Skip to main content

कडाके की ठंड लेकिन मजदूर सडकों पर रेनबसेरे नहीं

दोस्तों यह राजस्थान हे यहाँ चाहे केंद्र का कल्याणकारी आदेश हो चाहे हाईकोर्ट का कल्याणकारी आदेश हो बस सरकार ने जनता को न्याय नहीं देने का मानस बना लिया हे और इसीलियें ठिठुरती सर्दी में राजस्थान के गरीब लोग सडकों पर रात गुज़ारने को मजबूर हे । राजस्थान की हाईकोर्ट ने १५ वर्ष पूर्व इस मामले में एक आदेश जारी करते हुए सरकार को निर्देश दिए थे की वोह सडको पर रात गुज़ारने वाले गरीबों के लियें स्थायी रूप से रेनबसेरों की व्यवस्था करे जिसमे सर्दी में रजाई गदेले टीवी वगेरा की स्थायी पक्का भवन बना कर सुविधा दी जाये और गर्मी में कूलर वगेरा लगाकर इस सुविधा को स्थायी रूप से चालु रखा जाए , कोटा में ह्यूमन रिलीफ सोसाइटी की तरफ से कोटा न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर कोटा की सडकों पर रातों को भटक रहे गरीबों को रेनबसेरा देने के लियें आबिद अब्बासी एडवोकेट,पंकज लोढा और मुजीब आज़ाद की तरफ से मुकदमा पेश किया गया अदालत ने एक आदेश जारी कर कोटा कलेक्टर ,निगम मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पाबन्द किया एके एक वर्ष में वोह स्थायी रेनबसेरों की व्यवस्था लागू करें लेकिन कोटा के अधिकारीयों ने अदालत के आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाला और जनता को सडकों पर सर्दी और गर्मी में मरने के लियें छोड़ दिया पहले मिडिया थोडा चिल्लाया फिर मिडिया के भोंकते हीं उसके मुंह में विज्ञापन नुमा हड्डी के टुकड़े डाले और मीडिया यानि टी वी और अख़बार खामोश हो गये जनता की फरियाद लेकर अदालत पहुंचे आबिद अब्बासी एडवोकेट पंकज लोढ़ा की तरफ से मेने कलेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी को जेल भेजने का प्रार्थना पत्र पेश किया क्योंकि उन्होंने न्यायालय के आदेश की पालना नहीं की थी अधिकारीयों को क्यूँ जेल नहीं भेजा जाये इस मामले का नोटिस मिलते ही अधिकारी घबराए और उन्होंने मामले की अपील की अपील में मामला यथावत रहा लेकिन न्यायालय में उपस्थिति के लियें तहसीलदार और आयुक्त को निर्देश दिए गये इन सब के बावजूद भी कोटा नगर निगम ने आज तक भी कोटा में रेंब्सेरे स्थायी रूप से चालू नहीं किये हें और कोटा के अख़बार टी वी चेनल हें के उन्हें तो सडक पर ठंड की ठिठुरन से मरते लोगों का दर्द देखने को ही नहीं मिलता हे ना मजेदार बात राजस्थान में मुख्यमंत्री करोड़ों के विज्ञापन जयपुर के रेनबसेरों के लियें दे रहे हे लेकिन कोटा में कई सरकारें आयीं और कई चली गयीं लेकिन गरीबों के लियें आसरा स्थायी रेनब्सेरों की व्यवस्था नहीं की गयी हे इस मामले में विपक्ष भाजपा भी हाथ पर हाथ धर कर बेठा हे ।एक भाजपा के विधायक ओम क्रष्ण जी बिरला हें जो खुद बेचारे सडकों पर रातों को घूमते हें और ठंड से ठिठुरते लोगों को कपड़े जर्सी और कम्बल देते हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

Comments

Popular posts from this blog

हाथी धूल क्यो उडाती है?

केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

चेतन आनंद/नेपाल-बवाल

समसामयिक लेख- नेपाल का बवाल भारत के लिए खतरा?                   नेपाल का बवाल भारत के लिए कई स्तरों पर खतरा साबित हो सकता है। यह खतरा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है। भारत और नेपाल की खुली सीमा (लगभग 1,770 किमी) से आतंकवादी, माओवादी या अन्य असामाजिक तत्व आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर नेपाल के माध्यम से भारत पर दबाव बना सकता है। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से चीन को अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलता है। चीन की बेल्ट एेंड रोड इनिशिएटिव और अन्य परियोजनाओं से नेपाल में उसकी रणनीतिक स्थिति भारत के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा विवाद जैसे लिपुलेख, कालापानी, लिम्पियाधुरा को भड़काकर नेपाल की राजनीति भारत विरोधी हो सकती है। नेपाल में बढ़ती राष्ट्रवादी राजनीति भारत के खिलाफ माहौल बना सकती है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते प्रभावित होंगे। भारत-नेपाल के बीच व्यापार और ऊर्जा परियोजनाएँ बाधित हो सकती हैं। नेपाल में अस्थिरता का अस...