Skip to main content

लो क सं घ र्ष !: दिल मिले या न मिले, हाथ मिलाते रहिये

वाशिंगटन में अमेरिका ने जो परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन अप्रेल 10 के दूसरे सप्ताह में आयोजित किया, उसमें शरीक होकर स्वदेश वापसी से पूर्व हमारे प्रधानमंत्री ब्राजील की राजधानी ब्राजीलिया, ब्रिक (ब्रिक) सम्मेलन में भाग लेने हुतु पहुँचे, इस सम्मेलन में ब्राजील, रूसा, भारत एँव चीन के सुपर लीडरों ने भाग लिया। इस अवसर पर भारत एँव चीन ने सहयोग एँव मित्रता बढ़ाने के एक दूसरे से वादे किये, मनमोहन सिंह और चीन राष्ट्रपति हू जितांओ गर्मजोशी से हाथ मिलाते हुए दिखाये गये।
दूसरी ओर लगभग इसी समय हमारे विदेशमंत्री एस0एम0 कृष्णा, चीन से राजनयिक संबधों के दो दशक पूरे होने पर खुशी जाहिर करने बीजिंग गये। संबंधो को मजबूती हेतु गुलाम कश्मीर, वीजा विवाद और अरूणाचल प्रदेश में दखल अदांजी आदि मसलों को उठाया गया, परन्तु चीन नें कोई तवज्जो नहीं दी।
इसी समय चीनी दूतावास की ओर से विवादित नत्शी वीजा अरूणचल प्रदेश निवासी पेंबा तमांग को जारी किया गया जो राष्ट्रमंडल खेलो में निशानेबाजी का स्वर्ण पदक प्राप्त-करता रहे थे। जाहिर है कि भारत नत्थी वीजा के खिलाफ है, इसी हेतु निशाने बाज नें जाने से इन्कार किया।
हमारे प्रधानमंत्री विदेशी-मामलों के माहिर नहीं हैं, वे प्रख्यात अर्थ-शास्त्री हैं, ये और बात है कि भारतीय अर्थ-व्यवस्था को वह आश्वासनों के बावजूद अभी तक पटरी पर नहीं ला सके और उनकी अर्थ-नीति धनवानों को लाभ पहुँचाने वाली और अमेरिका द्युरी पर नाचने वाली है।
जहाँ तक विदेश-नीति की बात है, इस मोर्चे पर मनमोहन सिंह ने दो अपरिपक्क ब्यक्रियों को लगा दिया। थुरूर नें तो कई विवाद पैदा किये और निकाले गये। कृष्णा जी हर मोर्चे पर असफ़ल रहे। वर्तमान असफ़लता बीजिंग यात्रा की रही। तथा उनके सतकक्ष यंग नियामी नें कृष्णा की बातें दरकिनार कर दीं। यह वही समय था जब ब्राजीलिया में मनमोहन जी जिताओ से हाथ मिला रहे थे।
दिल मिले या न मिले, हाथ मिलाते रहिये।
किसी शायर द्वारा कही हुई पंक्ति में अगर इस प्रकार संशोधन कर दें, तो कैसा रहेगा ? दिल तो मिलता नहीं, बस हाथ हिलाते रहिये।

डॉक्टर एस.एम हैदर

Comments

Popular posts from this blog

हाथी धूल क्यो उडाती है?

केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

जूजू के पीछे के रियल चेहरे

हिन्दुस्तान का दर्द आज आपको बताने जा रहा है उन कलाकारों के बारे में जिनके काम की बदोलत ''जूजू'' ने सभी के दिलों मे जगह बना ली है..तो जानिए इन कलाकारों के बारे में और आपको यह जानकारी कैसी लगी अपनी राय से अबगत जरुर कराएँ बहुत ही क्यूट, अलग, और मज़ेदार से दिखने वाले जूजू असल में इंसान ही हैं, बस उनको जूजू के कॉस्टयूम पहना दिए गए है। पर ये करना इतना आसान नहीं था, जिस तरह का कॉस्टयूम और एक्ट शूट किए जाने थे उनमे हर मुमकिन कला और रचनात्मकता का प्रयोग किया जाना था। जूजू के पीछे के असल कलाकार कौन है आइये जानते हैं - प्रार्थना सुनिए विज्ञापन- इस विज्ञापन दो जूजू एक पेड़ से लटके दिखाए गए हैं और नीचे एक खाई है। उनमे से एक गिर जाता है और दूसरा अपना फोन निकलकर एक प्रार्थना सुनाता है जिस से की उस के दोस्त की आत्मा को शांति मिल सके। इस विज्ञापन में हैं ये दो कलाकार- रोमिंग विज्ञापन- इस में एक जूजू अपनी गर्लफ्रेंड को खुश करने के लिए फ़ोन पर उससे बातें करता रहता है चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने में हो। इस विज्ञापन में सबसे बड़ी चुनौती थी एफ्फिल टावर और पिरा...