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रतन टाटा की दलाली और दादागीरी

लोक तोमर 
हिन्दी पत्रकारिता में कालाहांडी के भूख की रिपोर्टिंग से चर्चा में आये आलोक तोमर आरोपों से घिरे रहनेवाले पत्रकार हैं. फिर भी सक्रियता में कोई कमी नहीं. लेखन के अलावा टीवी पत्रकारिता में सशक्त हस्ताक्षर के रूप में स्थापित. डेटनालाइन इंडिया और शब्दार्थ के संपादक


2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में रतन टाटा ने नीरा राडिया के जरिए दयानिधि मारन की बजाय ए राजा को संचार मंत्री बनवाने का उपाय किया था. नीरा राडिया और रतन टाटा के बीच 2009 की बातचीत के जो और टेप निकल कर आए हैं उनका एक हिस्सा हम आपके सामने ला रहे हैं. इसमें साफ होता है कि कैसे रतन टाटा किसी भी कीमत पर दयानिधि मारन को संचार मंत्री बनने से रोक रहे थे.
रतन टाटा-
यह दयानिधि बहुत गड़बड़ कर रहा है। ए राजा को तो मैनेज किया जा सकता हैं।

नीरा रा़डिया-
 पता है और दयानिधि का फोन मेरे पास भी आया था। वो गुलाम नबी और अहमद पटेल से लगातार मिल रहा है। करुणानिधि से भी मनमोहन सिंह को फोन करवाया है।

रतन टाटा-
 इसका क्या करना है? मुझे तो यह आदमी खतरनाक लगता है और ये हमे दूसरों के बराबर खड़ा नहीं होने देगा। राजा ने बीएसएनएल वाले मामले में हैल्प की थी और एक ज्वाइंट सेक्रेटरी को तो मेरे साथ कांटेक्ट रखने के लिए कहा था।
नीरा राडिया- पैसा हर जगह चलता है। मगर दयानिधि और कलानिधि को पैसा कमाना आता है। बहुत चालाक है ये लोग। दयानिधि ने तो अपने टीवी चैनल और सारे मीडिया के काम का कॉरपोरेट ऑफिस डीएमके के ऑफिस में ही बनाया है। पार्टी को पैसा भी लगातार पहुंचता है। करुणानिधि को हैंडल करना पड़ेगा। मैं कनिमोझी-करुणानिधि की बेटी से संपर्क में हूं। लालची तो राजा भी है लेकिन उसे सिर्फ काम के पैसे चाहिए।

सुन लिया आपने? दयानिधि मारन के बहाने रतन टाटा की भी पोल कैसे खुल रही है? ए राजा पर सीधे सीधे स्पैक्ट्रम घोटाले में हजारों करोड़ के घपले का इल्जाम लगा। नीरा राडिया के साथ उनकी बातचीत के टेप उजागर हो गए मगर उनका मिस्टर क्लीन मनमोहन सिंह भी कुछ नहीं बिगाड़ पाए। कनिमोझी तो साफ साफ कहती है कि मारन बंधुओं का टीवी और अखबारों का साम्राज्य मदद करता है मगर अगर पार्टी नहीं होती तो यह साम्राज्य भी नहीं होता।
इसी बातचीत में एक जगह यह भी आया है कि दयानिधि मंत्री बनने के ठीक पहले तक सुमंगली केबल नेटवर्क चलाते थे और पूरे तमिलनाडु में केबिल कारोबार पर उनका ही सिक्का चलता था। मंत्री बनने के बाद उन्होंने सुमंगली केबल नेटवर्क भाई कालानिधि को पावर ऑफ अटार्नी पर दे दिया। इतना ही नहीं, दयानिधि मारन ने संसद में झूठ बोला कि सन चैनल से उनका लेना देना नहीं हैं मगर स्टॉक एक्सचेंज ने जो दस्तावेज दिए गए हैं उनके अनुसार दयानिधि मारन को इस पूरे कारोबार का प्रमोटर बताया गया हैं। करुणानिधि और दयानिधि के नामों का अर्थ एक ही होता है और शायद इसीलिए करुणानिधि अझागिरी और स्टालिन की नाराजी के बावजूद दयानिधि को बचाते रहते है।
रतन टाटा नीरा राडिया का इस्तेमाल कर के द्रमुक कोटे में किसी भी कीमत पर दयानिधि मारन को संचार मंत्री बनने से क्यों रोकना चाहते थे? धीरे धीरे गुप्तचर एजेंसियों के पास इसके सबूत आते जा रहे हैं। दयानिधि मारन करुणानिधि के चचेरे पोते हैं लेकिन उनका यही परिचय नहीं है। मारन परिवार एशिया के सबसे रईस परिवारों में से एक हैं और सन टीवी के अलावा उसके कई दक्षिण भारतीय भाषाओं में सात चैनल, कई एफएम स्टेशन और दिनाकरन नाम का एक अखबार भी है जो दस लाख कॉपी रोज बेचता है। जब इस मीडिया साम्राज्य के शेयर बेचे गए तो साढ़े आठ सौ रुपए में दस रुपए का एक शेयर बिका और जितनी उम्मीद थी उससे पैतालीस गुना ज्यादा बिका। पंद्रह दिन में मारन परिवार के पास 9 हजार 9 सौ 20 करोड़ रुपए आ गए।

दयानिधि मारन पहले खुद नीरा राडिया के काफी करीब थे। जब वे चेन्नई में हैल फ्रीजेज ओवर यानी एचएफओ के नाम से डिस्को और बार चलाया करते थे तो नीरा राडिया कई बार वहां देखी गई। अप्रैल 2006 में नीरा राडिया रतन टाटा को भी यहां ले के आई थी। सन मीडिया साम्राज्य दयानिधि के भाई और अमरीका में पढ़े लिखे कलानिधि चलाते हैं और जब दक्षिण भारत में उनके मीडिया साम्राज्य की तूती बोलने लगी तो उन्होंने इरादे और बड़े कर लिए। कलानिधि मारन ने रतन टाटा को संदेश भिजवाया कि उनके डिश कारोबार यानी टाटा स्काई डीटीएच सर्विस में एक तिहाई हिस्सा दस रुपए प्रति शेयर के हिसाब से सन समूह के नाम किया जाए। तब तक टाटा स्काई के अस्सी प्रतिशत मालिक टाटा थे और बीस प्रतिशत पैसा स्टार टीवी ने लगाया हुआ था।
नीरा राडिया ने टाटा को समझाया मगर रतन टाटा ने साफ इंकार कर दिया। नीरा के जरिए ही रतन टाटा तक संदेश पहुंचाया गया कि दयानिधि मारन देश के संचार मंत्री है और मंत्रालय कभी भी टाटा स्काई बंद करवाने के लिए आदेश दे सकता हैं। लाइसेंस रद्द करना संचार और सूचना प्रसारण मंत्रालय का काम है और लाइसेंस की शर्तों में ऐसी एक दर्जन शर्ते हैं जिनके न मानने पर सरकार एकतरफा लाइसेंस रद्द कर सकती है।
उस समय लाल कृष्ण आडवाणी ने भी कहा था कि दयानिधि मारन अपने भाई और अपनी सन टीवी कंपनी को डीटीएच और एफएम के लिए सारे नियम तोड़ कर स्पेक्ट्रम अलॉट कर रहे हैं। रतन टाटा को खतरों का अंदाजा था इसलिए उन्होंने इस सरकार में दयानिधि मारन को संचार मंत्रालय किसी भी कीमत पर नहीं मिलने देने के लिए दलाली से ले कर दादागीरी तक और रोकड़े के इस्तेमाल तक सब कुछ किया


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--- संजय सेन सागर

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