Skip to main content

उत्तराखण्ड सरकार की नजर में- क्रान्तिकारी अभी भी आतंकवादी

उत्तराखण्ड सरकार की नजर में- क्रान्तिकारी अभी भी आतंकवादी


स्वतंत्रता प्राप्ति के 67 वर्ष बाद भी स्वतंत्र भारत में आज भी उत्तराखण्ड सरकार क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहकर संबोधित करती है। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी, उत्तराखण्ड-263139 द्वारा बी.ए. द्वितीय वर्ष के लिए प्रकाशित इतिहास की पाठयपुस्तक BAHI202 भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, जो मई 2013 में प्रकाशित की गई है; में पृष्ठ संख्या 71 से 73 में बंगाल विभाजन के खिलाफ संघर्ष करने वाले क्रान्तिकारियों को आतंकवादी लिखा गया है। अनुच्छेद 4.5.3 क्रान्तिकारी आतंकवाद के अन्तर्गत स्पष्ट रूप से लिखा गया है- ‘‘क्रान्तिकारी आतंकवादियों का मानना था...........................।’’
     अगले अनुच्छेदों में प्रमोथ मित्तर, जतीन्द्रनाथ बनर्जी, बारीन्द्रकुमार घोष,ज्ञानेन्द्रनाथ बसु, सरला घोषाल, अरबिन्दो, भूपेन्द्रनाथ दत्त, हेमचन्द्र कानूनगो, खुदीराम बोस तथा प्रफुल्ल चाकी जैसे क्रान्तिकारियों के नामों का उल्लेख भी किया गया है।
    केन्द्रीय विद्यालयों में भाषा को मुद्दा बनाने से हटकर  क्या हम क्रांतिकारियोँ को न्याय दिलाने की ओर ध्यान देकर अभियान चलाकर क्रान्तिकारियों को आतंकवादी लिखने से बचा सकते हैं?

Comments

Popular posts from this blog

हाथी धूल क्यो उडाती है?

केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

चेतन आनंद/नेपाल-बवाल

समसामयिक लेख- नेपाल का बवाल भारत के लिए खतरा?                   नेपाल का बवाल भारत के लिए कई स्तरों पर खतरा साबित हो सकता है। यह खतरा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है। भारत और नेपाल की खुली सीमा (लगभग 1,770 किमी) से आतंकवादी, माओवादी या अन्य असामाजिक तत्व आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर नेपाल के माध्यम से भारत पर दबाव बना सकता है। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से चीन को अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलता है। चीन की बेल्ट एेंड रोड इनिशिएटिव और अन्य परियोजनाओं से नेपाल में उसकी रणनीतिक स्थिति भारत के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा विवाद जैसे लिपुलेख, कालापानी, लिम्पियाधुरा को भड़काकर नेपाल की राजनीति भारत विरोधी हो सकती है। नेपाल में बढ़ती राष्ट्रवादी राजनीति भारत के खिलाफ माहौल बना सकती है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते प्रभावित होंगे। भारत-नेपाल के बीच व्यापार और ऊर्जा परियोजनाएँ बाधित हो सकती हैं। नेपाल में अस्थिरता का अस...