Skip to main content

लो क सं घ र्ष !: न्याय में देरी का अर्थ बगावत नहीं

माननीय उच्चतम न्यायलय के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा कि न्याय में देरी होने से बगावत हो सकती हैइस बात का क्या आशय है ये आमजन की समझ से परे बात है न्यायपालिका ने त्वरित न्याय देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स की स्थापना की है फास्ट ट्रैक न्यायलयों में अकुशल न्यायधीशों के कारण फैसले तो शीघ्र हो रहे हैं किन्तु सुलह समझौते के आधार पर निर्णीत वादों को छोड़ कर 99 प्रतिशत सजा की दर है जिससे सत्र न्यायलय द्वारा विचारित होने वाले वादों की अपीलें माननीय उच्च न्यायलय में पहुँच रही हैंजिससे माननीय उच्च न्यायलयों में कार्य का बोझ बढ़ जाने से वहां की व्यवस्था डगमगा रही है और वहां पर न्याय मिलने में काफी देरी हो रही है कुछ प्रमुख मामलो में जनभावनाओ के दबाव के आगे उनकी पुन: जांच वाद निर्णित होने के बाद प्रारंभ की जा रही हैअपराधिक विधि का मुख्य सिधान्त यह है की आरोप पत्र दाखिल हो जाने के बाद पुन: विवेचना नहीं होनी चाहिए और ही संसोधन की ही व्यवस्था हैकानून में बार-बार संशोधन से न्याय की अवधारणा ही बदल जाती हैन्याय का आधार जनभावना नहीं होती हैसाक्ष्य और सबूतों के आधार पर वाद निर्णित होते हैंजेसिका पाल, रुचिका आदि मामलों में न्यायिक अवधारणाएं बदली जा रही हैं जबकि होना यह चाहिए की विवेचना करने वाली एजेंसी चाहे वह सी.बी.आई हो पुलिस हो या कोई अन्य उसकी विवेचना का स्तर निष्पक्ष और दबाव रहित होना चाहिए जो नहीं हो रहा हैमुख्य समस्या अपराधिक विधि में यह है जिसकी वजह से न्याय में देरी होती हैन्याय में देरी होने का मुख्य कारण अभियोजन पक्ष होता है जिसके ऊपर पूरा नियंत्रण राज्य का होता हैराज्य की ही अगर दुर्दशा है तो न्याय और अन्याय में कोई अंतर नहीं रह जाता हैआज अधिकांश थानों का सामान्य खर्चा उनका सरकारी कामकाज अपराधियों के पैसों से चलता हैउत्तर प्रदेश में पुलिस अधिकारियों करमचारियों का भी एक लम्बा अपराधिक इतिहास है कैसे निष्पक्ष विवेचना हो सकती है और लोगो को इन अपराधिक इतिहास रखने वाले अपराधियों से न्याय कैसे न्याय मिल सकता है ? जनता में अगर बगावती तेवर होते तो हम लोग ब्रिटिश साम्राज्यवाद के गुलाम नहीं होते ।

Comments

Popular posts from this blog

हाथी धूल क्यो उडाती है?

केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

चेतन आनंद/नेपाल-बवाल

समसामयिक लेख- नेपाल का बवाल भारत के लिए खतरा?                   नेपाल का बवाल भारत के लिए कई स्तरों पर खतरा साबित हो सकता है। यह खतरा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है। भारत और नेपाल की खुली सीमा (लगभग 1,770 किमी) से आतंकवादी, माओवादी या अन्य असामाजिक तत्व आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर नेपाल के माध्यम से भारत पर दबाव बना सकता है। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से चीन को अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलता है। चीन की बेल्ट एेंड रोड इनिशिएटिव और अन्य परियोजनाओं से नेपाल में उसकी रणनीतिक स्थिति भारत के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा विवाद जैसे लिपुलेख, कालापानी, लिम्पियाधुरा को भड़काकर नेपाल की राजनीति भारत विरोधी हो सकती है। नेपाल में बढ़ती राष्ट्रवादी राजनीति भारत के खिलाफ माहौल बना सकती है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते प्रभावित होंगे। भारत-नेपाल के बीच व्यापार और ऊर्जा परियोजनाएँ बाधित हो सकती हैं। नेपाल में अस्थिरता का अस...