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क्यों झूठे अलख जगाते है...

क्यों झूठे अलख जगाते हो॥
भ्रष्टाचार को दूर करेगे ॥
हाय हाय चिल्लाते हो॥
क्यों झूठे अलख जगाते है॥
भूखे बच्चो के भोजन को॥
अपना कौर बनाते हो॥
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मजदूरों की गाढ़ी कमाई॥
को अपनी पूँजी कहलातइ हो॥
क्यों॥
मौक़ा मिलते लूट तुम लोगे॥
जो छुपा पडा खजाना॥
पल पल में तुम बात बदलते॥
देखते नया नज़ारा॥

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