahiba kuershi सीबीआई के निदेशक अश्विनी कुमार ने देश में बढ़ते सेक्स पर्यटन पर चिंता जताते हुए कहा है कि धार्मिक स्थल भी इसके असर से अछूते नहीं रह गए हैं। देश के धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर इस अपराध (सेक्स पर्यटन व वेश्यावृत्ति) का प्रभाव देखा जा रहा है। ‘संगठित अपराध और मानव तस्करी’ विषय पर यहां आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के दौरान उन्होंने कहा कि देश में पिछले कुछ वर्र्षो में सेक्स पर्यटन (जिसमें अधिकांश बच्चों से जुड़े मामले शामिल हैं) और वेश्यावृत्ति तेजी से अपराध के रूप में उभर कर सामने आए हैं। अश्विनी कुमार ने कहा कि मानव तस्करी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध माना जाता है। इसमें भारत का अपना एक अलग स्थान है। वह इस अपराध के स्रोत व गंतव्य दोनों के तौर पर जाना जाता है। यहां पर सप्लायर और कस्टमर दोनों ही बड़ी संख्या में मौजूद हैं। यहां ८५ फीसदी मानव तस्करी घरेलू मांग पूरी करने के लिए की जाती है। उन्होंने डांस बार्स पर हुई कार्रवाई को जायज ठहराते हुए कहा कि इससे बच्चों व महिलाओं की तस्करी पर रोक लगी है। सेमिनार का उद्घाटन करने वाले केंद्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता ने कहा कि मानव तस...

Loksangharsha: यह क्या है ? -2

भाजपा और आर्गनाइज़र की इस गोल - गोल जलेबी का , जिसे वह बड़ा ही सम्मानजनक दार्शनिक - वैचारिक रूप देने का प्रयत्न कर रहे है , मतलब अगर साफ़ - सीधी वैचारिक - राजनैतिक भाषा में निकला जाए तो इस प्रकार है - भारत की सभ्यता और संस्कृति केवल हिन्दुओं ने बनाई (वह भी केवल उपरी वर्णों /जातियों ने क्योंकि निचली और अछूत जातियों को तो भाजपा पसंद नही करता!) ,भारत में कोई मिलीजुली संस्कृति सभ्यता नही,आजादी के बाद भारत ने धर्मनिरपेक्षता और सर्वधर्म समभाव के रास्ते पर चलकर भारी गलती की और जनता की संवेदनाओ को ठेस पहुंचाई और इसी देश में आतंकवाद और सम्प्रदायवाद पैदा हुआ! होना यह चाहिए था की देश के शासको को भाजपा-मार्का सम्प्रदायवाद अपनाना चाहिए था । इस प्रकार भाजपा - आर एस एस बड़ी चालाकी से एक जटिल और पाखंडपूर्ण विचार प्रणाली के रूप में अपनी सांप्रदायिक , विभाजनकारी विचारधारा विकसित करने की कोशिश कर रही है । उसे बड़ी चालाकी से इस प्रकार पेश किया जा रहा है की असलियत का पता भी न चले और असली मूल दक्षिणपंथी प्रतिक्रिया का सांप्रदायि...

Loksangharsha: छूट गया बचपन

उम्र की सीढिया चढ़ते हुए , जाने कब किस सीढ़ी पर छूट गया बचपन । मन पर बङ्प्पन के खोल चढाकर चला आया हूँ मैं इतनी दूर फिर भी क्यों टीस उठती है बार - बार , उस बिछङे हुए बच्चे की याद ? बीते हुए बचपन में फिर फिर लौट जाने की क्यों होती है चाह ? अकेले में , जब कभी आईने के सामने , खुशी में त्यौहार में , कभी - कभी भीड़ के सामने , कहाँ से प्रकट हो जाता है वह ? पलके झपकते , मुहँ चिढाते , बच्चो के साथ फिर से बच्चा बना देता है मुझे । जब भी कोई खुशी असह्य दुःख गहरा , उतार देता है बङप्पन का नकाब पल दो पल के लिए बाहर निकल आता है बचपन लेकिन बाकी सारे समय , दिल के किसी अंधेरे कोने में किसके डर से छिपा रहता है वह ? छटपटाता , कसमसाता रहता है बचपन । - अनूप गोयल

ख़तरनाक 'सेक्सुअल टेरेरिस्ट' हैं खुशवंत सिंह !

अतुल अग्रवाल अतुल अग्रवाल और खुशवंत सिंह का बहुत गहरा नाता होता जा रहा है,जहा एक जाना जाता है फालतू की बकबास और अश्लीलता के लिए तो दूसरा जाना जाता है उसके विरोध के लिए.जी हाँ हम बात कर रहे है अतुल अग्रवाल जी की जिन्होंने खुशवंत सिंह के गैर सामाजिक लेखों का एक सटीक शैली में विरोध किया था..तो आपके सामने एक बार फिर हाजिर है उसी सटीकता के साथ लिखा गया एक और लेख इस मुद्दे पर आप अपनी राय दे सकते है की क्या सच में खुशवंत सिंह कुछ अच्छा काम कर रहा है या फिर अतुल अग्रवाल का विरोध करना नाजायज है?आकी राय को प्रकाशित किया जायेगा! मशहूर लेखक खुशवंत सिंह सुधर नहीं सकते। अब मुझे इसका यकीन हो चला है। कहते हैं उम्र के आखिरी पड़ाव में इंसान भगवान को याद करता है और पूजा-पाठ तथा ईश-भक्ति कर अपने पापों के लिए क्षमा मांगता है ताकि उसका परलोक सुधर सके। लेकिन यहां तो उल्टी ही गंगा बह रही है। क्षमा मांगने की तो छोड़िए जनाब, पाप पर पाप किए जाने की लत लगातार बदतर होती जा रही है। दिन-ब-दिन वयोवृद्ध लेखक की ठरक नई-नई हदें बनाती और लांघती जा रही है। ऐसा लग रहा है कि 93 साल की इस कंपकंपाती उम्र में खुशवंत सिंह साहब...

Loksangharsha: दूरियां घट सके वो मिलन कीजिये...

दूर के श्यामघन कुछ जतन कीजिये । दूरियां घट सके वो मिलन कीजिये ॥ आह मेरी स्वयं में मिला लीजिये । अश्रु के सिन्धु से जीवनी लीजिये । पीर की बांसुरी पर थिरक जाइये - पात तृन डालियों को हिला दीजिये । तय इतना तृप्ति आत्मा में मेरी - शान्ति का सार अभिनव ग्रहण कीजिये ॥ हो गए युग कई तन भिगोते हुए । दौड़ते - दौड़ते कुछ संजोते हुए । तब फुहारों ने मन को छुआ तक नही - प्यासी बदरी से बादर लजाते हुए । घोर गर्जन का संताप मत दीजिये - प्रीत परतीत सुंदर सुमन कीजिये ॥ जग समझता सही आप का मर्म है । दान देना सदा आप का कर्म है । बिज़लियो को संभालना सिखा दीजिये - घोसलों को बचाना बड़ा धर्म है । जग में हर और जीवन सजाते हुए - विश्व के पाप का कुछ गम न कीजिये ॥ डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल '' राही ''

सईद मलीहाबादी, अभिज्ञात और स्वर्ण ओबराय को कौमी एकता अवार्ड

कोलकाताः आल इंडिया कौमी एकता मंच की ओर से 9 मई शनिवार की देर शाम स्थानीय कला मंदिर सभागार में पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उर्दू दैनिक आज़ाद हिन्द के सम्पादक सईद मलीहाबादी, साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए अभिज्ञात और कैंसर चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए इंडियन कैंसर सोसाइटी की चेयरपर्सन स्वर्ण ओबराय को कौमी एकता अवार्ड प्रदान किया गया। हालांकि सईद कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो पाये। अभिज्ञात को प्रख्यात उर्दू साहित्यकार डॉ.लुत्फुर रहमान और ओबराय को ओएनजीसी-राजामुंदरी के कार्यकारी निदेशक आफताब अहमद खान ने स्मृति फलक, मानपत्र, शाल व गुलदस्ता प्रदान कर सम्मानित किया। स्वतंत्रता सेनानी सुरेश चंद्र मैत्र और गुरुदास गाइन को भी इस समारोह में संवर्ध्दना दी गयी। इस अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा और कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आये नामचीन रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से लोगों का मन मोह लिया जिसमें डॉ.कलीम कैसर (बलरामपुर), डॉ.सुरेश (लखनऊ), दिनेश दर्पण (इंदौर), तश्ना आज़मी (आज़मगढ़), सुनील कुमार तंग (सिवान), श्यामा सिंह सबा (रायबरेली), ताकीर ग़ज़ल, शिखा...