समसामयिक लेख- नेपाल का बवाल भारत के लिए खतरा? नेपाल का बवाल भारत के लिए कई स्तरों पर खतरा साबित हो सकता है। यह खतरा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है। भारत और नेपाल की खुली सीमा (लगभग 1,770 किमी) से आतंकवादी, माओवादी या अन्य असामाजिक तत्व आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर नेपाल के माध्यम से भारत पर दबाव बना सकता है। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से चीन को अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलता है। चीन की बेल्ट एेंड रोड इनिशिएटिव और अन्य परियोजनाओं से नेपाल में उसकी रणनीतिक स्थिति भारत के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा विवाद जैसे लिपुलेख, कालापानी, लिम्पियाधुरा को भड़काकर नेपाल की राजनीति भारत विरोधी हो सकती है। नेपाल में बढ़ती राष्ट्रवादी राजनीति भारत के खिलाफ माहौल बना सकती है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते प्रभावित होंगे। भारत-नेपाल के बीच व्यापार और ऊर्जा परियोजनाएँ बाधित हो सकती हैं। नेपाल में अस्थिरता का अस...
न्यायपालिका की कार्य प्रणाली पर सवालियां निशान तो पहले से ही खड़े हुए हें, आज देश में करोड़ों की संख्या में मामले लंबित पड़े हुए hain . इसका कोई bhi hal khojane के liye pahal honi चाहिए लेकिन इसके लिए कौन से कदम और कैसे उठाये जा सकते हें. कितने जेल में सद रहे हें क्योंकि अभी तक उनकी सुनवाई ही शुरू नहीं हो पाई है और अपराधी बल्कि जाने माने अपराधियों के मामले कभी खुलते ही नहीं हें. राजस्थान न्यायालय में ये केस हो सकता है कि पहली बार संज्ञान में आ रहा हो लेकिन इस देरी और अन्याय के चलाते कितने लोग नैराश्य में डूब कर घर में आत्महत्या कर लेते हें या phir gumnami ka jeevan jeene के लिए majaboor हो jate हैं.
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