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मीडिया फेलोशिप आमंत्रित

नयी दिल्ली -'अंगिका डेवलपमेंट सोसाइटी' भागलपुर ने मुस्लिम महिलाओं में साक्षरता और देश के अलग अलग राज्यों में नक्सलवाद की मौजूदा स्थिति पर मीडिया फेलोशिप आमंत्रित की है फेलोशिप के लिए चुने गए पत्रकारों को एक लाख रूपए की राशि दी जाएगी ,जिनमे यात्रा खर्चा तथा अन्य व्यय शामिल हैं , संस्था द्वारा फेलोशिप हेतु तीन पुरुष और तीन महिला पत्रकारों का चुनाव साक्षात्कार के आधार पर किया जायेगा ,जो जनवरी के दूसरे सप्ताह में भागलपुर में आयोजित की जाएगी इस फेलोशिप हेतु अन्य जानकारी www.angika.ind.in पर उपलब्ध रहेगी ,फेलोशिप के इच्छुक पत्रकार नियम और शर्तों के आधार पर ३१ दिसम्बर तक अपना आवेदन rajesh.srivastava@angika.ind.in पर भेज सकते हैं , अन्य जानकारी 0641-2452303,2452503 पर ले सकते हैं संस्था के सचिव राजेश श्रीवास्तव ने बताया की फेलोशिप में सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी को २ लाख रूपए का रिवार्ड भी दिया जायेगा

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केहि कारण पान फुलात नही॥? केहि कारण पीपल डोलत पाती॥? केहि कारण गुलर गुप्त फूले ॥? केहि कारण धूल उडावत हाथी॥? मुनि श्राप से पान फुलात नही॥ मुनि वास से पीपल डोलत पाती॥ धन लोभ से गुलर गुप्त फूले ॥ हरी के पग को है ढुधत हाथी..

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समसामयिक लेख- नेपाल का बवाल भारत के लिए खतरा?                   नेपाल का बवाल भारत के लिए कई स्तरों पर खतरा साबित हो सकता है। यह खतरा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक, आर्थिक, सामरिक और आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है। भारत और नेपाल की खुली सीमा (लगभग 1,770 किमी) से आतंकवादी, माओवादी या अन्य असामाजिक तत्व आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर नेपाल के माध्यम से भारत पर दबाव बना सकता है। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से चीन को अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलता है। चीन की बेल्ट एेंड रोड इनिशिएटिव और अन्य परियोजनाओं से नेपाल में उसकी रणनीतिक स्थिति भारत के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा विवाद जैसे लिपुलेख, कालापानी, लिम्पियाधुरा को भड़काकर नेपाल की राजनीति भारत विरोधी हो सकती है। नेपाल में बढ़ती राष्ट्रवादी राजनीति भारत के खिलाफ माहौल बना सकती है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते प्रभावित होंगे। भारत-नेपाल के बीच व्यापार और ऊर्जा परियोजनाएँ बाधित हो सकती हैं। नेपाल में अस्थिरता का अस...