सुख दुःख जीवन के दो पहिये के सम्मान हैं दोनों जीवन में रंग भरने का काम करते हैं अगर एक की भी कमी हो जाये तो हमारी तस्वीर अधूरी रह जाती है !इसलिए संसार में हर एक चीज़ अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है जब तक दुःख न आएगा हम सुख का अनुभव कर ही नहीं पाएंगे जब तक रोना न होगा तब तक हंसी का मज़ा चख ही नहीं सकते इसलिए हसना_ रोना , सुख_ दुःख इसी भीड़ से तो हमे मिलता है तो हम इससे दूर केसे रह सकते हैं !किसी एक का एहसास ही दुसरे के एहसास को बढाता है फिर गिला किस बात का दोस्तों दोनों ही तो अपने हैं शायद इसी का नाम जिंदगी है ! तो क्यु न इसे हंस के जिए और जिंदगी के हर रंग में रंग जाये जिससे किसी से गिला ही न हो और न ही कोई उमीद जो हर पल सपने दिखाती है और पूरा न होने पर दुःख दे जाती है तो निस्वार्थ भाव से जीते चले जाते हैं जिससे दुसरे को ख़ुशी दे सके और अकेले रहने की आदत भी पड़ जाये एक पंथ दो काज !
केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..
सार्थक, कई अर्थों को अपने में समाये हुई रचना , बधाई
ReplyDeleteजब तक दुःख न आएगा हम सुख का अनुभव कर ही नहीं पाएंगे जब तक रोना न होगा तब तक हंसी का मज़ा चख ही नहीं सकते ........
ReplyDeleteबिल्कुल सही लिखा है
जिन्दगी मे सुख ही सुख हो तो रब्ब किस्को याद रह्ता है......
आपका बहुत -२ धन्यवाद दोस्त जो आपने इस लेख को पढकर अपने विचार हम तक पहुचाये !
ReplyDeleteबहुत ही खूब....आपकी रचना ने काफी प्रभावित किया...
ReplyDeleteशुक्रिया दोस्तों !
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