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संस्‍कृतम्-भारतस्‍य जीवनम् - सप्‍ताह विशेष ।।



प्रिय बन्‍धु 
आपके अपने संस्‍कृत जालपृष्‍ठ संस्‍कृतम्-भारतस्‍य जीवनम् पर इस सप्‍ताह प्रकाशित किये गये लेखों की सूची प्रस्‍तुत कर रहा हूँ ।
अपने आवश्‍यक सुझाव व अमूल्‍य टिप्‍पणियों के द्वारा हमारा उत्‍साह वर्धन करें ।

शुक्रवार, १२ नवम्बर २०१०

भूतकालस्‍य वाक्‍यनिर्माणप्रक्रिया - संस्‍कृतलेखनप्रशिक्षणम् ।


।। भूतकाल के सामान्‍य वाक्‍य बनाने की आसान प्रक्रिया ।।


बृहस्पतिवार, ११ नवम्बर २०१०

ओबामादेशाटनम् ।


ओबामा की भारत यात्रा पर विशेष लघु टिप्पणीवत् लेख श्री विष्‍णुकान्‍त मिश्र जी के द्वारा ।


भारतीय पवित्र ग्रन्‍थ वेदों में विज्ञान की एक और कडी ।




अग्रिम सप्‍ताह में कुछ नये लेखों के साथ पुन: पदार्पित होंगे ।
नमो नम:


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भवदीय: - आनन्‍द:

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केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

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समसामयिक लेख- नेपाल का बवाल भारत के लिए खतरा?                   नेपाल का बवाल भारत के लिए कई स्तरों पर खतरा साबित हो सकता है। यह खतरा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है। भारत और नेपाल की खुली सीमा (लगभग 1,770 किमी) से आतंकवादी, माओवादी या अन्य असामाजिक तत्व आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर नेपाल के माध्यम से भारत पर दबाव बना सकता है। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से चीन को अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलता है। चीन की बेल्ट एेंड रोड इनिशिएटिव और अन्य परियोजनाओं से नेपाल में उसकी रणनीतिक स्थिति भारत के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा विवाद जैसे लिपुलेख, कालापानी, लिम्पियाधुरा को भड़काकर नेपाल की राजनीति भारत विरोधी हो सकती है। नेपाल में बढ़ती राष्ट्रवादी राजनीति भारत के खिलाफ माहौल बना सकती है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते प्रभावित होंगे। भारत-नेपाल के बीच व्यापार और ऊर्जा परियोजनाएँ बाधित हो सकती हैं। नेपाल में अस्थिरता का अस...