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[संस्‍कृतं- भारतस्‍य जीवनम्] अग्रिम जनगणनार्थं एकं आवश्‍यकनिर्देश:



सर्वे भारतीयानां प्रति मम एकं निवेदनं अस्ति । यदि भवन्‍त: स्‍वीकरिष्‍यन्ति चेत् न केवलं संस्‍कृतस्‍य अपितु सम्‍पूर्ण भारतस्‍य, भारतीय संस्‍कृते: च कल्‍याणाय एव भविष्‍यति।
आगामी जनगणनायां सर्वे संस्‍कृतज्ञा: कृपया स्‍व मातृभाषास्‍थाने संस्‍कृतम् एव लिखेयु: तथा ये स्‍वकीयं अल्‍पसंस्‍कृतविज्ञ: इति मन्‍यन्‍ते तेषां प्रति मम कथनं अस्ति यत् वयं सर्वे दैनिक जीवने कस्‍याचित् अपि भाषाया: वाचने संस्‍कृत शब्‍दानां प्रयोग: कुर्म: एव । न केवल भारतीय भाषासु अपितु वैदेशिकभाषासु अपि संस्‍कृतस्‍य शब्‍दा न्‍यूनाधिका: गृहीता: एव सन्ति यथा आग्‍लभाषाया: गो शब्‍द:- इत्‍यस्‍य अर्थ: गमनं इति भवति खलु । गो इत्‍यस्‍य संस्‍कृत व्‍युत्‍पत्ति: गच्‍छति इति गो इति अस्ति
अत: यदि वयं संस्‍कृतम् इति अस्‍माकं मातृ अथवा द्वितीय भाषा इति लिखाम: चेत् न कापि हानि: अपितु लाभाय एव ।

अत्र मम किमपि दुराग्रह: नास्ति अपितु अहं केवलं अस्‍माकं भारतस्‍य, भारतीयसंस्‍कृते: च विषये एव चिन्‍तयन्  एवं निर्दिशामि ।
मम आशय: केवलं एष: एव यत् यत् सम्‍मानं वयं विदेशी भाषानां कृते दद्म: तत् सम्‍मानं अस्‍माकं भारतीय भाषाम् एव मिलेत इति ।
संस्‍कृत भाषा अस्‍माकं जननी चेत् यदि वयं अस्या: संरक्षणं न कुर्म: तर्हि अस्‍माकं दौर्भाग्‍यं एव ।

भवन्‍त: सर्वे मम निवेदनं स्‍वीकरिष्‍यन्ति इति आशामहे ।

हिन्‍दी भाषायां पठितुं अत्र बलाघात: करणीय:
।। भवतां आभार:।।


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